बिना UGC-NET या GATE के भी PhD में प्रवेश! IIIT की नई नीति से बदलेगा शोध का रास्ता

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संवाद 24 डेस्क। देश में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में प्रवेश को लेकर लंबे समय से यह शिकायत रही है कि पीएचडी (PhD) में दाखिला प्रक्रिया अत्यधिक कठिन, लंबी और परीक्षा-केंद्रित है। अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए UGC-NET, CSIR-NET या GATE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अनिवार्य माना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में कुछ तकनीकी संस्थानों, विशेष रूप से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) द्वारा पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में आंशिक छूट देने से इस विषय पर नई बहस शुरू हो गई है। नई व्यवस्था के अनुसार कुछ श्रेणी के अभ्यर्थियों को लिखित प्रवेश परीक्षा से छूट दी जा रही है और उन्हें सीधे इंटरव्यू या दूसरे चरण में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है। यह कदम एक ओर शोध को प्रोत्साहित करने वाला माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

IIIT में PhD प्रवेश की नई व्यवस्था क्या है
हाल की प्रवेश अधिसूचनाओं के अनुसार, कुछ IIIT संस्थानों में पीएचडी प्रवेश दो चरणों में किया जाता है। पहले चरण में लिखित या कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट होता है, जबकि दूसरे चरण में इंटरव्यू या रिसर्च इंटरैक्शन शामिल होता है। लेकिन जिन उम्मीदवारों ने GATE, UGC-NET या अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास की है, उन्हें पहले चरण से छूट देकर सीधे इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।
इसी तरह कुछ नियमों में यह भी प्रावधान है कि केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों से उच्च अंक के साथ स्नातक करने वाले या राष्ट्रीय फेलोशिप प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी प्रवेश परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। ऐसे अभ्यर्थियों का चयन सीधे साक्षात्कार और शैक्षणिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह बताया गया है कि जिन छात्रों की योग्यता पहले से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा या उच्च शैक्षणिक उपलब्धियों से सिद्ध है, उन्हें बार-बार परीक्षा देने की आवश्यकता न हो।

UGC के नियम और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की भूमिका
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पिछले कुछ वर्षों में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक मानकीकृत बनाने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। UGC के अनुसार NET या JRF पास उम्मीदवारों को कई मामलों में विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से छूट दी जा सकती है और उनका चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जा सकता है।
2024 से लागू नए नियमों में UGC-NET स्कोर को सीधे पीएचडी प्रवेश के लिए उपयोग करने की अनुमति भी दी गई है। इसके तहत NET पास उम्मीदवारों को तीन श्रेणियों में रखा जाता है—
JRF के साथ PhD के पात्र
बिना JRF के PhD के पात्र
केवल PhD प्रवेश के पात्र
इन श्रेणियों के उम्मीदवारों को अलग-अलग वेटेज के आधार पर प्रवेश दिया जा सकता है, जिसमें लिखित परीक्षा की जगह NET स्कोर और इंटरव्यू को महत्व दिया जाता है।
इससे स्पष्ट है कि IIIT या अन्य संस्थानों द्वारा दी जा रही छूट पूरी तरह से नई नहीं है, बल्कि UGC के व्यापक नियमों के भीतर ही आती है।

किन उम्मीदवारों को मिलती है प्रवेश परीक्षा से छूट
विभिन्न संस्थानों के नियमों को देखें तो सामान्यतः निम्न प्रकार के उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा से छूट मिल सकती है:
UGC-NET / CSIR-NET / JRF पास उम्मीदवार
GATE या अन्य राष्ट्रीय परीक्षा में योग्य अभ्यर्थी
केंद्रीय संस्थानों से उच्च CGPA वाले छात्र
कार्यरत पेशेवर या प्रायोजित (sponsored) उम्मीदवार
फेलोशिप प्राप्त शोधार्थी
इन मामलों में चयन सीधे इंटरव्यू, रिसर्च प्रस्ताव और अकादमिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है।
यह व्यवस्था शोध की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए योग्य उम्मीदवारों को जल्दी अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

नई नीति के पीछे क्या सोच है
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में शोध की संख्या बढ़ाने के लिए प्रवेश प्रक्रिया को लचीला बनाना जरूरी है। कई प्रतिभाशाली छात्र केवल इसलिए पीएचडी नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें बार-बार प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती है या सीटों की संख्या सीमित होती है।
नई व्यवस्था से
समय की बचत होती है
प्रतिभाशाली छात्रों को जल्दी मौका मिलता है
उद्योग में काम कर रहे पेशेवर भी शोध में आ सकते हैं
इसी कारण कई तकनीकी संस्थान और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में सुधार कर रहे हैं।

क्या इससे चयन प्रक्रिया कमजोर होगी
हालांकि इस छूट को लेकर कुछ शिक्षाविद चिंता भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर प्रवेश परीक्षा पूरी तरह खत्म कर दी जाए तो
विश्वविद्यालयों के बीच स्तर में अंतर बढ़ सकता है
इंटरव्यू आधारित चयन में पक्षपात की संभावना हो सकती है
सभी विषयों में समान मानक बनाए रखना कठिन होगा
इसी वजह से अधिकांश संस्थान लिखित परीक्षा को पूरी तरह समाप्त नहीं कर रहे, बल्कि केवल योग्य उम्मीदवारों को ही छूट दे रहे हैं।

अन्य विश्वविद्यालयों में भी मिलती है ऐसी छूट
केवल IIIT ही नहीं, कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में भी प्रवेश परीक्षा से छूट का प्रावधान है। कुछ विश्वविद्यालय NET या फेलोशिप धारकों को सीधे इंटरव्यू में बुलाते हैं, जबकि कुछ संस्थान कर्मचारियों या अनुभवी पेशेवरों को भी लिखित परीक्षा से मुक्त रखते हैं।
इससे स्पष्ट है कि देश में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया धीरे-धीरे अधिक लचीली होती जा रही है।

शोध को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति
नई शिक्षा नीति और UGC के सुधारों का एक बड़ा लक्ष्य यह है कि भारत में शोध और नवाचार की संख्या बढ़े। सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक छात्र
विज्ञान और तकनीक में रिसर्च करें
उद्योग से जुड़ा शोध बढ़े
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भागीदारी बढ़े
इसलिए प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह कठोर रखने की बजाय संतुलित बनाया जा रहा है।

छात्रों के लिए क्या मतलब है यह बदलाव
इस नई व्यवस्था का छात्रों पर कई तरह का प्रभाव पड़ेगा
✔ NET / GATE पास छात्रों को फायदा ✔ अच्छे अकादमिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को अवसर ✔ काम कर रहे पेशेवर भी PhD कर सकेंगे ✔ लेकिन सामान्य छात्रों के लिए प्रतियोगिता बनी रहेगी
क्योंकि अधिकांश सीटें अभी भी चयन प्रक्रिया के बाद ही मिलती हैं।

सावधानी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि
प्रवेश परीक्षा से छूट का मतलब आसान प्रवेश नहीं है
इंटरव्यू और रिसर्च प्रस्ताव बहुत महत्वपूर्ण होता है
पीएचडी में चयन के बाद भी coursework और research कठिन होते हैं
इसलिए केवल नियम बदलने से सफलता आसान नहीं होती।

निष्कर्ष: आसान नहीं, लेकिन ज्यादा व्यवस्थित हो रही है PhD प्रवेश प्रक्रिया
IIIT और अन्य संस्थानों द्वारा प्रवेश परीक्षा में दी जा रही छूट को उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार के रूप में देखा जा सकता है। यह कदम उन छात्रों के लिए राहत है जो पहले से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास कर चुके हैं या जिनकी शैक्षणिक योग्यता मजबूत है।
हालांकि इस बदलाव के साथ पारदर्शिता, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले समय में संभव है कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया और अधिक डिजिटल, मेरिट आधारित और इंटरव्यू-केंद्रित हो जाए।
शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना अब भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नई नीतियों से यह रास्ता पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित जरूर होता दिखाई दे रहा है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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