4 वर्षीय ITEP से बदलेगा शिक्षक बनने का रास्ता: नई शिक्षा नीति के बाद B.Ed का भविष्य क्या?

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संवाद 24 डेस्क। भारत में शिक्षक बनने की प्रक्रिया तेजी से बदल रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद अब पारंपरिक बीएड प्रणाली की जगह एक नई व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जा रही है, जिसका केंद्र है चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP)। इस कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (NCET) 2026 की अंतिम तिथि ने लाखों छात्रों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। देशभर के विश्वविद्यालयों, आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय संस्थानों में इसी परीक्षा के माध्यम से दाखिला दिया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में शिक्षक बनने के लिए यही कोर्स सबसे महत्वपूर्ण होगा। इसलिए 12वीं पास छात्रों के बीच इस परीक्षा को लेकर उत्सुकता बढ़ना स्वाभाविक है।

NCET 2026 : आवेदन की अंतिम तिथि और परीक्षा कार्यक्रम ने बढ़ाई सक्रियता
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NCET 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया फरवरी 2026 से शुरू हुई और 10 मार्च आवेदन की अंतिम तिथि तय की गई। इसके बाद 11 मार्च तक शुल्क जमा करने की अनुमति दी गई, जबकि 12 से 14 मार्च तक फॉर्म में सुधार का मौका दिया गया है। परीक्षा 17 अप्रैल 2026 को कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जाएगी।
यह परीक्षा देशभर के चुनिंदा संस्थानों में चल रहे चार वर्षीय ITEP कोर्स में प्रवेश का एकमात्र माध्यम है। इसलिए अंतिम तिथि के नजदीक आते ही आवेदन पोर्टल पर छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ती देखी गई।

क्या है ITEP : नई शिक्षा नीति का सबसे बड़ा बदलाव
इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किया गया एक चार वर्षीय समेकित कोर्स है, जिसमें छात्र 12वीं के बाद सीधे BA-B.Ed, BSc-B.Ed या BCom-B.Ed कर सकते हैं। इस कोर्स का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को तैयार करना है जो विषय ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धति में भी प्रशिक्षित हों।
इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें स्नातक और बीएड अलग-अलग करने के बजाय एक साथ कराया जाता है, जिससे समय भी बचता है और प्रशिक्षण अधिक व्यवस्थित होता है।

2030 के बाद चार वर्षीय बीएड ही बनेगा शिक्षक बनने की अनिवार्य योग्यता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार वर्ष 2030 के बाद स्कूल शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय समेकित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम को न्यूनतम योग्यता माना जाएगा। यही कारण है कि सरकार धीरे-धीरे पुराने मॉडल को समाप्त कर रही है और ITEP को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी और शिक्षा प्रणाली अधिक पेशेवर बनेगी।

किन संस्थानों में मिलेगा दाखिला : IIT, NIT से लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय तक
ITEP को देश के चुनिंदा संस्थानों में शुरू किया गया है। इनमें आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE) और सरकारी कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों में प्रवेश केवल NCET के स्कोर के आधार पर होगा।
हाल के वर्षों में इस कोर्स की सीटें भी बढ़ाई गई हैं और अधिक विश्वविद्यालयों को इसे शुरू करने की अनुमति दी जा रही है, ताकि प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके।

क्यों बढ़ रही है ITEP की लोकप्रियता
ITEP को लेकर छात्रों में उत्साह बढ़ने के कई कारण हैं
12वीं के बाद सीधे शिक्षक बनने की पढ़ाई
अलग से बीएड करने की जरूरत नहीं
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार भविष्य में यही अनिवार्य डिग्री
सरकारी व निजी स्कूलों में नौकरी के अधिक अवसर
प्रशिक्षण के साथ विषय ज्ञान
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कोर्स से शिक्षकों की गुणवत्ता बेहतर होगी और स्कूल शिक्षा में सुधार आएगा।

परीक्षा पैटर्न : 12वीं स्तर के आधार पर होगी परीक्षा
NCET परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और इसमें भाषा दक्षता, सामान्य ज्ञान, शिक्षण अभिरुचि, तार्किक क्षमता और विषय से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा का स्तर मुख्य रूप से कक्षा 12 के पाठ्यक्रम पर आधारित होगा।
छात्रों को उस विषय के अनुसार डोमेन चुनना होगा, जिसमें वे ITEP करना चाहते हैं।

नई शिक्षा नीति और स्कूल शिक्षा का नया ढांचा
ITEP को नई शिक्षा नीति के तहत बने 5+3+3+4 स्कूल संरचना के अनुसार तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि शिक्षक प्रशिक्षण अब फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी स्तर के अनुसार दिया जाएगा।
इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि शिक्षक केवल विषय पढ़ाने वाला न हो, बल्कि बच्चों के विकास की पूरी प्रक्रिया को समझने वाला प्रशिक्षित विशेषज्ञ बने।

राज्यों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लागू हो रहा नया सिस्टम
देश के कई विश्वविद्यालयों ने चार वर्षीय BA-B.Ed और अन्य समेकित कोर्स शुरू करने की तैयारी कर ली है। कई राज्य भी अब ITEP में प्रवेश के लिए NCET को ही अनिवार्य बना रहे हैं, जिससे पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
यह कदम शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर एकरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुरानी बीएड व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर
पहले छात्र स्नातक करने के बाद 2 वर्ष का बीएड करते थे, लेकिन नई व्यवस्था में 4 वर्षीय समेकित कोर्स को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि अभी कुछ वर्षों तक दोनों सिस्टम साथ-साथ चलेंगे, लेकिन धीरे-धीरे ITEP ही मुख्य मार्ग बन जाएगा।
शिक्षा नीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे शिक्षक बनने की प्रक्रिया लंबी जरूर होगी, लेकिन गुणवत्ता बेहतर होगी।

छात्रों के लिए क्या है सबसे बड़ा फायदा
ITEP से छात्रों को कई लाभ मिलेंगे
समय की बचत
बेहतर प्रशिक्षण
राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
रोजगार के अधिक अवसर
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार
इस कारण 12वीं के बाद सीधे इस कोर्स में प्रवेश लेने की मांग तेजी से बढ़ रही है।

शिक्षक बनने का भविष्य : प्रोफेशनल मॉडल की ओर बढ़ता भारत
भारत में लंबे समय से शिक्षक प्रशिक्षण को लेकर गुणवत्ता की समस्या रही है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षक शिक्षा को मेडिकल और इंजीनियरिंग की तरह पेशेवर बनाना है।
ITEP उसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

छात्रों के लिए सलाह : अंतिम तिथि का इंतजार नहीं, तैयारी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि NCET जैसी परीक्षाओं के लिए अंतिम समय तक इंतजार करना सही नहीं है। क्योंकि यह परीक्षा केवल एक कोर्स नहीं बल्कि भविष्य की शिक्षक भर्ती से जुड़ी है।
जो छात्र स्कूल शिक्षक बनना चाहते हैं, उनके लिए अभी से योजना बनाना जरूरी है।

शिक्षा व्यवस्था के नए दौर की शुरुआत
चार वर्षीय ITEP कोर्स और NCET परीक्षा केवल एक प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। आने वाले वर्षों में शिक्षक बनने का रास्ता अधिक व्यवस्थित, पेशेवर और प्रतिस्पर्धी होगा।
नई शिक्षा नीति का लक्ष्य है कि स्कूलों में प्रशिक्षित, योग्य और आधुनिक सोच वाले शिक्षक हों, और ITEP उसी लक्ष्य की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Geeta Singh
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