यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला: अब मैथ्स-साइंस में नहीं कटेंगे पूरे नंबर, ‘स्टेप मार्किंग’ से अब हर स्टेप पर मिलेंगे नंबर

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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) हर वर्ष देश की सबसे बड़ी बोर्ड परीक्षाओं में से एक का आयोजन करता है, जिसमें करोड़ों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाता है। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा से पहले परिषद ने मूल्यांकन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए गणित और विज्ञान विषयों की कॉपियों की जांच में स्टेप मार्किंग प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। इस फैसले को शिक्षा जगत में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कठिन विषयों में अंतिम उत्तर गलत होने पर पूरे अंक काट लिए जाते थे, जिससे छात्रों का परिणाम प्रभावित होता था।
यह बदलाव केवल अंक देने की तकनीक में सुधार नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मनोवैज्ञानिक दबाव, परीक्षा-प्रणाली की निष्पक्षता और शिक्षा के मूल्यांकन के तरीके पर व्यापक प्रभाव डालने वाला निर्णय है।

क्या है स्टेप मार्किंग, और क्यों किया गया लागू
स्टेप मार्किंग एक ऐसी मूल्यांकन पद्धति है जिसमें केवल अंतिम उत्तर सही होने पर ही अंक नहीं दिए जाते, बल्कि प्रश्न हल करने की पूरी प्रक्रिया के हर सही चरण पर अंक दिए जाते हैं। यदि छात्र ने सही सूत्र लगाया, सही विधि अपनाई, लेकिन अंतिम गणना में गलती हो गई, तो उसे आंशिक अंक मिलेंगे। यह प्रणाली पहले से कई बोर्डों में प्रचलित है और निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए उपयोगी मानी जाती है।
यूपी बोर्ड ने अपने निर्देशों में स्पष्ट कहा है कि गणित और विज्ञान जैसे विषयों में छात्र अक्सर प्रश्न का पूरा समाधान नहीं कर पाते, लेकिन उनकी समझ सही होती है। ऐसे में केवल अंतिम उत्तर देखकर शून्य अंक देना उचित नहीं है। इसी कारण परीक्षकों को मार्किंग स्कीम के अनुसार हर स्टेप के लिए अंक देने का निर्देश दिया गया है।

छात्रों के तनाव को कम करने की दिशा में कदम
बोर्ड परीक्षाओं में सबसे अधिक डर गणित और विज्ञान विषयों का माना जाता है। कई छात्र प्रश्न समझ लेते हैं, लेकिन छोटी-सी गणना की गलती के कारण पूरा सवाल गलत हो जाता है। नई व्यवस्था से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, क्योंकि अब उन्हें यह भरोसा रहेगा कि मेहनत का कुछ न कुछ फल अवश्य मिलेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब छात्र जानते हैं कि उन्हें हर स्टेप पर अंक मिलेंगे, तो वे प्रश्न छोड़ने के बजाय हल करने का प्रयास करते हैं। इससे सीखने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है और परीक्षा का डर कम होता है।

मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में हर साल लाखों कॉपियों की जांच होती है। वर्ष 2026 में भी लगभग 50 लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हुए हैं, जिनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सैकड़ों केंद्रों पर किया जा रहा है।
इतनी बड़ी संख्या में कॉपियों की जांच के दौरान त्रुटि की संभावना भी रहती है। इसलिए बोर्ड ने परीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित मार्किंग स्कीम का पालन करें और मनमाने तरीके से अंक न दें। इससे मूल्यांकन में एकरूपता आएगी और परिणाम अधिक विश्वसनीय होंगे।

पहले भी उठती रही है निष्पक्ष मूल्यांकन की मांग
पिछले वर्षों में कई बार यह शिकायत सामने आई कि प्रश्नपत्र में गलती होने या कठिन प्रश्न आने पर भी छात्रों को पूरा अंक नहीं मिल पाता। कुछ मामलों में बोर्ड को बाद में संशोधन करना पड़ा और छात्रों को अतिरिक्त अंक देने पड़े।
इसी तरह, कई शिक्षा विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि केवल अंतिम उत्तर पर आधारित मूल्यांकन छात्रों की वास्तविक समझ को नहीं दर्शाता। इसलिए स्टेप मार्किंग जैसी प्रणाली लंबे समय से लागू करने की मांग की जा रही थी।

डिजिटल मूल्यांकन और नई तकनीक की ओर बढ़ता बोर्ड
यूपी बोर्ड ने हाल के वर्षों में परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। पहली बार मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, जिसमें परीक्षक सीधे ऑनलाइन अंक दर्ज करेंगे।
डिजिटल रिकॉर्ड रखने से गलतियों की संभावना कम होगी और परिणाम जल्दी जारी करने में मदद मिलेगी। स्टेप मार्किंग और डिजिटल मूल्यांकन मिलकर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बना सकते हैं।

परीक्षा में सख्ती और मूल्यांकन में नरमी — नई रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि बोर्ड ने एक तरफ परीक्षा में नकल रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं, वहीं दूसरी तरफ मूल्यांकन में छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए लचीला दृष्टिकोण अपनाया है।
2026 की परीक्षा के लिए बोर्ड ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
इस नीति का उद्देश्य यह है कि परीक्षा ईमानदारी से हो, लेकिन परिणाम छात्रों के प्रयास के अनुसार आए।

शिक्षकों की भूमिका भी हुई अधिक जिम्मेदार
स्टेप मार्किंग लागू होने के बाद परीक्षकों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। अब उन्हें केवल सही या गलत का निर्णय नहीं करना, बल्कि यह भी देखना होगा कि छात्र ने समाधान के कितने चरण सही किए हैं।
इसके लिए बोर्ड द्वारा विस्तृत मार्किंग स्कीम तैयार की जाती है, जिसमें हर प्रश्न के अलग-अलग स्टेप के लिए अंक निर्धारित होते हैं। इससे परीक्षकों को एक समान तरीके से कॉपी जांचने में मदद मिलती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब मूल्यांकन के स्पष्ट नियम होते हैं, तो अलग-अलग परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों में अंतर कम हो जाता है और परिणाम अधिक भरोसेमंद बनते हैं।

शिक्षा मनोविज्ञान की दृष्टि से क्यों जरूरी है स्टेप मार्किंग
शिक्षा मनोविज्ञान के अनुसार, यदि छात्र को उसके प्रयास के अनुसार अंक मिलते हैं तो वह सीखने के लिए अधिक प्रेरित होता है।
केवल अंतिम उत्तर पर आधारित मूल्यांकन से छात्र रटने की आदत विकसित कर लेते हैं, जबकि स्टेप मार्किंग उन्हें समझकर पढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
गणित और विज्ञान जैसे विषयों में प्रक्रिया का सही होना अंतिम उत्तर से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए कई अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों में भी आंशिक अंक देने की व्यवस्था होती है।

क्या इससे रिजल्ट में आएगा सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेप मार्किंग लागू होने से फेल होने वाले छात्रों की संख्या कम हो सकती है, खासकर गणित और विज्ञान में।
हर साल बड़ी संख्या में छात्र केवल एक-दो नंबर से फेल हो जाते हैं। यदि उन्हें सही स्टेप के अंक मिलेंगे, तो उनका परिणाम बेहतर हो सकता है।
हालांकि बोर्ड का उद्देश्य केवल पास प्रतिशत बढ़ाना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष मूल्यांकन करना है ताकि छात्र की वास्तविक क्षमता सामने आ सके।

बड़ी संख्या में होने वाली परीक्षा, बड़ी जिम्मेदारी
यूपी बोर्ड देश का सबसे बड़ा स्कूल शिक्षा बोर्ड माना जाता है। हर वर्ष लाखों नहीं बल्कि करोड़ों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होती है।
इतनी बड़ी परीक्षा में मूल्यांकन की छोटी-सी गलती भी हजारों छात्रों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बोर्ड लगातार मूल्यांकन प्रणाली में सुधार करने की कोशिश कर रहा है।
स्टेप मार्किंग का फैसला इसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या भविष्य में अन्य विषयों में भी लागू होगी व्यवस्था
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आगे चलकर अन्य विषयों में भी स्टेप मार्किंग लागू की जा सकती है, खासकर उन विषयों में जहां वर्णनात्मक उत्तर लिखे जाते हैं।
कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी लागू हो सकती है, जिससे जांच अधिक तेज और सटीक होगी।

छात्रों के हित में सही दिशा में कदम
यूपी बोर्ड द्वारा गणित और विज्ञान की कॉपियों में स्टेप मार्किंग लागू करना एक सकारात्मक और दूरगामी निर्णय है। इससे छात्रों को उनके प्रयास के अनुसार अंक मिलेंगे, परीक्षा का डर कम होगा और परिणाम अधिक निष्पक्ष होंगे।
आज के समय में शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया है। यदि मूल्यांकन प्रणाली छात्र की समझ को सही तरीके से मापे, तभी शिक्षा का उद्देश्य पूरा होता है।
स्टेप मार्किंग उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, न्यायपूर्ण और छात्र-हितैषी बना सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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