करोड़ों की नौकरी और UPSC की तैयारी साथ-साथ, जानिए कैलिफ़ोर्निया से लखनऊ तक पीयूष कपूर की प्रेरणादायक यात्रा

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संवाद 24 डेस्क। आज के दौर में जब युवा बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी पाने को सफलता की अंतिम मंजिल मानते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक महत्वपूर्ण समाज और देश के लिए योगदान देना होता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले पीयूष कपूर की कहानी इसी सोच का उदाहरण है। अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में गूगल जैसी विश्व-प्रसिद्ध कंपनी में कार्यरत रहते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो भौगोलिक दूरी या व्यस्तता भी बाधा नहीं बनती।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पीयूष कपूर ने 402वीं रैंक प्राप्त की। यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वह पिछले लगभग दस वर्षों से अमेरिका में गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य कर रहे थे और उसी के साथ उन्होंने इस कठिन परीक्षा की तैयारी की।
उनकी कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, समय प्रबंधन और देश सेवा के प्रति समर्पण की प्रेरक यात्रा भी है।

लखनऊ की गलियों से सिलिकॉन वैली तक
पीयूष कपूर का बचपन लखनऊ में बीता। एक साधारण भारतीय परिवार में पले-बढ़े पीयूष ने बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पिता अरुण कपूर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारी रहे हैं, जबकि उनकी मां रुचि कपूर गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल था, जिसने उनके व्यक्तित्व को मजबूत आधार दिया।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। तकनीकी क्षेत्र में उनकी प्रतिभा ने उन्हें दुनिया की अग्रणी कंपनियों तक पहुंचाया और अंततः वह अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया स्थित गूगल कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करने लगे।
लेकिन विदेश में शानदार करियर और उच्च वेतन होने के बावजूद उनके मन में हमेशा एक अलग सपना पल रहा था—देश की सेवा करने का सपना।

जब दिल ने कहा—देश के लिए कुछ करना है
पीयूष कपूर के अनुसार, कॉरपोरेट दुनिया में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि उनकी क्षमताओं का उपयोग केवल निजी करियर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वह चाहते थे कि उनकी योग्यता और अनुभव समाज के व्यापक हित में काम आए।
इसी विचार ने उन्हें UPSC की ओर प्रेरित किया। भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली यह परीक्षा लाखों युवाओं का सपना होती है। हर वर्ष लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन उनमें से केवल कुछ ही अंतिम चयन तक पहुंच पाते हैं।
ऐसे में विदेश में रहकर नौकरी के साथ इसकी तैयारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन पीयूष ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।

टाइम ज़ोन बना उनकी पढ़ाई का हथियार
अमेरिका और भारत के समय में लगभग 12 घंटे का अंतर है। सामान्यतः यह अंतर कामकाज और संचार में कठिनाई पैदा करता है, लेकिन पीयूष कपूर ने इसे अपने अध्ययन के लिए उपयोगी बना लिया।
उन्होंने बताया कि जब भारत में रात होती थी, उस समय अमेरिका में उनके लिए अपेक्षाकृत शांत वातावरण होता था। इसी समय का उपयोग उन्होंने पढ़ाई के लिए किया। ऑफिस से लौटने के बाद वह रोजाना पढ़ाई करते और भारतीय समय के अनुसार ऑनलाइन मॉक टेस्ट देते थे।
उनकी रणनीति केवल मेहनत पर आधारित नहीं थी, बल्कि व्यवस्थित योजना पर आधारित थी। उन्होंने अपनी तैयारी को एक “डेटा-ड्रिवन प्रोजेक्ट” की तरह व्यवस्थित किया, जिसमें अध्ययन, टेस्ट और विश्लेषण के स्पष्ट चरण शामिल थे।

Consistency over Intensity” – सफलता का मूल मंत्र
पीयूष कपूर का मानना है कि UPSC जैसी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल लंबी अवधि तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमितता अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अपनी तैयारी का मूल मंत्र बताया—“Consistency over Intensity” यानी अत्यधिक पढ़ाई करने से ज्यादा जरूरी है नियमित और निरंतर अध्ययन।
वे सप्ताह के दिनों में प्रतिदिन लगभग दो घंटे पढ़ाई करते थे, जबकि सप्ताहांत में 13-14 घंटे तक अध्ययन करते थे। यही अनुशासन धीरे-धीरे उनकी तैयारी को मजबूत बनाता गया और अंततः उन्हें सफलता दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।

कॉरपोरेट अनुभव ने परीक्षा में कैसे दी बढ़त
पीयूष कपूर के लिए कॉरपोरेट दुनिया का अनुभव केवल करियर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह UPSC की तैयारी में भी उपयोगी साबित हुआ।
गूगल जैसी बड़ी कंपनी में काम करते हुए उन्होंने जटिल समस्याओं का विश्लेषण करना, दबाव में शांत रहना और टीम के साथ समन्वय बनाकर काम करना सीखा। ये सभी कौशल सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न चरणों—प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू—में भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के प्रशासनिक तंत्र में टेक्नोलॉजी और डेटा-आधारित निर्णयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तकनीकी पृष्ठभूमि वाले अधिकारी प्रशासन में नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोण ला सकते हैं।

परिवार का समर्थन बना सबसे बड़ी ताकत
किसी भी बड़ी उपलब्धि के पीछे परिवार का योगदान महत्वपूर्ण होता है। पीयूष कपूर की सफलता में भी उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उनके पिता, मां और बड़े भाई ने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया। विदेश में रहते हुए UPSC की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार का विश्वास और प्रोत्साहन उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
यह समर्थन उनके लिए मानसिक शक्ति का स्रोत बना, जिसने कठिन समय में भी उन्हें लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।

UPSC—भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर वर्ष लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का ही होता है।
इस परीक्षा में तीन चरण होते हैं—
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
मुख्य परीक्षा (Mains)
साक्षात्कार (Interview)
तीनों चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद ही उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति मिलती है।
पीयूष कपूर ने इस कठिन प्रक्रिया को पार करते हुए 402वीं रैंक प्राप्त की, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी यह कहानी
पीयूष कपूर की कहानी आज के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है— सपनों की कोई सीमा नहीं होती।
यदि कोई व्यक्ति विदेश में उच्च वेतन वाली नौकरी करते हुए भी देश सेवा के लिए प्रयास कर सकता है, तो यह दिखाता है कि लक्ष्य के प्रति समर्पण सबसे बड़ी शक्ति है।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि UPSC जैसी परीक्षा के लिए केवल कोचिंग या बड़े संसाधन जरूरी नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, समय प्रबंधन और स्पष्ट रणनीति ही सफलता की कुंजी है।

टेक्नोलॉजी और प्रशासन का नया संगम
आज भारत तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। ई-गवर्नेंस, डेटा-आधारित नीति निर्माण और डिजिटल सेवाओं का विस्तार प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
ऐसे समय में तकनीकी पृष्ठभूमि वाले अधिकारी प्रशासन में नई ऊर्जा और नवाचार ला सकते हैं। पीयूष कपूर जैसे युवा अधिकारी भविष्य में टेक्नोलॉजी और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उनका मानना है कि यदि तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो शासन अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बन सकता है।

संघर्ष, अनुशासन और उद्देश्य की कहानी
पीयूष कपूर की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें युवा अपने करियर से आगे बढ़कर समाज के लिए काम करना चाहते हैं।
लखनऊ की गलियों से शुरू होकर कैलिफ़ोर्निया की टेक दुनिया तक पहुंची उनकी यात्रा यह दिखाती है कि मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य किसी भी व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
UPSC में उनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, यदि व्यक्ति के पास दृढ़ संकल्प, अनुशासन और उद्देश्य की स्पष्टता हो, तो वह किसी भी चुनौती को पार कर सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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