NIRF की तर्ज पर UP में SIRF रैंकिंग लागू, जानिए कौन सा कॉलेज बना नंबर-1
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संवाद 24 डेस्क। भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा का महत्व सदियों से युवाओं और अभिभावकों के बीच सर्वोच्च रहा है। देश में इंजीनियरिंग के लिए सर्वाधिक प्रतिष्ठित परीक्षा JEE Main है, जिसके आधार पर देश भर के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में प्रवेश होता है। इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की एक नई रैंकिंग प्रणाली ‘SIRF’ (State Institutional Ranking Framework) शुरू की है, जो केंद्र सरकार के NIRF (National Institutional Ranking Framework) के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (SIRF): परिचय और उद्देश्य
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) भारत सरकार द्वारा विकसित एक व्यापक मापदंड प्रणाली है जो उच्च शिक्षा संस्थानों को विविध मानकों पर आंकती है, जैसे – शिक्षा गुणवत्ता, अनुसंधान आउटपुट, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, फैकल्टी कौशल आदि। इसी पद्धति को आधार बनाकर अब उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (SIRF) लागू किया है, जिसका लक्ष्य है:
राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में गुणवत्ता प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना
मौजूदा संसाधनों और प्रबंधन को बेहतर बनाना
छात्रों तथा अभिभावकों को संस्थानों के प्रदर्शन के बारे में पारदर्शी जानकारी देना
राज्य में इंजीनियरिंग शिक्षा के स्तर को राष्ट्रीय मानकों के करीब लाना
SIRF रैंकिंग 300 अंकों के पैमाने पर तैयार की गई है, जिसमें विभिन्न गुणात्मक और मात्रात्मक मानकों के आधार पर कॉलेजों को अंक दिए गए हैं।
SIRF रैंकिंग के मुख्य मानक
SIRF रैंकिंग में कुल 10 मुख्य मानकों का समावेश किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
कैंपस और प्लेसमेंट प्रदर्शन
स्टार्टअप और इनोवेशन गतिविधियां
फैकल्टी गुणवत्ता और संलग्नता
इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रयोगशाला सुविधाएं
अनुसंधान प्रकाशन तथा प्रोजेक्ट्स
डिग्री आउटपुट (उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या)
एग्जाम और मूल्यांकन प्रणाली
एक्स्ट्रा-करिकुलर गतिविधियां
वर्कशॉप एवं सेमिनार गतिविधियां
छात्र-शिक्षक अनुपात और सुविधाएं
इन मानकों का उद्देश्य सिर्फ नंबर देना नहीं बल्कि अध्ययन-अनुसंधान में वास्तविक गुणवत्ता की पहचान करना है।
मुख्य परिणाम: टॉप रैंकिंग कॉलेज
SIRF 2026 के अनुसार सबसे उच्च स्थान पर कमला नेहरु इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सुल्तानपुर रहा, जिसने 300 में 234 अंक हासिल किए। उसके बाद क्रमशः राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, आजमगढ़ और राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, कन्नौज दूसरे एवं तीसरे स्थान पर आए हैं।
SIRF रैंकिंग शीर्ष संस्थान (2026)
कमला नेहरु इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी, सुल्तानपुर – 234 अंक
राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, आजमगढ़ – 206 अंक
राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, कन्नौज – 202 अंक
बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी, झांसी – 200 अंक
राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, अंबेडकरनगर – 197 अंक … (सूची जारी)
ये परिणाम यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार इन कॉलेजों की गुणवत्ता और प्रदर्शन को एक संगठित प्रणाली में आंकने पर काम कर रही है, जो आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।
अद्यतन इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया: JEE Main से UPTAC तक
उत्तर प्रदेश में B.Tech पाठ्यक्रम में प्रवेश JEE Main स्कोर के आधार पर होता है। JEE Main देशव्यापी प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा किया जाता है। इस परीक्षा के स्कोर के आधार पर छात्रों को रैंक दी जाती है, जो आगे UPTAC (Uttar Pradesh Technical Admission Counselling) के माध्यम से इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करने में उपयोग होते हैं।
. UPTAC काउंसलिंग प्रक्रिया
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU), लखनऊ द्वारा UPTAC काउंसलिंग आयोजित की जाती है, जिसमें:
रजिस्ट्रेशन
विकल्प चयन
सीट आवंटन
दस्तावेज सत्यापन त्रैतीय चरणों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होती है।
यह प्रक्रिया छात्रों की JEE Main स्कोर, रैंक और विकल्पों के आधार पर पूरी होती है, ताकि वे अपने रुचिकर कॉलेज में प्रवेश ले सकें।
राष्ट्रीय रैंकिंग बनाम राज्य रैंकिंग
भारत में NIRF रैंकिंग को राष्ट्रीय स्तर पर इंजीनियरिंग संस्थानों की गुणवत्ता का प्रमुख मानक माना जाता है। NIRF 2025 में शीर्ष रैंक पर आईआईटी मद्रास, दिल्ली और बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान रहे हैं।
इसके विपरीत, SIRF एक राज्य आधारित पहल है, जो विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के प्रदर्शन को अलग ढंग से देखती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय मापदंडों के आधार पर कॉलेजों का मूल्यांकन भिन्न हो सकता है।
इंजीनियरिंग शिक्षा की आवश्यकता और बदलता परिदृश्य
आज की तकनीकी और डिजिटल दुनिया में इंजीनियरिंग शिक्षा केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार, अनुसंधान और तकनीकी नेतृत्व की सीढ़ी है। JEE Main जैसी राष्ट्रीय परीक्षा छात्रों को एक व्यापक प्लेटफॉर्म देती है, जिससे वे देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश हासिल कर सकते हैं।
साथ ही, NIRF और SIRF जैसी रैंकिंग प्रणालियों की आवश्यकता इसलिए भी है ताकि विद्यार्थियों को स्पष्ट दिशा मिले कि कौन से संस्थान श्रेष्ठ हैं और किस संस्थान में किस क्षेत्र में उत्कृष्टता है।
उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा की चुनौतियाँ
हालांकि इंजीनियरिंग शिक्षा में कई सकारात्मक पहलें हो रही हैं, कुछ मुख्य चुनौतियाँ भी हैं:
. संसाधनों का असमान वितरण
कई सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सुविधाएं राष्ट्रीय स्तर के कॉलेजों जैसे IIT/NIT के समान नहीं हैं, जिसके कारण छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती।
. शोध एवं नवाचार की कमी
भारत में इंजीनियरिंग संस्थानों में शोध-आधारित शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता; ऐसे में स्टार्टअप और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
. रोजगार और इंडस्ट्री की मांग
आज की उद्योग-आधारित दुनिया में छात्रों को अधिक कौशल उन्मुख शिक्षा की आवश्यकता है, जो अध्ययन के साथ-साथ उद्योग की मांग को पूरा करे।
भविष्य की दिशा: SIRF के प्रभाव और संभावनाएँ
राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (SIRF) के लागू होने से उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति छात्रों, संस्थानों और उद्योग दोनों को लाभ पहुंचा सकती है:
✔ गुणवत्ता-आधारित प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी ✔ कॉलेजों को सुधार के लिए दिशा-निर्देश मिलेंगे ✔ छात्रों को पारदर्शी निर्णय लेने में मदद मिलेगी
सरकार का यह कदम शिक्षा प्रणालियों को उन कॉलेजों के लिए बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है जो राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा SIRF रैंकिंग और JEE Main आधारित प्रवेश प्रक्रिया को लागू करना तकनीकी शिक्षा में एक बड़ा परिवर्तन दर्शाता है। इससे न केवल सरकारी कॉलेजों की क्षमता में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को बेहतर विकल्प चुनने में भी मदद मिलेगी।
देश और राज्य दोनों के संदर्भ में इंजीनियरिंग शिक्षा की भूमिका दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, और ऐसे सुधारात्मक कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य की तकनीकी पीढ़ी सुनियोजित, कुशल और प्रतिस्पर्धी बने।






