कक्षा 6 से शुरू की तैयारी, JEE Main 2026 में 100 परसेंटाइल—जानिए श्रेयस मिश्रा की सफलता का मंत्र
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संवाद 24 डेस्क। भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा Joint Entrance Examination (JEE) Main 2026 – Session 1 के परिणाम घोषित होने के साथ ही देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा की सूची में एक नई मिसाल दर्ज हुई है। 17-वर्षीय श्रेयस मिश्रा ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 100 परसेंटाइल स्कोर प्राप्त कर ऑल इंडिया टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे शैक्षणिक परिदृश्य के लिए प्रेरणास्पद और प्रेरणादायक है। श्रेयस ने इस परीक्षा में अपने पहले प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की, जो उनकी तैयारी, प्रतिबद्धता और पढ़ाई-व्यवस्था की प्रशंसा करती है।
जैसा कि National Testing Agency (NTA) द्वारा जारी परिणाम में दिखाया गया, कुल 12 छात्रों ने 100 परसेंटाइल हासिल किया, जिनमें से श्रेयस मिश्रा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से एक मात्र टॉपर थे। राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों के छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
बचपन से तैयारी शुरू: लक्ष्य की स्पष्ट पहचान
श्रेयस मिश्रा का जेईई की तैयारी सफर केवल दो-तीन साल पुराना नहीं है, बल्कि यह बचपन से विकसित हुई जिज्ञासा और अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत लगभग 2019 में कक्षा 6 से ही कर दी थी, जब वे मात्र 11-12 वर्ष के थे। उस समय उन्होंने गणित में गहरी दिलचस्पी लेकर स्पीड मैथ और अबेकस प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया, जिसने उनके न्यूमेरिकल सोच क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत किया।
प्रधान रूप से गणित के प्रति आकर्षण ही श्रेयस को इंजीनियरिंग क्षेत्र की ओर अग्रसरित करने वाला प्राथमिक कारण था। उन्होंने बताया कि कक्षा 6 के समय से ही उन्हें रोजमर्रा की चीजों में “सवाल पूछने” की आदत थी — पुलों का आकार, मशीनों के काम करने के सिद्धांत, और रोज़मर्रा की वस्तुओं के पीछे वैज्ञानिक कारणों का विश्लेषण करना — ये सब उनकी सोच को गहराई से विकसित कर रहे थे।
इस तरह की जिज्ञासा बच्चों में स्वाभाविक रूप से विकसित नहीं होती; यह वे मानवीय गुण हैं जो उनकी शिक्षा यात्रा को लक्ष्य-समेतित बनाते हैं। श्रेयस के मामले में यह गुण उनके सफलता की नींव साबित हुआ।
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक: संघर्ष और तैयारी की राह
श्रेयस का परिवार मूलतः ओडिशा से दिल्ली-एनसीआर में स्थायी रूप से स्थित है। उनके माता-पिता, जो अपने पोर्टफोलियो में सशक्त शिक्षा-प्रेमी हैं, श्रेयस को हमेशा से ही पढ़ाई, अनुशासन और उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देते आए हैं। श्रेयस के पिता साइबर सुरक्षा सलाहकार हैं, जबकि उनकी मां कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर हैं।
श्रेयस ने बताया कि बच्चेपन से ही उनका परिवार उन्हें शिक्षा में बेहतरी के लिए प्रेरित करता रहा है, लेकिन जब उन्होंने गंभीरता से JEE की तैयारी में उतरने का निर्णय लिया, तो उन्होंने केवल दो साल पहले ग्रेटर नोएडा से पंजाबी बाग, दिल्ली में एक पीजी (पेयिंग गेस्ट रूम) में रहना शुरू किया। इससे उन्हें पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला, और ट्रैवल-टाइम कम होने के कारण अध्ययन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सका।
सख्त अध्ययन संस्थान और रणनीति: 12-14 घंटे का परिश्रम
श्रेयस ने अपनी तैयारी में कोई कठोर नियम नहीं बनाये, बल्कि उन्होंने पढ़ाई को गुणवत्ता-उन्मुख रखा। उनके अध्ययन का एक प्रमुख हिस्सा यह था कि उन्होंने अपनी पढ़ाई को घंटों के हिसाब से नहीं बाँधा, बल्कि सामग्री की गहराई में जाने और विषयों की स्पष्ट समझ पर ज़्यादा ध्यान दिया।
श्रेयस का अध्ययन समय आमतौर पर 12-14 घंटे प्रतिदिन रहा, परन्तु यह समय हमेशा स्थिर नहीं था। कुछ दिनों में उन्होंने पांच-छह घंटे पूरी फोकस के साथ पढ़ाई की, जबकि अन्य दिनों में अधिक समय तक अध्ययन किया। जब वे बोर्ड परीक्षाओं और JEE के बीच संतुलन बिठा रहे थे, उन्होंने अपने समय का कैसे सदुपयोग किया — यह उनकी कुशल योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
विशेष बात यह है कि श्रेयस की योजना में अकेले पढ़ने के साथ-साथ डाउट क्लीयरिंग सेशन्स, मॉक टेस्ट विश्लेषण और साथी छात्रों के साथ विचार-विमर्श भी शामिल थे। यह संयोजन उनके ज्ञान को स्तरित रूप से मज़बूत कर सका और कठिन प्रश्नों का सामना करने की क्षमता प्रदान कर सका।
सोशल मीडिया से दूरी: एक स्मार्ट निर्णय
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं पर बहुत अधिक है। श्रेयस ने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी, और उसके स्थान पर उन्होंने अध्ययन पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने केवल आवश्यक चीज़ों का उपयोग अपने फोन पर रखा और बाकी समय को पढ़ाई पर ही लगाया।
उनका यह निर्णय न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाया, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी शांत और केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि बेहतर फोकस और बिना विकर्षण के अध्ययन ने उन्हें कठिन विषयों जैसे गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान में और बेहतर रूप से उत्कृष्टता प्रदान की।
मानसिक संतुलन: संगीत, ब्रेक और मनोरंजन
श्रेयस ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी केवल पढ़ाई को ही एकमात्र प्राथमिकता नहीं बनाया। उन्होंने म्यूज़िक सुनना, दोस्तों के साथ समय बिताना, और छोटे ब्रेक लेना भी उस रणनीति का हिस्सा बनाया, जिससे बोझ और बर्नआउट से बचा जा सके।
यह संयम, अध्ययन और विश्राम का संतुलन ही था, जिसने उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत, ऊर्जावान और दीर्घकालिक पढ़ाई के लिए सक्षम बनाये रखा।
परिणाम: 100 परसेंटाइल और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
16 फरवरी 2026 को JEE Main 2026 Session 1 के परिणाम घोषित किए गए। जैसे ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परिणाम जारी किये, श्रेयस मिश्रा का नाम सर्वाधिक परसेंटाइल (100 NTA Score) पाने वाले छात्रों में ऊपर दिखाई दिया। ऐसा करने वाले कुल 12 छात्रों में वह दिल्ली-एनसीआर से एकमात्र छात्र थे, जिन्होंने यह उपलब्धि प्राप्त की।
इसके साथ ही, उन्होंने दिल्ली-स्टेट में टॉप कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। JEE Main में 100 परसेंटाइल प्राप्त करना न केवल कठिन विषयों में महारत की निशानी है, बल्कि यह युवा छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धी क्षमताओं को भी दर्शाता है।
विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन: एक समग्र परिदृश्य
JEE Main 2026 के परिणाम में अन्य राज्यों के छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। राजस्थान से तीन छात्रों ने 100 परसेंटाइल स्कोर प्राप्त किया, जबकि अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, गुजरात और तेलंगाना से भी टॉप पर्फ़ॉर्मर्स आये।
यह वृहद स्तर पर यह दर्शाता है कि आज भारतीय विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए तैयार होने की क्षमता, शिक्षा संस्थानों द्वारा समर्थन, और अंतर-राज्यीय संसाधनों का समन्वय किस प्रकार एक संतुलित और विविध प्रतियोगी शिक्षा कार्यक्रम का निर्माण करता है।
आगे की राह: IIT, कोर्स और करियर विकल्प
श्रेयस मिश्रा ने यह स्पष्ट किया है कि अब उनका ध्यान बोर्ड परीक्षाओं और आगे के इंजीनियरिंग लक्ष्य पर केंद्रित है। उनकी योजना इलेक्ट्रिकल या कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में आगे पढ़ाई करने की है। यह लक्ष्य पूर्ति के लिए उनके पास अब JEE Advanced जैसे अगले चरण को भी उत्तीर्ण करने का अवसर है।
JEE Main में 100 परसेंटाइल प्राप्त करना उन्हें कई IITs, NITs, IIITs, और अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए मजबूत उम्मीदवारी प्रदान करता है। इससे उनके शिक्षा और करियर के द्वार खुलेंगे और भविष्य के तकनीकी शोध, नवाचार और नेतृत्व में उनकी भूमिका और सशक्त होगी।
प्रेरणा, रणनीति और सीख
श्रेयस की सफलता कहानी केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं है; यह प्रतिबद्धता, योजना, मानसिक दृढ़ता और संतुलित जीवन शैली के सिद्धांतों का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि:
. लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए
किसी भी प्रदेश में सफलता का मार्ग उसी समय आसान हो जाता है जब लक्ष्य निर्धारित हो और उस पर निरंतर काम किया जाये।
. गुणवत्ता-पूर्ण अध्ययन मायने रखता है, मात्रा नहीं
केवल घंटों का अध्ययन नहीं, बल्कि समझदारी, फोकस और रणनीति से पढ़ाई करना अधिक महत्वपूर्ण है।
. विकर्षणों से दूरी बनाए रखना फायदेमंद है
डिजिटल विचलनों को नियंत्रित करके पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ायी जा सकती है।
. मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन महत्वपूर्ण है
ब्रेक, संगीत, दोस्त-परिवार के साथ समय, और खुद को तरोताजा रखना देना भी पढ़ाई की एक महत्वपूर्ण रणनीति है।
. परिवार का समर्थन सफलता की डोरी को मज़बूत करता है
एक सहायक, समझदार और योजनाबद्ध परिवारीक पृष्ठभूमि बच्चे को आगे बढ़ने में प्रेरित करती है।
श्रेयस मिश्रा की यह कहानी हर युवा छात्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है — यह दिखाती है कि कठिन प्रयास, धैर्य, अनुशासन और लक्ष्य-समर्पण के साथ कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। यह केवल एक परीक्षा की कहानी नहीं है, बल्कि यह युवा शक्ति के परिश्रम और उपलब्धियों की प्रतीकात्मक व्याख्या है, जो भविष्य के इंजीनियरों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करती है।






