सीबीएसई कक्षा 12 के नए नियम से बदली तस्वीर: अब एक विषय में सुधार से बच जाएगा पूरा साल
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संवाद 24 डेस्क। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने फरवरी 2026 में कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, अब कक्षा 12 के विद्यार्थी अपने मुख्य बोर्ड परीक्षा के परिणाम से संतुष्ट न होने पर उसी वर्ष आयोजित होने वाली सप्लीमेंट्री (पूरक/सुधार) परीक्षा में किसी एक विषय में बैठकर अपने अंकों को सुधार सकते हैं। यह बदलाव विशेष रूप से उन छात्रों के लिए राहत का कारण है जो अपनी पढ़ाई में मेहनत के बावजूद कुछ विषयों में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाते हैं।
पारंपरिक रूप से सुधार (इम्प्रूवमेंट) परीक्षा केवल अगले शैक्षणिक वर्ष में उपलब्ध होती थी, जिससे छात्रों को बेहतर अंक पाने के लिए एक पूरा अतिरिक्त वर्ष इंतज़ार करना पड़ता था। नए नियम के अनुसार, छात्र मुख्य परीक्षा के परिणामों के तुरंत बाद आयोजित सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठकर उसी वर्ष अपने प्रदर्शन को बेहतर बना सकते हैं। इस प्रकार छात्रों को न केवल समय की बचत होगी बल्कि उनकी उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश प्रक्रिया भी सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।
सप्लीमेंट्री परीक्षा का उद्देश्य और महत्व
सप्लीमेंट्री परीक्षा का मूल उद्देश्य छात्रों को एक और मौका देना है ताकि वे किसी विशेष विषय में सुधार कर सकें। कई बार छात्र विभिन्न कारणों से किसी एक विषय में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर पाते—जैसे स्वास्थ्य समस्या, परीक्षा-दिवस तनाव, विषय के कठिन भाग का प्रश्न या अनहोनी परिस्थितियाँ। ऐसे में यह सुधार परीक्षा उन्हें नई शुरुआत का अवसर प्रदान करती है।
CBSE ने इस कदम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बताया है, जिसका लक्ष्य शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, छात्रों-हितैषी और मानसिक दबाव कम करने वाला बनाना है। NEP का उद्देश्य शैक्षणिक प्रणाली को प्रतिस्पर्धात्मक, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाना है, ताकि विद्यार्थी सिर्फ अंक और परीक्षा के बोझ से ऊपर उठकर अपनी योग्यता बेहतर कर सकें। इस नई सुविधा से छात्रों को सही दिशा में सीखने और उच्च शिक्षा के अवसरों को प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है नया सुधार नियम?
CBSE के नए नियम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
एक विषय में सुधार की अनुमति
छात्र केवल किसी एक विषय का चयन कर सकते हैं जिसमें वे अंक सुधारना चाहते हैं। इससे छात्र को यह अवसर मिलता है कि वे अपनी कमजोर विषय पर ध्यान केंद्रित कर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।
परिणाम का चयन विकल्प
छात्र के पास यह विकल्प भी उपलब्ध होगा कि वे अपने मुख्य परीक्षा के अंक को बनाए रखना चाहते हैं या सप्लीमेंट्री परीक्षा में प्राप्त अंक को अंतिम मानना चाहते हैं। अर्थात् जहां भी बेहतर अंक मिले, वही अंक मान्य होंगे। यह नियम छात्रों को जोखिम-मुक्त तरीके से सुधार का अवसर देता है।
समय की बचत
मुख्य परीक्षा और सुधार परीक्षा के बीच समय की बचत से छात्रों को पूरे एक अतिरिक्त वर्ष का नुकसान नहीं उठाना पड़ता। इससे उनकी उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया में देरी नहीं होती और छात्र अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं।
सुधार परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया
CBSE सुधार परीक्षा के लिए आवेदन मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर शुरू होगा। इसके अंतर्गत:
छात्रों को अपने स्कूल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
निर्धारित शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य है।
बोर्ड द्वारा जारी फॉर्म भरने की अंतिम तिथि और शुल्क की जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
यह प्रक्रिया पारदर्शी और सरल रखी गई है ताकि छात्र बिना किसी कठिनाई के आवेदन कर सकें और अपना सुधार प्रयास कर सकें। साइट पर उपलब्ध विस्तृत दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक कदम आसान तरीके से समझाया गया है ताकि कोई भ्रम न रहे।
छात्रों और अभिभावकों के लिए संभावित लाभ
मानसिक दबाव में कमी
कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा को भारतीय शिक्षा प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विद्यार्थी और अभिभावक दोनों ही अक्सर इस परीक्षा के लिए तनाव का सामना करते हैं। इसी तनाव को कम करने के उद्देश्य से CBSE द्वारा सुधार विकल्प प्रदान किया गया है, जिससे छात्र को “फिर से पूरी बोर्ड परीक्षा देने” का भारी बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
उच्च शिक्षा की प्रवेश प्रक्रिया
उच्च शिक्षा जैसे इंजीनियरिंग, चिकित्सा, विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते समय प्रतिशत अंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि छात्र को पहले प्रयास में अपेक्षित अंक न मिले हों, तो सुधार परीक्षा के विकल्प से वह आगे की पढ़ाई के लिए आवश्यक कट-ऑफ पूरा कर सकता है। इस पहल से छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं में भागीदारी और कॉलेज प्रवेश की संभावनाएँ बढ़ जाएँगी।
कैरियर की संभावनाओं पर प्रभाव
वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में उच्च अंक अक्सर छात्र को श्रेष्ठ संस्थानों में प्रवेश दिलाने में मद्द करते हैं। सुधार परीक्षा द्वारा अंक बढ़ाने की इस सुविधा से कंपनियों द्वारा नौकरी चयन और विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया में भी बेहतर अंक लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। इससे छात्रों की कैरियर संभावनाएँ भी मजबूत होंगी।
सुधार परीक्षा बनाम मुख्य परीक्षा: क्या फर्क है?
पहले, यदि छात्र किसी विषय में कम अंक पाता था या अपनी संख्या (aggregate) को सुधारना चाहता था तो उसे अगले वर्ष बोर्ड परीक्षा दोबारा देनी पड़ती थी। इससे पूरा एक साल छात्रों के लिए व्यर्थ जाता और वे आगे के शैक्षणिक व प्रतियोगी कार्यक्रमों के लिए तैयार नहीं हो पाते थे। नव घोषित सुधार नियम के तहत अब मुख्य परीक्षा के बाद आयोजित सप्लीमेंट्री परीक्षा ही सुधार परीक्षा का विकल्प बन गया है।
इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्र केवल उस विषय में बैठ सकते हैं जिसमें वे बेहतर अंक प्राप्त करना चाहते हैं। यह सुधार मुख्य परीक्षा के लिए बोझिल पुनः समर्पण नहीं है बल्कि एक अधिक लचीला विकल्प है जिसमें समय की बचत और बेहतर परिणाम दोनों की सम्भावना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का प्रभाव
CBSE ने यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बताया है। NEP का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाना है। नई नीति शिक्षा के मूल्य को बढ़ाने, छात्रों पर तनाव को कम करने और परिणाम-केंद्रित शिक्षण से सीखने-केंद्रित शिक्षण की ओर संक्रमण को बढ़ावा देती है।
NEP के अनुसार पुनः परीक्षा देना एक अतिरिक्त बोझ है, जबकि सुधार परीक्षा छात्रों को तुरंत उपलब्ध विकल्प प्रदान करती है। यह नीति छात्रों को उनके लक्ष्य प्राप्ति में समय-बद्ध तरीके से सहायता करती है और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देती है।
नई नीति का समग्र प्रभाव और चुनौतियाँ
हालाँकि यह सुधार विकल्प छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकता है, कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है:
वित्तीय बोझ: कई छात्रों के लिए अतिरिक्त परीक्षा शुल्क एक चुनौती हो सकती है। बोर्ड को इस पहल को अधिक किफायती बनाना चाहिए ताकि कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी भी इसका लाभ उठाएँ।
सूचना का प्रचार: यह जरूरी है कि सभी छात्र और अभिभावक बोर्ड की वेबसाइट, स्कूल सूचना प्रणाली तथा स्थानीय समाचारों से समय-समय पर अपडेट रखें ताकि कोई भी मौका चूक न जाए।
कोचिंग और उचित मार्गदर्शन: सुधार परीक्षा के लिए छात्रों को पर्याप्त मार्गदर्शन और कोचिंग उपलब्ध होना चाहिए, ताकि वे बेहतर तैयारी कर सकें और उच्च अंक हासिल कर सकें।
इन चुनौतियों के बावजूद सुधार परीक्षा का यह विकल्प छात्रों के लिए एक सकारात्मक और प्रगतिशील कदम है।
CBSE द्वारा कक्षा 12वीं के छात्रों को एक विषय में सुधार के लिए उसी वर्ष सप्लीमेंट्री परीक्षा के माध्यम से अवसर प्रदान करना शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह कदम छात्रों को समय की बचत, मानसिक संतुलन, शैक्षणिक सुधार और अधिक अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप यह निर्णय छात्रों को शिक्षा-उन्मुख दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करता है जहां अंक प्रणाली का बोझ कम होता है और वास्तविक सीखने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है। यदि यह पहल सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक आदर्श मिसाल भी बन सकती है।
आगे, यह बदलाव छात्रों के कैरियर, प्रतियोगी परिदृश्य और उच्च शिक्षा प्रवेश में सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता रखता है बशर्ते इसे सही तरीके से लागू और प्रचारित किया जाए।






