आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में बड़ा शैक्षणिक विस्तार: 2026-27 से शुरू होंगे तीन नए एमटेक कोर्स
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संवाद 24 डेस्क। भारतीय शिक्षा जगत में अनुसंधान-आधारित एवं उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत Indian Institute of Technology (Indian School of Mines), Dhanbad (संक्षेप में IIT ISM धनबाद) जल्द ही अपने सन्दर्भ में उल्लेखनीय विस्तार कर रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संस्थान में तीन नए Master of Technology (MTech) कोर्स शुरू किए जाने की योजना अंतिम चरण में है। यह निर्णय तकनीकी शिक्षा के विस्तार, अनुसंधान-गत प्रगति और भविष्य तैयार कार्यबल की क्षमता को बढ़ाने की दृष्टि से किया गया है।
इन कोर्सेज की घोषणा से तकनीकी शिक्षा के परिदृश्य में एक नई ऊँचाई हासिल होने की उम्मीद है। यह पहल उच्च तकनीकी क्षमता, नवाचार और देश की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
नई एमटेक प्रविष्टियाँ — विषय, उद्धेश्य और महत्व
आईआईटी आईएसएम धनबाद ने 2026-27 सत्र से तीन नए एमटेक पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव किया है। इन कोर्सों से सम्बंधित मूल बातें निम्नलिखित हैं:
. एमटेक – क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals)
यह कोर्स उन खनिजों और सामग्रियों के अध्ययन पर केंद्रित होगा, जिनका उपयोग उन्नत प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा रक्षा क्षेत्रों में हो रहा है। ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ ऐसे खनिज हैं जिनकी वैश्विक मांग तेज़ी से बढ़ रही है और जिनकी प्राप्ति तथा संसाधन क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अहम है।
इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य होगा:
खनिजों का वैज्ञानिक विश्लेषण और मूल्यांकन
निष्कर्षण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और उपयुक्त उपयोग
वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों पर रणनीतिक दृष्टिकोण प्रदान करना
कुल संस्थागत क्षमता के रूप में इस कोर्स में 20 सीटें आरक्षित की जाएँगी।
. एमटेक – मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग (Material Science and Engineering)
यह पाठ्यक्रम सामग्री विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के उन्नत सिद्धान्तों को केंद्र में रखेगा। आधुनिक युग में नई सामग्रियों का विकास तकनीकी उन्नति, ऊर्जा समाधान और औद्योगिक नवाचार के लिए आवश्यक है। नए उभरते क्षेत्रों जैसे:
नैनोटेक्नोलॉजी
स्मार्ट सामग्री
बायो-सेंसर्स
ऊर्जा भंडारण समाधान आदि
में शोध और व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए यह कोर्स अत्यंत सामयिक है।
. एमटेक – इंटेलिजेंस कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटल इंजीनियरिंग (Intelligence Control and Instrumental Engineering)
यह कोर्स नियंत्रण प्रणालियों, बुद्धिमान यंत्रों और संवेदन (sensing) उपकरणों के उन्नत अनुप्रयोगों पर केंद्रित है। ऑटोमेशन और बुद्धिमान मशीनिंग की दुनिया में यह विषय तेजी से प्रासंगिक बन रहा है। इसका लक्ष्य होगा:
सर्वोत्तम नियंत्रण तकनीकों का उपयोग
उन्नत सेंसर और मापन तकनीकों का विकास
वास्तविक-समय डेटा पर आधारित बुद्धिमान निर्णय प्रक्रिया को स्थापित करना
इन तकनीकों की मांग उद्योग, रेल, रक्षा और सामाजिक संरचनाओं सहित भविष्य के हर तकनीकी क्षेत्र में बढ़ रही है।
सीटों की संख्या, परिचालन और प्रशासनिक तैयारी
प्रस्तावित तीनों कोर्स में शुरुआत में प्रत्येक में 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रबंधन ने कहा है कि कोर्स शुरू करने से पहले अधिसूचना जारी की जाएगी और प्रवेश प्रक्रिया सुस्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएगी।
ये कोर्स उन क्षेत्रों की पहचान कर रहे हैं जिनमें आने वाले वर्षों में स्नातक तकनीकी विशेषज्ञों की भारी मांग रहेगी। खासकर क्रिटिकल मिनरल्स तथा बुद्धिमान नियंत्रण प्रणालियों जैसे विषयों में वैश्विक स्तर पर भी अनुसंधान तथा योग्य मानव संसाधन की कमी ने इनके महत्व को और बढ़ा दिया है।
एमटेक प्रवेश प्रक्रिया तथा आगामी समयरेखा
आईआईटी आईएसएम धनबाद ने संकेत दिया है कि एमटेक नामांकन प्रक्रिया मार्च 2026 में शुरू होने की संभावना है और सभी प्रक्रियाओं को पूरी कर कक्षाएँ जुलाई से प्रारंभ कर दी जाएँगी।
वर्ष 2025-26 में एमटेक में 798 सीटों का ऐलान किया गया था। इस बार सीटों में कुछ बदलाव भी किये जा सकते हैं जिनमें कम चयनित कोर्सों की सीटें कम करने का प्रस्ताव प्रबंधन विचार कर रहा है।
आईआईटी आईएसएम धनबाद का तकनीकी और शोध-आधारित योगदान
आईआईटी आईएसएम धनबाद तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान तथा उद्योग-संस्थान सहयोग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित रहा है। यह संस्थान पारंपरिक रूप से माइनिंग इंजीनियरिंग, भू-वैज्ञानिक अध्ययन, ऊर्जा प्रणालियों व संसाधन प्रबंधन में उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।
संगठन ने पिछले समय में:
क्रिटिकल मिनरल्स पर राष्ट्रीय सम्मेलन और शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये हैं।
NITI Aayog की बैठक का आयोजन किया है ताकि भारत की खनिज सुरक्षा पर रणनीति विकसित की जा सके।
नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित किया है।
ये पहल यह दर्शाती हैं कि संस्थान परंपरागत इंजीनियरिंग शिक्षण से आगे बढ़कर राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले अनुसंधान और समाधान-उन्मुख प्रशिक्षण की ओर अग्रसर है।
शैक्षणिक और उद्योग-संस्थान सहयोग
संस्थान के कार्यक्रम न केवल शिक्षकों और छात्रों तक सीमित हैं, बल्कि वे उद्योग, सरकारी एजेंसियों और अंतर्राष्ट्रीय शोध समुदाय से भी जुड़े हुए हैं। जैसे:
Triple-I Conclave जैसे कार्यक्रमों का आयोजन हुआ जिसमें स्मार्ट माइनिंग और ऊर्जा विषयों पर विशेषज्ञ विचार कर रहे हैं।
Geological Survey of India तथा BCCL जैसे संस्थानों के साथ भागीदारी हुई।
इस प्रकार, नए कोर्स केवल अकादमिक विस्तार नहीं बल्कि व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपयुक्तता की मांग भी प्रतीत करते हैं।
कोर्स का दीर्घकालिक प्रभाव और संभावनाएँ
क्रिटिकल मिनरल्स, मटेरियल साइंस और बुद्धिमान नियंत्रण प्रणालियों जैसे क्षेत्रों का अध्ययन गैर-परंपरागत तकनीकी सीमाओं को चुनौती देता है। यह छात्रों को:
तकनीकी विशेषज्ञता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा
वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता विकसित करने में सहायता करेगा
राष्ट्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में यह पहल अत्यंत समयानुकूल है।
आईआईटी आईएसएम धनबाद का यह कदम भारत में तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने की क्षमता रखता है। नए एमटेक कोर्स: ✔ शिक्षा-अनुसंधान के संलयन को प्रोत्साहित करेंगे ✔ उद्योग-अनुरूप कौशल को बढ़ावा देंगे ✔ राष्ट्रीय और वैश्विक तकनीकी चुनौतियों का समाधान तैयार करेंगे
इन सभी कारणों से यह पहल सिर्फ एक शैक्षणिक विस्तार नहीं, बल्कि भविष्य-दृष्टि, आर्थिक प्रगति, और तकनीक-चालित भारत निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






