यूपी बोर्ड 2026: अटेंडेंस नहीं बनी रुकावट, छात्रों को मिला पूरा मौका

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संवाद 24 डेस्क। यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) द्वारा संचालित हाईस्कूल (कक्षा 10) और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) बोर्ड परीक्षा 2026 का शेड्यूल भारतीय शिक्षा जगत में हमेशा की तरह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन है। इस बार परीक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर है — उपस्थिति (attendance) नियम में ढील दी गई, जिससे कुल 53,37,778 विद्यार्थियों में से एक भी छात्र-छात्रा को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका गया। यह निर्णय शिक्षा जगत, अभिभावकों तथा छात्रों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

उपस्थिति नियम और उसकी पृष्ठभूमि
भारतीय शिक्षा प्रणालियों में बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए छात्रों को एक निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति रखना अनिवार्य होता है। अधिकांश बोर्ड परीक्षा नियामक, जैसे कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एवं राज्य बोर्ड, 75 % उपस्थिति को अनिवार्यता के रूप में लागू करते हैं। यह नियम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि छात्र पूरा शैक्षणिक सत्र सक्रिय रूप से भाग लेकर सीखने की प्रक्रिया में सम्मिलित रहें, न कि केवल पर्चा देने के लिए नामांकन कर लें।
यूपी बोर्ड नियमावली के तहत भी कक्षा 10 तथा कक्षा 12 के छात्रों के लिए पूरे अकादमिक सत्र में कम से कम 75 % उपस्थिति अनिवार्य है, ताकि वे बोर्ड परीक्षा में बैठ सकें। परंपरागत तौर पर यदि कोई छात्र यह अनुपस्थित उपस्थिति पूरा नहीं कर पाता, तो उसे परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलती।

2026 में नियम में छूट: क्या हुआ अलग?
हाल ही में लाइव हिन्दुस्तान के रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने 2026 बोर्ड परीक्षाओं के लिए उपस्थिति नियम में छूट प्रदान की, जिससे एक भी छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका गया। सूत्रों के मुताबिक, हाई स्कूल (कक्षा 10) के 27,61,696 और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) के 25,76,082 कुल 53,37,778 छात्रों की जांच के बावजूद किसी को भी उपस्थिति की कमी के कारण रोकने का निर्णय नहीं लिया गया।
इसके पीछे बोर्ड की मंशा छात्रों को परीक्षा से वंचित होने से बचाना बताया जा रहा है, खासकर उस पृष्ठभूमि को देखते हुए जहां कई छात्रों ने तकनीकी और संसाधन-सम्बंधी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम लागू नहीं कर पाए। लाइव हिन्दुस्तान के अनुसार, बकायदा लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल 1 जुलाई 2025 से लागू होना था, लेकिन कई स्कूलों में संसाधनों की कमी तथा दूसरी बाधाओं के कारण इसे लागू करने में अड़चनें आईं। इसके चलते बोर्ड ने अपने कदम पीछे खींच दिए।

ऑनलाइन उपस्थिति की चुनौती
UP Board ने पिछले साल शिक्षकों और छात्रों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति (digital attendance) व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया था। इसका मकसद था कि वास्तविक समय पर छात्र-शिक्षक उपस्थिति दर्ज हो तथा किसी भी तरह का डेटा-मैनिपुलेशन रोका जा सके। इसके लिए बड़े पैमाने पर पोर्टल और तकनीकी ढांचा तैयार किया गया।
लेकिन वास्तविकता यह रही कि आधे से अधिक स्कूलों ने इस हाई-टेक उपस्थिति प्रणाली को लागू नहीं किया। कारण मुख्यतः संसाधन-सम्बंधी कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव और तकनीकी अड़चनें थीं। शिक्षक संघों ने भी इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया, जिससे बोर्ड को अंततः अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा।

बोर्ड का दृष्टिकोण: छात्रों के हित में कदम
यूपी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि उपस्थिति नियम का उद्देश्य छात्रों के सीखने और कक्षा में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है, न कि उन्हें कठिनाइयों के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित करना। अतः इस बार नियम की कठोरता को फिलहाल लागू नहीं किया गया, ताकि कोई भी छात्र आकस्मिक परिस्थितियों से परीक्षा से बाहर न हो जाए।
बोर्ड यह भी मानता है कि अनेक स्कूलों में तकनीकी बाधाओं की वजह से ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को पूरी तरह से लागू करना संभव नहीं हो पाया, इसलिए इस विशेष वर्ष में नियम को लचीला बनाया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि आगामी सत्रों में बोर्ड इस नीति को वापस लागू करेगा या किसी अन्य समायोजन के साथ विकसित रूप देगा।

उपस्थिति से जुड़ी शिक्षा अर्थव्यवस्था और छात्रों पर प्रभाव
उपस्थिति नियम में छूट का सीधा प्रभाव छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों पर पड़ता है। 75 % उपस्थिति न होने पर छात्र को परीक्षा से रोका जाना उसके शैक्षणिक करियर में अनिश्चितता ला सकता है। इसके कारण कई छात्र शिक्षा से तनावग्रस्त हो सकते हैं या परीक्षा-प्रक्रिया का सामना करने के लिए मानसिक दबाव में आ सकते हैं।
वहीं, नियम में यह छूट छात्रों के लिए एक राहत भरा कदम मानी जा सकती है, क्योंकि इससे वे परीक्षा की तैयारी पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं बिना किसी प्रकार की उपस्थिति-संबंधी चिंता के।
दूसरी ओर, इसका नकारात्मक प्रभाव यह भी हो सकता है कि कुछ छात्र नियमित कक्षा-निष्पादन में लापरवाही बरत सकते हैं, जिस कारण उनके सीखने की गुणवत्ता में गिरावट भी संभव है। इसलिए यह जरूरी है कि परीक्षा-उपस्थिति नियम केवल एक तकनीकी आवश्यकता न बन जाए, बल्कि छात्रों की मूल शैक्षणिक भागीदारी को बढ़ावा दे।

देश के अन्य बोर्डों के अनुभव से तुलना
देशभर में बोर्ड परीक्षाओं में उपस्थिति नियम का पालन आम तौर पर कड़ा होता है। उदाहरण के लिए, केंद्रीय बोर्ड के नियम के अनुसार कक्षा 10 तथा कक्षा 12 के छात्रों को न्यूनतम 75 % उपस्थिति चाहिए होती है। यदि कोई छात्र यह सीमा नहीं पूरा करता है, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलती।
समान नियम बिहार बोर्ड में भी लागू होता है जहाँ 75 % उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है और कुछ मामलों में मामूली छूट के नियम बने हैं, लेकिन बिना पर्याप्त उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में पहुंचने की अनुमति नहीं मिलेगी।
इस तुलना से स्पष्ट है कि यूपी बोर्ड ने जो कदम उठाया है, वह अन्य बोर्डों के नियमों से भिन्न है, और यह छात्रों को एक मौक़ा देने की दिशा में एक असामान्य लेकिन आवश्यक लचीलेपन का उदाहरण माना जा सकता है।

परीक्षा-व्यवस्था और सुरक्षा उपाय
उपस्थिति नियम पर छूट के अलावा, यूपी बोर्ड 2026 परीक्षा केंद्रों पर अन्य महत्वपूर्ण तैयारी भी कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर पुस्तिकाएं समय पर सभी केंद्रों पर पहुंचा दी गई हैं, सीसीटीवी निगरानी उपाय सक्रिय हैं, और कंट्रोल रूम के माध्यम से परीक्षा-काल में निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा पुलिस और सुरक्षा अधिकारी भी तैनात किए गए हैं ताकि परीक्षा निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में हो सके।

यूपी बोर्ड 2026 परीक्षा में उपस्थिति नियम में इस प्रकार की छूट एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक नीति निर्णय है। यह छात्रों को बोर्ड परीक्षा में शामिल होने का अवसर देता है और तकनीकी बाधाओं तथा संसाधन-सम्भावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लचीला दृष्टिकोण अपनाता है।
हालांकि यह स्पष्ट रूप से जरूरी है कि बोर्ड प्रशासन छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक भागीदारी और सीखने के अनुभव को सुनिश्चित करें — न कि केवल नियम-रूप में भागीदारी को पूरा करने पर जोर दें। भविष्य में यदि व्यवस्था में सुधार होता है और सभी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति तथा वास्तविक शिक्षण-प्रक्रिया लागू होती है, तो उपस्थिति नियम का पालन फिर से प्रभावी ढंग से लागू करना संभव हो सकेगा।

Geeta Singh
Geeta Singh

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