काशी की शक्ति परंपरा का दिव्य प्रतीक — विशालाक्षी मंदिर

संवाद 24 डेस्क। भारत की आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी केवल गंगा, घाटों और काशी विश्वनाथ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर शक्ति-उपासना की भी एक अत्यंत प्राचीन और सशक्त भूमि है। इसी पावन नगर में स्थित है विशालाक्षी मंदिर, जो देवी शक्ति के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि शाक्त, तांत्रिक और वैदिक परंपराओं का एक जीवंत संगम भी प्रस्तुत करता है।

विशालाक्षी मंदिर को माता सती के शक्तिपीठों से जोड़ा जाता है और इसे काशी की रक्षक देवी का स्थान प्राप्त है। यह मंदिर भले ही स्थापत्य की दृष्टि से अत्यंत विशाल न हो, पर इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा, तांत्रिक महत्व और पौराणिक गहराई इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती है।

विशालाक्षी शब्द का अर्थ और देवी का स्वरूप
‘विशालाक्षी’ संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है –
“विशाल नेत्रों वाली देवी”

यह नाम देवी की सर्वदर्शी, करुणामयी और सर्वज्ञ दृष्टि का प्रतीक है। विशाल नेत्र यह संकेत देते हैं कि देवी अपने भक्तों के प्रत्येक कष्ट, कर्म और भावना को देखती हैं और समय आने पर उचित फल प्रदान करती हैं।

देवी विशालाक्षी को:
• माँ पार्वती
• माँ सती
• शक्ति स्वरूप
• काशी की अधिष्ठात्री देवी
के रूप में पूजा जाता है।

पौराणिक एवं धार्मिक मान्यता

शक्तिपीठ से संबंध
हिंदू पुराणों के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा हेतु सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग विभक्त किए। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

मान्यता है कि:
काशी में देवी सती के नेत्र (आंखें) गिरी थीं,
इसी कारण देवी को विशालाक्षी कहा गया।
हालाँकि कुछ ग्रंथों में इस विषय पर मतभेद हैं, फिर भी काशी परंपरा में विशालाक्षी को शक्तिपीठ स्वरूप में विशेष मान्यता प्राप्त है।

तांत्रिक परंपरा में विशालाक्षी का स्थान
विशालाक्षी मंदिर तांत्रिक साधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। काशी स्वयं एक तांत्रिक क्षेत्र (तंत्र क्षेत्र) है, और यहाँ देवी की उपासना केवल भक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि गूढ़ साधनाओं से भी जुड़ी हुई है।

तांत्रिक महत्व:
• नवरात्रि में विशेष तांत्रिक अनुष्ठान
• गुप्त साधनाओं का केंद्र
• श्रीविद्या परंपरा से संबंध
• काम, क्रोध, मोह आदि पर विजय की साधना

ऐसा माना जाता है कि देवी विशालाक्षी की साधना से:
• मानसिक शक्ति बढ़ती है
• दृष्टि दोष दूर होता है
• आत्मिक जागरण होता है

मंदिर का इतिहास
विशालाक्षी मंदिर का सटीक निर्माण काल स्पष्ट नहीं है, किंतु विद्वानों के अनुसार:
• यह मंदिर प्राचीन काशी के शक्ति उपासना केंद्रों में से एक है
• वर्तमान संरचना मध्यकालीन काल की मानी जाती है
• मुग़ल काल में मंदिर को क्षति पहुँची, पर पूजा परंपरा कभी बंद नहीं हुई

काशी की विशेषता यह है कि यहाँ मंदिर टूटे, बदले, पुनर्निर्मित हुए, पर आस्था की धारा निरंतर बहती रही — विशालाक्षी मंदिर इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

स्थापत्य एवं मंदिर संरचना
स्थापत्य की दृष्टि से विशालाक्षी मंदिर:
• सरल
• पारंपरिक
• अलंकृत नहीं, बल्कि भावप्रधान

प्रमुख विशेषताएँ:
• गर्भगृह में देवी विशालाक्षी की प्रतिमा
• प्रतिमा में विशाल नेत्रों पर विशेष बल
• लाल वस्त्र, सिंदूर और पुष्प अर्पण की परंपरा
• मंदिर परिसर अपेक्षाकृत छोटा, पर अत्यंत पवित्र

यह मंदिर भव्यता से अधिक ऊर्जा और अनुभूति पर केंद्रित है।

धार्मिक अनुष्ठान और पर्व
नवरात्रि

नवरात्रि के दौरान मंदिर में:
• विशेष श्रृंगार
• हवन
• रात्रिकालीन पूजा
• भारी संख्या में भक्तों की उपस्थिति

दीपावली
काशी की दीपावली शक्ति और शिव के संतुलन का प्रतीक है। इस दिन विशालाक्षी मंदिर में विशेष पूजा होती है।

सावन
सावन में शिव-शक्ति उपासना के कारण मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है।

काशी में विशालाक्षी और काशी विश्वनाथ का संबंध

काशी में मान्यता है कि:
काशी विश्वनाथ बिना विशालाक्षी अधूरे हैं
यह शिव-शक्ति के अद्वैत सिद्धांत को दर्शाता है।
यहाँ कहा जाता है:
• शिव ज्ञान हैं
• शक्ति चेतना है
दोनों का संतुलन ही मोक्ष का मार्ग है।

आध्यात्मिक अनुभव और भक्तों की आस्था
भक्तों का मानना है कि:
• देवी से आँखों से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है
• निर्णय शक्ति बढ़ती है
• भय और मानसिक भ्रम दूर होते हैं

कई साधक बताते हैं कि:
“यह मंदिर देखने से अधिक अनुभव करने का स्थान है।”

✈️ टूरिज़्म गाइड – विशालाक्षी मंदिर, वाराणसी

📍 स्थान
• वाराणसी, उत्तर प्रदेश
• काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप
• ललिता घाट के पास

🚉 कैसे पहुँचे

✈️ हवाई मार्ग
• निकटतम एयरपोर्ट: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
• दूरी: लगभग 25 किमी
🚆 रेल मार्ग
• वाराणसी जंक्शन
• काशी रेलवे स्टेशन
🚕 सड़क मार्ग
• ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी आसानी से उपलब्ध

🕰️ दर्शन का समय
• सुबह: 5:00 AM – 12:00 PM
• शाम: 4:00 PM – 9:00 PM

👗 ड्रेस कोड
• सादे और शालीन वस्त्र
• महिलाओं के लिए पारंपरिक परिधान उपयुक्त
• मंदिर में मर्यादा बनाए रखें

📸 फोटोग्राफी
• गर्भगृह में फोटोग्राफी वर्जित
• बाहर सीमित अनुमति

🏨 ठहरने की सुविधा
• गेस्ट हाउस (ललिता घाट, दशाश्वमेध)
• बजट से लेकर प्रीमियम होटल उपलब्ध

🍛 आसपास का भोजन
• कचौड़ी-सब्ज़ी
• बनारसी चाट
• मालइयो (सर्दियों में)

⚠️ महत्वपूर्ण सुझाव
• पंडों से विनम्रता रखें
• अनावश्यक दान दबाव से बचें
• सुबह के समय दर्शन अधिक शांतिपूर्ण

विशालाक्षी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, चेतना और करुणा का प्रतीक है। यह मंदिर बताता है कि काशी केवल मोक्ष की नगरी नहीं, बल्कि शक्ति की भूमि भी है।

जो यात्री वाराणसी को केवल देखने नहीं, बल्कि महसूस करने आते हैं — उनके लिए विशालाक्षी मंदिर एक अनिवार्य अनुभव है।

Radha Singh
Radha Singh

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