दक्षिण का कैलास मल्लिकार्जुन–श्रीशैलम: नल्लमाला की गोद में बसा शिव-शक्ति का चिरस्थायी धाम
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संवाद 24 डेस्क।भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, जो आंध्र प्रदेश के नल्लमाला पर्वत श्रृंखला में स्थित श्रीशैलम में प्रतिष्ठित है। यह स्थल भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की संयुक्त आराधना का अद्वितीय केंद्र है, जहाँ शिव ‘मल्लिकार्जुन’ और पार्वती ‘भ्रामराम्बा’ के रूप में पूजित हैं।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को शैव परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है। शिवपुराण, स्कंदपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक मल्लिकार्जुन के दर्शन करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह ज्योतिर्लिंग दक्षिण भारत का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ शिव-शक्ति का संयुक्त स्वरूप एक ही परिसर में विद्यमान है।
‘मल्लिकार्जुन’ नाम की उत्पत्ति
‘मल्लिकार्जुन’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है—‘मल्लिका’ और ‘अर्जुन’। ‘मल्लिका’ का अर्थ है चमेली का फूल, जबकि ‘अर्जुन’ शिव का एक नाम है। लोककथाओं के अनुसार, पार्वती देवी ने यहाँ चमेली के पुष्पों से शिव की आराधना की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव मल्लिकार्जुन के रूप में प्रकट हुए। इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग को मल्लिकार्जुन कहा गया।
पौराणिक कथा: शिव-पार्वती का निवास
एक प्रमुख कथा के अनुसार, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के बीच विवाह को लेकर प्रतियोगिता हुई थी। गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर विजय पाई, जबकि कार्तिकेय क्रोधित होकर दक्षिण की ओर चले गए और क्रौंच पर्वत पर तप करने लगे। पुत्र के वियोग से व्यथित शिव-पार्वती उन्हें मनाने श्रीशैलम पहुँचे और वहीं स्थायी रूप से निवास करने लगे। तभी से यह स्थान मल्लिकार्जुन-भ्रामराम्बा का पवित्र धाम माना जाता है।
श्रीशैलम: भौगोलिक और प्राकृतिक स्वरूप
श्रीशैलम नल्लमाला पर्वतमाला के घने जंगलों के बीच स्थित है और कृष्णा नदी के किनारे बसा हुआ है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है—ऊँचे पर्वत, गहरी घाटियाँ, हरियाली और पवित्र नदियाँ इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाती हैं। यही कारण है कि श्रीशैलम को केवल तीर्थ नहीं, बल्कि एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाता है।
मल्लिकार्जुन मंदिर की स्थापत्य कला
मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर द्रविड़ स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर परिसर विशाल है और इसमें गोपुरम, मंडप, प्राचीन स्तंभ और सुंदर नक्काशीदार दीवारें दर्शनीय हैं। मंदिर का गर्भगृह अपेक्षाकृत छोटा है, किंतु उसमें स्थित ज्योतिर्लिंग अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य अनुभूति प्रदान करता है। सदियों पुराने शिलालेख मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं।
भ्रामराम्बा देवी: शक्ति पीठ का स्वरूप
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के साथ स्थित भ्रामराम्बा देवी मंदिर को 18 महाशक्ति पीठों में गिना जाता है। देवी को दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है। मान्यता है कि देवी ने यहाँ भ्रामरासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए उनका नाम भ्रामराम्बा पड़ा। शिव और शक्ति की संयुक्त उपासना के कारण श्रीशैलम का महत्व और भी बढ़ जाता है।
धार्मिक अनुष्ठान और पूजा पद्धति
मल्लिकार्जुन मंदिर में प्रतिदिन अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जिनमें अभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और आरती प्रमुख हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। श्रावण मास और कार्तिक मास में दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन
महाशिवरात्रि के दौरान श्रीशैलम में भक्ति और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ता है। पूरी रात जागरण, भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजाएँ होती हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएँ की जाती हैं। यह पर्व धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और राजवंशों का योगदान
इतिहासकारों के अनुसार, सातवाहन, चालुक्य, काकतीय और विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने मल्लिकार्जुन मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विजयनगर के राजाओं द्वारा निर्मित कई मंडप और शिलालेख आज भी मंदिर परिसर में देखे जा सकते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि यह स्थल न केवल धार्मिक, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है।
आध्यात्मिक अनुभूति और ध्यान केंद्र
श्रीशैलम केवल पूजा-पाठ का स्थान नहीं, बल्कि ध्यान और साधना का भी प्रमुख केंद्र है। शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य साधकों को आत्मिक शांति प्रदान करता है। कई संतों और योगियों ने यहाँ साधना कर आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त की है।
श्रीशैलम कहाँ स्थित है
श्रीशैलम आंध्र प्रदेश के नल्लमाला पर्वत श्रृंखला में, कृष्णा नदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यह स्थान कुर्नूल ज़िले के अंतर्गत आता है और घने जंगलों, पहाड़ियों तथा प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है।
कैसे पहुँचे (How to Reach)
✈️ हवाई मार्ग
• निकटतम हवाई अड्डा: राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद (लगभग 215 किमी)
• हवाई अड्डे से टैक्सी या बस द्वारा श्रीशैलम पहुँचा जा सकता है।
???? रेल मार्ग
• निकटतम रेलवे स्टेशन:
• मार्कापुर रोड (लगभग 85 किमी)
• कुर्नूल सिटी (लगभग 180 किमी)
• स्टेशन से आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन (APSRTC) की बसें और निजी टैक्सी उपलब्ध हैं।
????️ सड़क मार्ग
• श्रीशैलम सड़क मार्ग से हैदराबाद, विजयवाड़ा, कुरनूल और अनंतपुर से अच्छी तरह जुड़ा है।
• पहाड़ी रास्ते रोमांचक हैं, लेकिन बरसात में सावधानी आवश्यक है।
ठहरने की व्यवस्था (Accommodation)
???? होटल और लॉज
• बजट से लेकर मध्यम श्रेणी तक के होटल उपलब्ध
• निजी लॉज और गेस्ट हाउस भी मौजूद
????️ मंदिर ट्रस्ट आवास
• श्रीशैलम देवस्थानम द्वारा संचालित धर्मशालाएँ
• स्वच्छ, सुरक्षित और किफ़ायती
• ऑनलाइन व ऑफ़लाइन बुकिंग की सुविधा
सलाह: महाशिवरात्रि और श्रावण मास में अग्रिम बुकिंग अनिवार्य करें।
दर्शन और पूजा व्यवस्था
⛩️ मंदिर दर्शन समय
• प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक (परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन संभव)
????️ प्रमुख पूजाएँ
• अभिषेक
• रुद्राभिषेक
• महामृत्युंजय जाप
• विशेष दर्शन (शीघ्र दर्शन टिकट उपलब्ध)
???? ऑनलाइन सुविधाएँ
• दर्शन टिकट
• पूजा बुकिंग
• आवास बुकिंग
(आधिकारिक मंदिर पोर्टल के माध्यम से)
प्रमुख दर्शनीय स्थल
???? मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर
शिव और शक्ति का संयुक्त धाम, मुख्य आकर्षण
???? भ्रामराम्बा देवी मंदिर
18 महाशक्ति पीठों में से एक
???? पाताल गंगा
कृष्णा नदी का पवित्र घाट, रोपवे और सीढ़ियों द्वारा पहुँच
????️ श्रीशैलम डैम
भारत की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में से एक
????️ अक्कमहादेवी गुफाएँ
प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व की गुफाएँ
???? शिकरेश्वरम
श्रीशैलम का सबसे ऊँचा स्थान, जहाँ से पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है
वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन
???? श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व
• बाघ, तेंदुआ, हिरण और दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ
• प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफ़रों के लिए आदर्श स्थल
• जंगल सफ़ारी सीमित अनुमति पर
घूमने का सर्वोत्तम समय
• अक्टूबर से मार्च: मौसम सुहावना, पर्यटन के लिए सर्वोत्तम
• श्रावण मास (जुलाई–अगस्त): धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र
• महाशिवरात्रि: भव्य आयोजन, लेकिन अत्यधिक भीड़
स्थानीय भोजन और सुविधाएँ
????️ भोजन
• दक्षिण भारतीय शाकाहारी भोजन प्रमुख
• मंदिर अन्नदानम में निःशुल्क प्रसाद भोजन
????️ खरीदारी
• रुद्राक्ष
• पूजा सामग्री
• स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुएँ
यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियाँ
• पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण रात में अनावश्यक यात्रा से बचें
• मानसून में फिसलन से सावधान रहें
• मंदिर परिसर में ड्रेस कोड का पालन करें
• प्लास्टिक उपयोग से बचें, क्षेत्र को स्वच्छ रखें।
मल्लिकार्जुन–श्रीशैलम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का संपूर्ण केंद्र है। सुव्यवस्थित पर्यटन सुविधाओं, दिव्य वातावरण और ऐतिहासिक विरासत के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक आदर्श गंतव्य बन चुका है।






