जमात से गठबंधन पर NCP में बगावत, छात्र नेताओं के इस्तीफे तेज, चुनाव से पहले पार्टी संकट में
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संवाद 24 डेस्क। बांग्लादेश में 12 फरवरी को प्रस्तावित आम चुनाव से पहले नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) गंभीर आंतरिक संकट में फंसती नजर आ रही है। कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन को लेकर पार्टी के भीतर तीखे मतभेद उभर आए हैं। इसी विवाद के चलते NCP के कई वरिष्ठ छात्र नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
NCP का गठन पिछले वर्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के बाद किया गया था। पार्टी नेतृत्व का दावा था कि यह संगठन छात्र संघर्षों और लोकतांत्रिक सुधारों की आवाज बनेगा, लेकिन जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन के बाद पार्टी की दिशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, गठबंधन वार्ता के दौरान जमात-ए-इस्लामी ने 350 संसदीय सीटों में से NCP को केवल 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया, जबकि NCP नेतृत्व कम से कम 125 सीटों की मांग कर रहा था। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया।
इसी विवाद के बीच NCP के वरिष्ठ नेता अशरदुल हक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के नाम पर पार्टी के मूल उद्देश्यों से समझौता किया जा रहा है। वहीं NCP की संयुक्त संयोजक तनजुवा जबीन ने भी पद छोड़ते हुए ढाका-9 सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।
NCP के भीतर अब तीन स्पष्ट गुट उभरकर सामने आए हैं—एक गुट जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन के पक्ष में है, दूसरा गुट गठबंधन का विरोध कर रहा है, जबकि तीसरा गुट किसी भी बड़े राजनीतिक दल से दूरी बनाकर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रहा है।
इस बीच देश में चुनावी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पहले ही चुनाव की तारीख घोषित कर चुके हैं। वहीं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की राजनीति भी सक्रिय हो गई है। पार्टी नेता तारिक रहमान के देश लौटकर नामांकन दाखिल करने से राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, NCP में जारी टूट और इस्तीफों का सिलसिला यदि इसी तरह चलता रहा तो पार्टी की चुनावी तैयारियों पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल NCP नेतृत्व की ओर से इस्तीफों और गठबंधन विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।






