भविष्य के युद्ध होंगे मल्टी-डोमेन, आतंकवाद पर त्वरित सैन्य जवाब जरूरी: CDS अनिल चौहान
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IIT बॉम्बे में बोले— ऑपरेशन सिंदूर जैसी तेज कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा, परमाणु संतुलन बनाए रखना अनिवार्य
संवाद 24 मुंबई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति पूरी तरह बदल चुकी होगी और भारत को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन के लिए स्वयं को तैयार रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसी सीमित समय की, तेज और सटीक सैन्य कार्रवाई की क्षमता बेहद जरूरी है, वहीं पड़ोसी देशों के साथ जमीनी विवादों के कारण लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की तैयारी भी उतनी ही अहम है।
सोमवार को IIT बॉम्बे में अपने संबोधन के दौरान CDS जनरल चौहान ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे। अब युद्ध जमीन, वायु, नौसेना के साथ-साथ साइबर, स्पेस और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे। उन्होंने बताया कि किसी एक मोर्चे पर की गई कार्रवाई का असर दूसरे डोमेन में भी तुरंत दिखाई देगा, जिससे युद्ध की जटिलता और बढ़ जाएगी।
परमाणु सुरक्षा के संदर्भ में CDS ने पाकिस्तान या चीन का नाम लिए बिना कहा कि भारत को दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि परमाणु ताकतों के बीच संतुलन बना रहे और किसी भी स्थिति में यह संतुलन कमजोर न पड़े।
अपने भाषण में जनरल चौहान ने युद्ध के बदलते स्वरूप को “कन्वर्जेंस वॉरफेयर” करार दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, हाइपरसोनिक सिस्टम, एडवांस्ड मटीरियल और एज कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकें मिलकर युद्ध की रणनीति और संचालन को पूरी तरह नया रूप दे रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मल्टी-डोमेन ऑपरेशन को प्रभावी ढंग से अंजाम देने के लिए थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव डोमेन में कार्यरत बलों के बीच गहरे तालमेल की जरूरत होगी। इसके लिए एक मजबूत कमांड और कंट्रोल सिस्टम का विकास अनिवार्य होगा।
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस कार्रवाई में पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। बाद में 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने पर सहमति बनी थी।
CDS के इस बयान को भविष्य की सुरक्षा रणनीति और भारत की सैन्य तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें तेज निर्णय, तकनीकी बढ़त और सभी मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई है।






