कानपुर के KIT कॉलेज में छात्रों का उग्र प्रदर्शन: ऑटोनॉमस स्टेटस के नाम पर धोखा और भविष्य पर संकट
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के रूमा स्थित कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) में 15 दिसंबर 2025 को छात्रों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। पिछले एक सप्ताह से चल रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ने सोमवार को उग्र रूप ले लिया। आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ की और नए कॉन्फ्रेंस रूम में आग लगा दी। हालांकि, समय पर पहुंची फायर ब्रिगेड और कॉलेज प्रशासन की मुस्तैदी से आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन यह घटना कॉलेज प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ की कहानी बयां करती है।
विवाद की जड़: ऑटोनॉमस का फर्जी दावा छात्रों का मुख्य आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने 2024-25 सत्र में दाखिले के समय संस्थान को ‘ऑटोनॉमस’ बताकर अधिक फीस वसूली। ऑटोनॉमस कॉलेज होने के नाम पर सामान्य फीस से ज्यादा शुल्क लिया गया, जबकि वास्तव में संस्थान डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) से संबद्ध ही रहा। छात्रों को 30 अंकों की परीक्षा कराई गई, जबकि AKTU के नियमों के अनुसार 70 अंकों की परीक्षा होनी चाहिए। इससे छात्रों का यूनिवर्सिटी में इनरोलमेंट नहीं हुआ, और अब उन्हें AKTU के सिलेबस के अनुसार परीक्षा देने का दबाव डाला जा रहा है।
बीटेक, बीसीए और एमसीए के छात्र-छात्राएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पहले वर्ष के छात्रों को बैक पेपर देने की बात कही जा रही है, जो उनके मार्कशीट पर स्थायी धब्बा बन सकता है। अंतिम वर्ष के छात्र प्लेसमेंट में पिछड़ने की चिंता कर रहे हैं। छात्राओं ने भी सवाल उठाया कि उनकी क्या गलती है? उन्होंने कॉलेज के नियमों के अनुसार फीस दी, पढ़ाई की और परीक्षा पास की, फिर अब सजा क्यों?
प्रदर्शन का उग्र रूप और प्रशासन का हस्तक्षेप सोमवार को छात्रों ने नारेबाजी के साथ तोड़फोड़ शुरू की। कॉलेज निदेशक से धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई। हॉस्टल में रह रही छात्राओं को प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर बंद कर दिया, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ा। देर शाम कॉन्फ्रेंस रूम में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई।
सूचना पर एसडीएम नर्वल, एसीपी चकेरी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। AKTU से प्रो-वाइस चांसलर प्रो. राजीव कुमार की टीम भी पहुंची। एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार ने छात्रों, कॉलेज प्रबंधन और यूनिवर्सिटी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत कराई। छात्रों ने कहा कि कॉलेज की गड़बड़ी से उनके दो-तीन साल बर्बाद हो रहे हैं और अतिरिक्त फीस से आर्थिक नुकसान हुआ है। AKTU टीम ने आश्वासन दिया कि छात्रों का कोई नुकसान नहीं होगा।
एक सबक: शिक्षा में पारदर्शिता की जरूरत यह घटना निजी शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर फीस वसूलना और नियमों की अनदेखी करना न केवल अनैतिक है, बल्कि आपराधिक भी।
AKTU और UGC को ऐसे मामलों में सख्त हस्तक्षेप करना चाहिए। छात्रों का प्रदर्शन हिंसा तक पहुंचा, जो दुखद है, लेकिन उनका आक्रोश जायज है। उम्मीद है कि प्रशासन और यूनिवर्सिटी मिलकर छात्रों के हित में स्थायी समाधान निकालेंगे, ताकि किसी का भविष्य बर्बाद न हो।यह मामला हमें याद दिलाता है कि शिक्षा व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। छात्रों की आवाज को दबाने की बजाय सुनना चाहिए।






