भागवत बोले, भारत स्वभाव से संघर्षप्रिय नहीं, भाईचारे की भावना हमारी पहचान, राष्ट्रवाद की भारतीय अवधारणा पश्चिमी सोच से बिल्कुल अलग
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संवाद 24 नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत के स्वभाव में झगड़ा करना नहीं, बल्कि भाईचारा और सामूहिक सद्भाव बनाए रखना शामिल है। हमारे देश की परंपरा हमेशा एकजुटता, सहयोग और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित रही है।
वे नागपुर में आयोजित नेशनल बुक फेस्टिवल में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद (नेशनहुड) की अवधारणा पश्चिमी देशों की सोच से पूरी तरह अलग है। पश्चिमी समाज राष्ट्रवाद को संघर्ष और प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखता है, जबकि भारत में राष्ट्रभाव का आधार प्रेम, संस्कृति और साझा विरासत है।
भागवत ने कहा कि पश्चिम देश हमारे नेशनहुड को नहीं समझ पाए, इसलिए उन्होंने इसे “नेशनलिज़्म” कहना शुरू कर दिया। “भारत हमेशा से एक राष्ट्र रहा है, चाहे शासन किसी का भी रहा हो। यहां की राष्ट्रभावना गर्व से नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के साथ गहरे जुड़ाव से उत्पन्न होती है।”
उन्होंने कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब किसी विचार को अंतिम सत्य मान लिया जाता है, तो संवाद की गुंजाइश खत्म हो जाती है। भारत में विचारों की विविधता के बावजूद एकता हमेशा कायम रही, क्योंकि हमारी संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है।
भागवत ने कहा— “हम धर्म, भाषा, खान-पान, परंपराओं और राज्यों में भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हम सभी भारत माता की संतान हैं। यही हमारी एकता की जड़ है।”
उन्होंने ज्ञान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर भी जोर दिया कहा कि जीवन का अर्थ केवल जानकारी नहीं, बल्कि समझ और दूसरों की मदद से मिलने वाली संतुष्टि में है। “अस्थायी सफलता नहीं, बल्कि किसी के जीवन में योगदान देना सच्ची उपलब्धि होती है।”
AI को रोकना संभव नहीं, पर मानव का नियंत्रण जरूरी
टेक्नोलॉजी पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को रोका नहीं जा सकता। इसे स्वीकार करते हुए सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका उपयोग मानवता की भलाई और विकास के लिए हो, न कि मानव पर नियंत्रण के लिए।
ग्लोबलाइजेशन पर बोले, वास्तव में दुनिया को जोड़ने वाला भारत ही होगा
ग्लोबलाइजेशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज जो ग्लोबलाइजेशन दिखाई देता है, वह वास्तविक नहीं है। असली वैश्वीकरण तब होगा जब दुनिया “वसुधैव कुटुम्बकम” (दुनिया एक परिवार है) की भारतीय भावना को अपनाएगी।






