RSS ऑफिस, मंदिर और मंडियों पर केमिकल अटैक की साजिश का खुलासा, मास्टरमाइंड डॉक्टर ने चीन में ‘रिसिन’ बनाना सीखा

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली / अहमदाबाद / हैदराबाद
गुजरात ATS ने देश में बड़े केमिकल अटैक की साजिश का पर्दाफाश किया है। जांच में पता चला है कि हैदराबाद के डॉ. अहमद सैयद मोइनुद्दीन, जो ISIS के टेरर मॉड्यूल से जुड़ा बताया जा रहा है, रिकिन (Ricin) नामक घातक केमिकल तैयार कर रहा था। मोइनुद्दीन ने यह केमिकल अरंडी के बीजों से बनाना चीन में सीखा था और अपने भाई से कहा था “मैं ऐसी दवा बना रहा हूं, जिससे पूरा घर अमीर हो जाएगा।”

13 नवंबर को राजेंद्रनगर स्थित उनके फ्लैट पर छापेमारी में यह सामग्री बरामद हुई। मोइनुद्दीन के साथ यूपी शामली निवासी आजाद सुलेमान शेख (20) और लखीमपुर खीरी के मोहम्मद सुहैल (23) को भी पकड़ा गया। ATS के अनुसार, दोनों ने पिछले सात महीनों में लखनऊ स्थित RSS मुख्यालय, अहमदाबाद की नरोदा मंडी, दिल्ली की आजादपुर मंडी और हरिद्वार के मंदिरों की रेकी की थी। इनके पाकिस्तान में संपर्क होने की भी पुष्टि हुई है।

जांच के दौरान पाया गया कि राजस्थान में भारत-पाक सीमा के पास ड्रोन द्वारा गिराए गए हथियार और पैसा इकट्ठा कर इन्हें मोइनुद्दीन तक पहुंचाया जाता था। ATS ने CCTV फुटेज के आधार पर तीनों के कनेक्शन की पुष्टि की। गिरफ्तारी अहमदाबाद के होटल ग्रैंड एम्बियंस से निकलते समय हुई।

मोइनुद्दीन ने चीन से MBBS किया था और इंटरनेट पर फ्री हेल्थ एडवाइस देता था। अपने फ्लैट पर आने वाले पार्सल को लेकर वह कहता था कि “वो एक ऐसी दवा बना रहा है, जो पूरे घर को अमीर बना देगी।” ATS के अनुसार, उसे अबू खलेजा से निर्देश मिल रहे थे, जो अफगानिस्तान में स्थित और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस से जुड़ा है। ChatGPT पर भी उसने रिसिन बनाने की विधि खोजी।

मोइनुद्दीन हैदराबाद में इसी अपार्टमेंट में अकेला रहता था

क्या है रिसिन और कितना खतरनाक?

लखनऊ के केमिकल विशेषज्ञ आनंद अस्थाना के मुताबिक, रिसिन सफेद पाउडर होता है जिसे अरंडी के बीज से रिफाइन किया जाता है। ये साइनाइड से भी कई गुना घातक है।
ये दो तरीकों से जानलेवा हो सकता है –
• हवा में फैलाकर, जिससे बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। असर दो-तीन दिन में दिखता है।
• पानी में मिलाकर या इंजेक्शन के जरिए दिया जाए तो कुछ घंटों में जानलेवा असर दिखता है।
BHU के प्रो. आरएन खरवार ने बताया कि मोइनुद्दीन के पास जो तीन किलो कैस्टर पल्प मिला है, उससे लगभग 100 ग्राम से अधिक रिसिन बनाया जा सकता था, जो हजारों लोगों की जान के लिए खतरा हो सकता था।

इतिहास में रिसिन का इस्तेमाल

• 1978 में कोल्ड वॉर के दौरान, KGB ने पत्रकार जॉर्जी मार्कोव की लंदन में हत्या की।
• 2013 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को रिसिन वाला पत्र भेजा गया।
• 2018 में ट्यूनिशिया में ISIS द्वारा प्रयोग।
• 2025 में जर्मनी में होम लैब में बनाने की सूचना।

यह पहली बार है जब भारत में इस तरह के केमिकल अटैक की साजिश पकड़ी गई है।

कानूनी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं

UNSCR, अमेरिका और भारत के Weapons of Mass Destruction Act 2005 के तहत रिसिन के निर्माण और भंडारण पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद यह आसानी से मिल जाता है और प्रोसेस करना भी सरल है।

जांच आगे बढ़ी

ATS ने बताया कि हमले का तरीका तय नहीं किया गया था, लेकिन रिसिन तैयार होने के बाद योजना बनाई जाती। टीम अब लखनऊ, हरिद्वार, अहमदाबाद, लखीमपुर खीरी, शामली और बारामूला सहित उन सभी जगहों की जांच करेगी जहां ये संदिग्ध पहुंचे थे। सुरक्षा एजेंसियां अब ISIS से जुड़े ISKP और ISHP मॉड्यूल की गहन जांच कर रही हैं।

यह मामला देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते कार्रवाई न होती तो यह साजिश बड़े पैमाने पर जनहानि का कारण बन सकती थी।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News