
संवाद 24 डेस्क। धनतेरस का त्योहार भारतीय परंपरा में सुख, समृद्धि और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि हर साल धनतेरस के अवसर पर देशभर के सर्राफा बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ती है। हालांकि, धनतेरस 2026 पर सोने का बाजार पिछले कुछ वर्षों से अलग तस्वीर पेश कर रहा है। एक ओर सोने की कीमतों में पिछले पांच वर्षों के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, वहीं दूसरी ओर वर्ष 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी 2026 में लगभग 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने वाला सोना अब अपने उच्चतम स्तर से 22 फीसदी से अधिक नीचे आ चुका है।
सोने की कीमतों में आई इस गिरावट ने उन लोगों के लिए खरीदारी का अवसर पैदा किया है, जो लंबे समय से ऊंचे दामों के कारण बाजार से दूरी बनाए हुए थे। हालांकि, कीमतों में गिरावट को देखकर जल्दबाजी में निवेश करना समझदारी नहीं होगी। खरीदारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि धनतेरस पर सोना आभूषण के रूप में खरीदा जाए, सिक्कों में निवेश किया जाए या फिर गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे वित्तीय विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए। इन सभी विकल्पों की लागत, जोखिम, तरलता और संभावित लाभ अलग-अलग हैं। इसलिए खरीदारी से पहले इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है।
पांच साल में लगभग 192 फीसदी बढ़ी सोने की कीमत, फिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
सोने ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। धनतेरस 2021 से धनतेरस 2026 के बीच घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 192 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण रहे हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की आशंकाएं, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों को लगातार समर्थन दिया।
लेकिन किसी भी परिसंपत्ति की कीमत लगातार एक दिशा में नहीं बढ़ती। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सोने में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव ने भी कीमतों को प्रभावित किया। इसके परिणामस्वरूप सोने में तेज गिरावट देखने को मिली।
यह समझना जरूरी है कि सोने की कीमतों में 22 फीसदी की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि सोना अब सस्ता होने के बाद निश्चित रूप से फिर तेजी पकड़ेगा। बाजार में गिरावट के बाद भी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए निवेशकों को केवल पुराने रिकॉर्ड या मौजूदा भाव के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश की अवधि और जरूरत को ध्यान में रखकर खरीदारी करनी चाहिए।
धनतेरस पर सोने और चांदी का भाव कितना रहा?
6 नवंबर 2026 को धनतेरस के कारोबारी सत्र के दौरान घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, सुबह के कारोबार में 10 ग्राम सोने का भाव 1,820 रुपये यानी लगभग 1.26 फीसदी गिरकर 1,42,640 रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,680 रुपये यानी लगभग 1.43 फीसदी की गिरावट के साथ 1,84,860 रुपये दर्ज की गई।
दिल्ली में उपलब्ध खुदरा दरों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 14,202 रुपये प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 13,019 रुपये प्रति ग्राम रही। इस हिसाब से 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,42,020 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,30,185 रुपये रहा।
हालांकि, खरीदारों को ध्यान रखना चाहिए कि सोने के भाव शहर, सर्राफा कारोबारी, शुद्धता और बाजार के समय के अनुसार बदल सकते हैं। आभूषण खरीदते समय इन कीमतों के अलावा निर्माण शुल्क और लागू वस्तु एवं सेवा कर भी देना पड़ता है। इसलिए दुकान पर मिलने वाला अंतिम बिल केवल सोने के मूल भाव से अधिक हो सकता है।
सोने के आभूषण खरीदना बेहतर या निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ चुनना?
धनतेरस पर सोना खरीदने वाले लोगों के सामने सबसे महत्वपूर्ण बात यह होनी चाहिए कि वे सोना किस उद्देश्य से खरीद रहे हैं। यदि खरीदारी का मकसद पहनना, पारिवारिक परंपरा निभाना या किसी को उपहार देना है, तो आभूषण अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लेकिन यदि उद्देश्य केवल सोने की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी से लाभ कमाना है, तो आभूषण हमेशा सबसे किफायती विकल्प साबित नहीं होते।
सोने के आभूषणों की खरीदारी में सोने की वास्तविक कीमत के अलावा निर्माण शुल्क, अपव्यय शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर जैसी लागतें जुड़ती हैं। कई बार डिजाइन और कारीगरी के कारण निर्माण शुल्क काफी अधिक हो जाता है। जब ग्राहक पुराने आभूषण बेचने या बदलने जाता है, तो उसे इन निर्माण शुल्कों का पूरा पैसा वापस नहीं मिलता। इसके अलावा आभूषण की शुद्धता जांच और दोबारा बिक्री के समय होने वाली कटौती भी वास्तविक लाभ को प्रभावित करती है।
दूसरी ओर, गोल्ड ईटीएफ उन निवेशकों के लिए उपयोगी विकल्प है, जो बिना भौतिक सोना खरीदे उसकी कीमतों में होने वाले बदलाव का लाभ लेना चाहते हैं। गोल्ड ईटीएफ ऐसे निवेश कोष होते हैं, जिनकी इकाइयां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती हैं और जिनका मूल्य घरेलू सोने की कीमतों से जुड़ा होता है। इन्हें खरीदने और बेचने के लिए निवेशक के पास डीमैट और कारोबार खाता होना जरूरी है।
गोल्ड ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को सोने की सुरक्षा, लॉकर, चोरी और शुद्धता की जांच जैसी परेशानियों से नहीं गुजरना पड़ता। इन्हें बाजार के कारोबारी समय में खरीदा और बेचा जा सकता है। हालांकि, इसमें भी कुछ खर्च शामिल होते हैं। निवेशकों को कोष का वार्षिक व्यय अनुपात, दलाली शुल्क, खरीद-बिक्री के बीच का मूल्य अंतर और मूल्य अनुकरण में होने वाली त्रुटि को समझना चाहिए।
इस तरह आभूषण व्यक्तिगत उपयोग के लिए बेहतर हो सकते हैं, जबकि गोल्ड ईटीएफ निवेश के उद्देश्य से अधिक सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकते हैं। दोनों का चुनाव एक ही आधार पर करना उचित नहीं है।
सोने के सिक्के और छड़ें खरीदने में क्या है फायदा?
धनतेरस पर आभूषणों के अलावा सोने के सिक्के और छड़ें खरीदने का भी चलन है। कई परिवार इन्हें भविष्य की जरूरतों और संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखते हैं। निवेश के लिहाज से सिक्के और छड़ें आभूषणों की तुलना में कुछ हद तक किफायती हो सकते हैं, क्योंकि इनमें डिजाइन और कारीगरी का खर्च नहीं जुड़ता या अपेक्षाकृत कम होता है।
सोने के सिक्के खरीदते समय उनकी शुद्धता, वजन, प्रमाणन और विक्रेता की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। 24 कैरेट सोना सामान्यतः 99.9 फीसदी शुद्धता वाला होता है, जबकि 22 कैरेट सोने में लगभग 91.6 फीसदी सोना होता है। सिक्के खरीदते समय हॉलमार्क और शुद्धता संबंधी प्रमाण जरूर जांचना चाहिए।
हालांकि, सिक्कों और छड़ों में निवेश करने के बाद उन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी खरीदार की होती है। घर में रखने पर चोरी का जोखिम रहता है और बैंक लॉकर का इस्तेमाल करने पर उसका किराया देना पड़ सकता है। इसके अलावा, बेचते समय दुकानदार की खरीद नीति और लागू कटौतियों के कारण मिलने वाली रकम खरीद मूल्य से कम हो सकती है।
इसलिए केवल धनतेरस की शुभता को ध्यान में रखकर सिक्के खरीदने के बजाय उनकी खरीद और बिक्री की शर्तों को पहले समझ लेना चाहिए।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या हैं और क्या अब भी इनमें निवेश किया जा सकता है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी सरकारी स्वर्ण बॉन्ड सोने में निवेश का एक ऐसा माध्यम रहे हैं, जिसमें निवेशक को भौतिक सोना रखने की जरूरत नहीं होती। ये भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से जारी किए जाते रहे हैं। इनकी कीमत सोने के बाजार भाव से जुड़ी होती है और निवेशक को सोने की कीमत में बदलाव के साथ निर्धारित ब्याज का लाभ भी मिलता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की एक प्रमुख विशेषता यह रही है कि इन पर सालाना 2.5 फीसदी की निश्चित ब्याज दर मिलती है। यह ब्याज निवेशक को उसके निवेश मूल्य के आधार पर दिया जाता है। बॉन्ड की सामान्य अवधि आठ वर्ष होती है और पांच वर्ष पूरे होने के बाद निर्धारित ब्याज भुगतान की तारीखों पर समयपूर्व निकासी का विकल्प उपलब्ध होता है।
हालांकि, इस विकल्प को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। फरवरी 2024 के बाद सरकार की ओर से कोई नया सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निर्गम नहीं किया गया है। इसलिए नए निवेशक प्राथमिक निर्गम के माध्यम से इन बॉन्ड को नहीं खरीद सकते। पुराने बॉन्ड यदि शेयर बाजार में उपलब्ध हैं, तो उन्हें द्वितीयक बाजार के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
लेकिन ऐसा करते समय निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार में इन बॉन्ड की कीमत उनके मूल निर्गम मूल्य से अधिक या कम हो सकती है। खरीदारी से पहले उनकी परिपक्वता की तारीख, बाजार में उपलब्धता, कारोबार की मात्रा और खरीद मूल्य की तुलना करना जरूरी है। कम कारोबार वाले बॉन्ड में जरूरत के समय उचित कीमत पर बिक्री करना मुश्किल हो सकता है।
कर के मामले में भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के नियमों को समझना आवश्यक है। ब्याज से होने वाली आय कर योग्य होती है। इसके अलावा, परिपक्वता और समयपूर्व बिक्री पर पूंजीगत लाभ के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल कर लाभ की पुरानी जानकारी के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।
गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कौन है बेहतर?
दोनों विकल्पों का उद्देश्य सोने में निवेश का अवसर देना है, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली अलग है। गोल्ड ईटीएफ में निवेशक शेयर बाजार के माध्यम से इकाइयां खरीदता और बेचता है। इसमें निवेश को लंबे समय तक बनाए रखने की कोई निश्चित अवधि नहीं होती। हालांकि, इसकी कीमत बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार बदलती रहती है।
इसके विपरीत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निश्चित अवधि और ब्याज का लाभ मिलता है। लेकिन नए निर्गम उपलब्ध नहीं होने के कारण निवेशक को पुराने बॉन्ड पर निर्भर रहना पड़ता है। द्वितीयक बाजार में कीमत और तरलता दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।
यदि निवेशक को कभी भी अपना निवेश बेचने की सुविधा चाहिए, तो अच्छे कारोबार वाले गोल्ड ईटीएफ पर विचार किया जा सकता है। वहीं, यदि किसी निवेशक के पास पुराने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने का अवसर है और वह उनकी अवधि तथा शर्तों को समझता है, तो वह इस विकल्प का मूल्यांकन कर सकता है।
किसी भी विकल्प को सभी निवेशकों के लिए सर्वोत्तम नहीं कहा जा सकता। चुनाव निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार होना चाहिए।
क्या 2027 की धनतेरस तक सोना फिर बना सकता है नया रिकॉर्ड?
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद बाजार के जानकार लंबी अवधि में इसकी संभावनाओं को लेकर पूरी तरह निराश नहीं हैं। कुछ वित्तीय संस्थानों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
बाजार के कुछ अनुमानों में अगली धनतेरस तक सोने की कीमत 1.65 लाख से 1.71 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। वहीं, कुछ अन्य विश्लेषकों ने 1.30 लाख से 1.35 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को धीरे-धीरे खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना है। इन अनुमानों के अनुसार, 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर भी एक संभावित लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है।
लेकिन इन आंकड़ों को निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए। सोने का बाजार अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेशकों की मांग से प्रभावित होता है। यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक तनाव बढ़ता है, तो सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, डॉलर मजबूत होने और ब्याज दरें ऊंची बने रहने पर सोने पर दबाव आ सकता है।
इसलिए निवेशकों को केवल 2027 के संभावित लक्ष्य को देखकर आज बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। किसी भी विश्लेषक का लक्ष्य बाजार की परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
एकमुश्त निवेश करने के बजाय अपनाएं किस्तों में खरीदारी की रणनीति
सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या अभी पूरी रकम लगाकर सोना खरीद लेना चाहिए या कुछ समय इंतजार करना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों की राय है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौर में एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक ने सोने में 1 लाख रुपये लगाने का लक्ष्य तय किया है, तो वह पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय अलग-अलग समय पर छोटी रकम निवेश कर सकता है। इससे किसी एक दिन की कीमत पर निर्भरता कम होती है। हालांकि, इस तरीके से भी लाभ की गारंटी नहीं मिलती और बाजार में गिरावट जारी रहने पर निवेश का मूल्य घट सकता है।
इसके अलावा निवेशकों को अपने कुल निवेश में सोने की हिस्सेदारी सीमित रखनी चाहिए। सोना पोर्टफोलियो में विविधता लाने और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षा देने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे एकमात्र निवेश माध्यम बनाना उचित नहीं है। शेयर, ऋण आधारित योजनाओं, नकदी और अन्य वित्तीय साधनों के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर खरीदारी करते समय सबसे पहले अपनी जरूरत स्पष्ट करें। यदि आभूषण खरीदना है तो 22 कैरेट सोने की शुद्धता, हॉलमार्क, वजन और निर्माण शुल्क की जानकारी लें। यदि निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं तो गोल्ड ईटीएफ, सिक्कों और उपलब्ध सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की लागत तथा सुविधाओं की तुलना करें।
आभूषण खरीदते समय दुकानदार से विस्तृत बिल जरूर लें। इसमें सोने का वजन, शुद्धता, प्रति ग्राम दर, निर्माण शुल्क और कर का अलग-अलग उल्लेख होना चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो का हॉलमार्क और छह अंकों वाला विशिष्ट पहचान क्रमांक भी जांचें। इससे भविष्य में आभूषण बेचने या उसकी शुद्धता की पुष्टि कराने में आसानी होती है।
गोल्ड ईटीएफ चुनते समय केवल पिछले रिटर्न पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कोष का व्यय अनुपात, कारोबार की मात्रा, मूल्य अनुकरण की त्रुटि और खरीद-बिक्री के बीच का अंतर भी देखना चाहिए। इसी तरह सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने से पहले उसकी परिपक्वता और बाजार मूल्य की जांच करें।
धनतेरस पर समझदारी से खरीदारी ही दिलाएगी बेहतर लाभ
धनतेरस 2026 पर सोने की कीमतों में आई 22 फीसदी से अधिक की गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों को दोबारा बाजार की ओर आकर्षित किया है। पिछले पांच वर्षों में सोने की कीमतों में लगभग 192 फीसदी की बढ़ोतरी यह बताती है कि लंबी अवधि में इस कीमती धातु ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, हालिया गिरावट यह भी याद दिलाती है कि सोने की कीमतें हमेशा बढ़ती नहीं रहतीं और इसमें भी जोखिम मौजूद है।
इस धनतेरस पर सबसे अच्छा विकल्प वही होगा, जो खरीदार की वास्तविक जरूरत के अनुकूल हो। पहनने और पारिवारिक परंपरा के लिए आभूषण खरीदे जा सकते हैं, जबकि निवेश के उद्देश्य से गोल्ड ईटीएफ या अन्य वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। पुराने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की उपलब्धता होने पर उनकी शर्तों और बाजार मूल्य की जांच करना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, सोने की कीमतों में गिरावट को अवसर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे निश्चित मुनाफे का संकेत मानना सही नहीं होगा। समझदारी इसी में है कि खरीदारी भावनाओं के बजाय जरूरत, बजट और वित्तीय योजना के आधार पर की जाए। आखिरकार, धनतेरस पर सोना खरीदने का असली उद्देश्य केवल शुभता से जुड़ा नहीं है, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित और समझदारी से इस्तेमाल करना भी है।






