धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जाएगा धन-समृद्धि का पर्व, जानें लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का उत्तम समय

संवाद 24 डेस्क। दिपावली की रौनक अब बाजारों और घरों में दिखाई देने लगी है। पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस के पावन पर्व से होती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना करने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी या नई वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि इस अवसर पर देशभर के बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और लोग आभूषणों से लेकर बर्तनों तक की खरीदारी करते हैं। हालांकि, इस वर्ष धनतेरस की तारीख को लेकर भी लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं धनतेरस 2026 कब मनाई जाएगी, त्रयोदशी तिथि कब से शुरू होगी, लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और सोना-चांदी खरीदने के लिए कौन सा समय शुभ रहेगा।

धनतेरस 2026 कब है? जानें सही तारीख और त्रयोदशी तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस का पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का पहला दिन माना जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ होगी और अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी।
त्रयोदशी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण कुछ लोगों के मन में 5, 6 और 7 नवंबर को लेकर भ्रम हो सकता है। हालांकि, प्रदोष काल और निर्धारित धार्मिक मान्यताओं के आधार पर 6 नवंबर को ही धनतेरस का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शाम के समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। इसलिए श्रद्धालुओं को पूजा की तैयारियां पहले से कर लेनी चाहिए, ताकि शुभ समय में विधिपूर्वक पूजा की जा सके।

धनतेरस 2026 पर लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास शुरू होने वाली वह अवधि है, जिसमें भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा का धार्मिक महत्व बताया गया है। धनतेरस पर इसी अवधि में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना की जाती है।
वर्ष 2026 में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार श्रद्धालुओं को पूजा के लिए लगभग 1 घंटा 56 मिनट का समय मिलेगा। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों में दीपक जलाकर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता का पूजन कर सकते हैं।
ज्योतिषीय गणना में वृषभ काल को भी इस दिन महत्वपूर्ण माना गया है। वर्ष 2026 में वृषभ काल शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह समय धनतेरस की लक्ष्मी-कुबेर पूजा के निर्धारित मुहूर्त के साथ मेल खाता है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि पूजा के मुहूर्त में अलग-अलग शहरों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

कब करें धनतेरस की पूजा?
धनतेरस की पूजा का समय निर्धारित करते समय स्थान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के आधार पर की जाती है। यही कारण है कि अलग-अलग शहरों में पूजा का शुभ समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
नई दिल्ली में 6 नवंबर को लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक बताया गया है। वहीं, नोएडा में यह समय शाम 6 बजकर 1 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक है। गुरुग्राम में शाम 6 बजकर 3 मिनट से रात 7 बजकर 59 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा।
जयपुर में शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक और चंडीगढ़ में शाम 6 बजे से रात 7 बजकर 54 मिनट तक पूजा का समय निर्धारित किया गया है। इन समयों में अंतर इस बात को स्पष्ट करता है कि दूसरे शहर का मुहूर्त अपने यहां लागू मानकर पूजा शुरू नहीं करनी चाहिए।

धनतेरस पर सोना खरीदने का शुभ समय क्या है?
धनतेरस का नाम आते ही सबसे पहले सोने और चांदी की खरीदारी का ख्याल आता है। भारतीय परंपरा में इस दिन कीमती धातुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदा गया सोना और चांदी घर में सुख, संपन्नता और सौभाग्य का प्रतीक बनकर आता है। यही वजह है कि इस अवसर पर आभूषणों की दुकानों, सर्राफा बाजारों और सिक्कों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती है।
वर्ष 2026 में सोना खरीदने का शुभ समय 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 6 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार सोने के सिक्के, आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं खरीद सकते हैं।
हालांकि, खरीदारी से पहले यह समझना जरूरी है कि शुभ मुहूर्त धार्मिक परंपरा से जुड़ा विषय है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इस समय खरीदारी करने से किसी वस्तु की कीमत बढ़ना या घट जाना निश्चित है। सोने की खरीदारी करते समय बाजार भाव, अपनी आर्थिक स्थिति और वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देना चाहिए।

धनतेरस पर सोने के अलावा क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर सोना खरीदना लोकप्रिय परंपरा जरूर है, लेकिन इस दिन केवल सोना खरीदना ही आवश्यक नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपनी सामर्थ्य के अनुसार कोई भी नई और उपयोगी वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन चांदी के सिक्के, पूजा के बर्तन, पीतल के पात्र और तांबे के बर्तन खरीदने की भी परंपरा है।
कई परिवार इस अवसर पर रसोई के लिए नए बर्तन खरीदते हैं। कुछ लोग चांदी के लक्ष्मी-गणेश, पूजा की थाली, दीपक और अन्य धार्मिक वस्तुएं घर लाते हैं। वहीं, कुछ परिवार इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण और दैनिक उपयोग की दूसरी वस्तुओं की खरीदारी भी करते हैं।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इसे घर की स्वच्छता और दरिद्रता दूर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हालांकि, इन परंपराओं का पालन क्षेत्रीय मान्यताओं और परिवार की रीति-रिवाजों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
इस पर्व का वास्तविक संदेश अपनी क्षमता के अनुसार खुशियां बांटना और घर में सकारात्मक वातावरण बनाना है। इसलिए महंगी वस्तु खरीदना जरूरी नहीं है। छोटी-सी चांदी की वस्तु, नया बर्तन या जरूरत का कोई सामान भी इस परंपरा का हिस्सा बन सकता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?
धनतेरस का धार्मिक महत्व केवल धन और आभूषणों की खरीदारी तक सीमित नहीं है। इस पर्व का संबंध स्वास्थ्य, आयुर्वेद और आरोग्य से भी है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिन्हें आयुर्वेद का देवता और चिकित्सा विज्ञान का प्रवर्तक माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसी कारण उन्हें देवताओं का वैद्य और स्वास्थ्य का रक्षक माना जाता है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से परिवार के सदस्यों को अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन लोग अपने परिवार की आरोग्यता और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
धनतेरस को धन्वंतरि जयंती और धन्वंतरि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम इस पर्व के स्वास्थ्य संबंधी महत्व को दर्शाता है। भारतीय परंपरा में स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। इस दृष्टि से धनतेरस का संदेश केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना भी है।

समुद्र मंथन से जुड़ी है माता लक्ष्मी के प्रकट होने की कथा
धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से भी जुड़ा हुआ है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के उद्देश्य से समुद्र मंथन किया था। इस मंथन के दौरान अनेक दिव्य वस्तुएं और रत्न प्रकट हुए। इन्हीं में माता लक्ष्मी भी थीं।
मान्यता है कि माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट होकर भगवान विष्णु की अर्धांगिनी बनीं। माता लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण धनतेरस के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की आराधना भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन का रक्षक कहा गया है। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है, जबकि कुबेर देवता को धन-संपत्ति के संरक्षण से जोड़ा जाता है।
कई परिवार धनतेरस की पूजा में भगवान गणेश को भी शामिल करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है। इस प्रकार धनतेरस पर लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा को सुख, समृद्धि, बुद्धि और स्वास्थ्य की कामना से जोड़ा जाता है।

धनतेरस की पूजा कैसे करें? जानें सरल विधि
धनतेरस के दिन घर की साफ-सफाई करके पूजा की तैयारियां करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में स्वच्छता को माता लक्ष्मी के आगमन से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए पर्व से पहले घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और आंगन की सफाई की जाती है। कई परिवार मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं और दीपक जलाते हैं।
पूजा के लिए सबसे पहले एक स्वच्छ स्थान पर चौकी स्थापित करें। उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और देवी-देवताओं को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित करें।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता का स्मरण करें। परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख, शांति और आर्थिक समृद्धि की कामना करें। पूजा के दौरान लक्ष्मी मंत्र और धन्वंतरि मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।
पूजा के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें। घर के मुख्य द्वार और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा भी है। पूजा की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भी पूजा की जा सकती है।

धनतेरस पर यमदीपदान का क्या है महत्व?
धनतेरस के दिन यमदीपदान की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। इसे यम दीपम भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर भगवान यमराज से परिवार के सदस्यों की रक्षा और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। जब उसकी पत्नी को इस बात का पता चला तो उसने अपने पति को नींद से बचाने के लिए पूरी रात जागकर बिताई। उसने घर के दरवाजे पर सोने-चांदी के आभूषण और दीपक रख दिए। मान्यता है कि जब यमराज वहां पहुंचे तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनका ध्यान भटक गया। इसके बाद वे बिना राजकुमार के प्राण लिए वापस लौट गए।
इसी कथा से प्रेरित होकर धनतेरस की शाम यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित हुई। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों की रक्षा होती है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है।

धनतेरस पर खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस के अवसर पर बाजारों में खरीदारी का उत्साह रहता है। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर घरेलू सामान तक की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच अवश्य करें। आभूषणों पर भारतीय मानक ब्यूरो का हॉलमार्क और छह अंकों वाला विशिष्ट पहचान क्रमांक देखना चाहिए। इससे सोने की शुद्धता और आभूषण की पहचान से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।
चांदी खरीदते समय भी हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी लेना उपयोगी है। खरीदारी के दौरान दुकानदार से पक्का बिल अवश्य लें। बिल में सोने या चांदी का वजन, शुद्धता, प्रति ग्राम कीमत, निर्माण शुल्क और कर का विवरण स्पष्ट होना चाहिए।
इसके अलावा धनतेरस पर केवल धार्मिक मान्यता के कारण अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने से बचना चाहिए। त्योहार का उद्देश्य परिवार में खुशियां लाना है, न कि अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाना। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करना ही समझदारी है।

धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव
धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान अलग-अलग दिनों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन किया जाता है। धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली मनाई जाती है। इसके बाद अमावस्या के दिन दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाता है, जब माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का उत्सव मनाया जाता है। पांचवें दिन भाई दूज का पर्व आता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
इस प्रकार धनतेरस से शुरू होने वाला यह उत्सव भारतीय संस्कृति में परिवार, स्वास्थ्य, समृद्धि और आपसी प्रेम का संदेश देता है।

धनतेरस 2026 का धार्मिक संदेश: केवल धन नहीं, स्वास्थ्य और खुशियां भी हैं जरूरी
धनतेरस का पर्व भारतीय जीवनशैली में धन और स्वास्थ्य के बीच संतुलन का महत्व समझाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा आरोग्यता की कामना के लिए की जाती है, वहीं माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है। सोना-चांदी और नई वस्तुओं की खरीदारी इस उत्सव की परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इसका अर्थ केवल भौतिक संपत्ति जुटाना नहीं है।
वास्तव में धनतेरस हमें यह संदेश देता है कि जीवन में धन के साथ अच्छा स्वास्थ्य, परिवार का साथ, मानसिक शांति और संतोष भी आवश्यक हैं। इसलिए इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस के अवसर पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करें, शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना करें और परिवार के साथ दीपोत्सव की खुशियां मनाएं।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य, बचत और जिम्मेदारी का संकल्प लेकर मनाया गया धनतेरस पर्व जीवन में वास्तविक समृद्धि का आधार बन सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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