
संवाद 24 डेस्क। भारतीय मिठाइयों की दुनिया विविध स्वादों, रंगों और पारंपरिक पाक कलाओं से भरी हुई है। कहीं दूध से मिठाइयां तैयार की जाती हैं तो कहीं बेसन, आटा, मेवे और फलों का उपयोग किया जाता है। इन्हीं पारंपरिक मिठाइयों में पेठा एक ऐसी मिठाई है, जिसने अपनी सादगी, पारदर्शी बनावट और विशिष्ट मिठास के कारण देशभर में लोकप्रियता हासिल की है। बाहर से हल्का सख्त और भीतर से नरम, रसदार तथा मीठा पेठा खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, इसे तैयार करने की प्रक्रिया भी उतनी ही रोचक है।
पेठे का नाम सुनते ही उत्तर प्रदेश के आगरा शहर की याद आती है। आगरा का पेठा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान रखता है। सफेद, सूखा, अंगूरी, केसरिया और कई आधुनिक स्वादों में उपलब्ध यह मिठाई समय के साथ पारंपरिक स्वरूप से आगे बढ़कर नए प्रयोगों का हिस्सा बन गई है। हालांकि इसका मूल आधार आज भी सफेद पेठा यानी शीतकालीन कद्दू ही है।
आखिर किस फल से तैयार होता है पेठा?
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि पेठा किस चीज से बनता है। दरअसल, पेठा बनाने के लिए सफेद कद्दू का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पेठा, सफेद कुम्हड़ा या ऐश गॉर्ड भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Benincasa hispida है। इसका गूदा हल्के रंग का, रसदार और अपेक्षाकृत कम स्वाद वाला होता है। यही विशेषता इसे मिठाई बनाने के लिए उपयुक्त बनाती है।
सफेद पेठे में पानी की मात्रा अधिक होती है और इसका अपना स्वाद बहुत तीव्र नहीं होता। इसलिए जब इसे चाशनी में पकाया जाता है तो यह चीनी की मिठास को अच्छी तरह सोख लेता है। उचित तरीके से तैयार करने पर इसके टुकड़े पारदर्शी दिखाई देने लगते हैं। पेठे की यही विशेष बनावट इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान देती है।
- आगरा के पेठे का इतिहास और लोकप्रियता
आगरा का पेठा भारतीय मिठाई परंपरा का एक प्रसिद्ध हिस्सा है। इसके इतिहास को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। एक लोकप्रिय मान्यता इसे मुगलकालीन शाही रसोई से जोड़ती है। हालांकि इसके आविष्कार से संबंधित सभी ऐतिहासिक विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना कठिन है, लेकिन इतना निश्चित है कि आगरा में पेठा बनाने की कला लंबे समय से विकसित होती रही है।
आगरा में पेठा बनाने वाले कारीगरों ने इसकी तैयारी की तकनीक को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया। समय के साथ इसमें गुलाब, केसर, इलायची, अंगूर और अन्य स्वादों का प्रयोग होने लगा। आज आगरा का पेठा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय खाद्य उपहार भी है। इसकी प्रसिद्धि ने इसे स्थानीय मिठाई से राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
घर पर पेठा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
पेठा घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। हालांकि इसे बनाने में धैर्य और कुछ विशेष सावधानियों की आवश्यकता होती है। अच्छी गुणवत्ता का सफेद कद्दू चुनना इसकी सफलता का पहला कदम है।
सामग्री (लगभग 20–25 मध्यम आकार के टुकड़ों के लिए):
सफेद पेठा यानी सफेद कद्दू – 1 किलोग्राम।
चीनी – 750 ग्राम से 1 किलोग्राम।
पानी – लगभग 1 लीटर (आवश्यकतानुसार)।
फिटकरी – लगभग ¼ छोटी चम्मच।
नींबू का रस – 1 छोटी चम्मच।
इलायची पाउडर – ½ छोटी चम्मच।
गुलाब जल – 1 छोटी चम्मच (वैकल्पिक)।
केसर – 8 से 10 धागे (वैकल्पिक)।
खाने योग्य चूना – आवश्यकतानुसार, केवल तभी जब पारंपरिक चूने वाले उपचार की विधि अपनाई जाए और उसकी सुरक्षित तैयारी का सही ज्ञान हो।
विशेष सुझाव: पहली बार पेठा बनाने वालों के लिए बिना चूने वाली विधि अधिक सरल है। इसमें फिटकरी का उपयोग भी वैकल्पिक रखा जा सकता है। कद्दू को सही आकार में काटना, अच्छी तरह धोना और पकाने का समय नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण है।
पेठा बनाने से पहले कद्दू की तैयारी क्यों है जरूरी?
पेठा बनाने की शुरुआत सफेद कद्दू को अच्छी तरह साफ करने से होती है। सबसे पहले कद्दू को धोकर उसका मोटा छिलका उतार लें। इसके बाद बीच में मौजूद बीज और रेशेदार हिस्सा निकाल दें। अब बचे हुए गूदे को लगभग एक से डेढ़ इंच के चौकोर टुकड़ों में काट लें।
ध्यान रखें कि सभी टुकड़ों का आकार लगभग समान होना चाहिए, ताकि वे एकसमान पक सकें। बहुत छोटे टुकड़े उबालने के दौरान टूट सकते हैं, जबकि बहुत बड़े टुकड़ों में चाशनी ठीक से नहीं पहुंच पाती।
अब कांटे या टूथपिक की सहायता से प्रत्येक टुकड़े में कुछ छोटे छेद कर दें। इससे चाशनी अंदर तक पहुंचने में सहायता मिलती है और पेठे में मिठास अच्छी तरह समा जाती है।
फिटकरी वाले पानी से टुकड़ों को कैसे करें तैयार?
पारंपरिक पेठा बनाने की कुछ विधियों में फिटकरी का प्रयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य कद्दू के टुकड़ों की बनावट को कुछ हद तक मजबूत बनाए रखना होता है। इसके लिए एक बड़े बर्तन में पर्याप्त पानी लें और उसमें थोड़ी-सी खाद्य-उपयोग योग्य फिटकरी पूरी तरह घोल दें।
कद्दू के टुकड़ों को इस पानी में लगभग 15 से 20 मिनट तक रखें। इसके बाद उन्हें निकालकर साफ पानी से कई बार अच्छी तरह धो लें। यह चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि फिटकरी का कोई अवशेष टुकड़ों में नहीं रहना चाहिए।
यदि फिटकरी का प्रयोग नहीं करना चाहते तो इस चरण को छोड़कर सीधे उबालने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस स्थिति में पेठे की बनावट कुछ नरम हो सकती है, इसलिए उबालने के समय पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
कद्दू को उबालने की सही तकनीक
अब एक बड़े बर्तन में पानी गर्म करें। जब पानी में उबाल आने लगे तो कद्दू के टुकड़े डाल दें। इन्हें मध्यम आंच पर लगभग 8 से 12 मिनट तक पकाएं। वास्तविक समय टुकड़ों के आकार और कद्दू की किस्म पर निर्भर करेगा।
कद्दू को इतना ही पकाना है कि वह अंदर तक नरम हो जाए, लेकिन उसका आकार बना रहे। इसे अत्यधिक उबालने से टुकड़े टूट सकते हैं और पेठे की पारंपरिक बनावट प्रभावित हो सकती है।
पकने के बाद टुकड़ों को छलनी में निकालकर पानी अच्छी तरह निथार लें। अब इन्हें कुछ देर खुली हवा में रखें, ताकि अतिरिक्त नमी निकल जाए। इस प्रक्रिया से चाशनी टुकड़ों के भीतर बेहतर तरीके से समा सकती है।
चाशनी तैयार करना है पेठे के स्वाद का सबसे महत्वपूर्ण चरण
पेठे का असली स्वाद उसकी चाशनी पर निर्भर करता है। इसके लिए एक भारी तले वाली कड़ाही या बर्तन में चीनी और लगभग 500 से 600 मिलीलीटर पानी डालें। मध्यम आंच पर इसे गर्म करें और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि चीनी पूरी तरह घुल जाए।
चीनी घुलने के बाद यदि सतह पर झाग दिखाई दे तो उसे चम्मच से हटा दें। चाशनी को हल्का गाढ़ा होने तक पकाएं। पेठे के लिए बहुत अधिक गाढ़ी या तार वाली चाशनी की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि कद्दू के टुकड़ों को धीरे-धीरे मिठास सोखनी होती है।
चाशनी तैयार होने पर इसमें नींबू का रस डाल सकते हैं। इससे चीनी के अनावश्यक रूप से जमने की संभावना कम करने में सहायता मिलती है। इसके बाद आंच धीमी कर दें।
- चाशनी में पकाने से कैसे आता है पारदर्शीपन?
अब उबले हुए कद्दू के टुकड़ों को तैयार चाशनी में डालें। ध्यान रखें कि सभी टुकड़े चाशनी में अच्छी तरह डूबे हों। इन्हें धीमी आंच पर लगभग 15 से 20 मिनट तक पकाएं।
इस दौरान टुकड़ों को बार-बार चम्मच से चलाने के बजाय बर्तन को हल्के हाथ से हिलाएं। ऐसा करने से उनके टूटने की आशंका कम रहती है। धीरे-धीरे कद्दू के टुकड़े चाशनी को सोखने लगेंगे और उनका रंग हल्का पारदर्शी दिखाई देने लगेगा।
इसके बाद गैस बंद कर दें और टुकड़ों को चाशनी में ही कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। बेहतर परिणाम के लिए इन्हें 6 से 8 घंटे तक चाशनी में रखा जा सकता है। इससे मिठास अंदर तक पहुंचती है और पेठे का स्वाद अधिक संतुलित बनता है।
पेठे को सुखाने और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया
जब कद्दू के टुकड़े चाशनी अच्छी तरह सोख लें तो उन्हें सावधानी से बाहर निकालें। एक छलनी में रखकर अतिरिक्त चाशनी निकलने दें। इसके बाद एक साफ प्लेट या जालीदार ट्रे पर टुकड़ों को अलग-अलग दूरी पर रखें।
अब इन्हें पंखे के नीचे या स्वच्छ, हवादार स्थान पर कुछ घंटों तक सुखाएं। यदि मौसम अनुकूल हो तो इन्हें हल्की धूप में भी रखा जा सकता है। हालांकि बहुत तेज धूप में रखने से टुकड़ों की सतह अधिक सूख सकती है।
जब पेठे की बाहरी सतह हल्की सूखी और भीतर से नरम हो जाए तो समझिए कि यह तैयार है। यदि आपको सूखा पेठा पसंद है तो सुखाने का समय थोड़ा बढ़ा सकते हैं। वहीं रसदार पेठे के लिए इसे कम समय तक सुखाना पर्याप्त है।
पेठे के स्वाद में विविधता लाने के कुछ रोचक तरीके
समय के साथ पेठे की पारंपरिक रेसिपी में अनेक प्रयोग हुए हैं। आज इसे अलग-अलग रंगों और स्वादों में तैयार किया जाता है।
केसर पेठा: चाशनी में केसर के कुछ धागे भिगोकर डालने से पेठे को हल्का सुनहरा रंग और विशिष्ट सुगंध मिलती है।
अंगूरी पेठा: इसमें कद्दू को छोटे-छोटे गोल या चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है। इसका आकार छोटा और बनावट आकर्षक होती है।
गुलाब पेठा: तैयार चाशनी में थोड़ी मात्रा में खाद्य-उपयोग योग्य गुलाब जल मिलाया जाता है। इससे मिठाई में हल्की पुष्प सुगंध आती है।
नारियल पेठा: तैयार पेठे के टुकड़ों पर हल्का सूखा नारियल लपेटकर इसे अलग स्वाद दिया जा सकता है।
इलायची पेठा: चाशनी में इलायची पाउडर मिलाने से इसकी सुगंध और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं।
इन सभी प्रकारों में ध्यान रखना चाहिए कि सुगंध और रंग देने वाली सामग्री सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल की जाए, ताकि पेठे का मूल स्वाद बना रहे।
पेठे का पोषण मूल्य और स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियां
सफेद कद्दू में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसमें कुछ मात्रा में फाइबर, विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं। सामान्य रूप से सफेद कद्दू को हल्का और कम ऊर्जा वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। हालांकि जब इसी कद्दू को चीनी की चाशनी में पकाकर पेठा बनाया जाता है तो उसका पोषण स्वरूप बदल जाता है।
पेठे में चीनी की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना उचित है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को इसके सेवन में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इसी तरह वजन नियंत्रित करने वाले लोगों को भी इसकी मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।
यह समझना आवश्यक है कि किसी मिठाई का आधार फल या सब्जी होना उसे अपने आप स्वास्थ्यवर्धक नहीं बना देता। पेठे का आनंद स्वाद और सीमित सेवन के संतुलन के साथ लेना चाहिए।
पेठा बनाते समय किन गलतियों से बचना चाहिए?
घर पर पेठा बनाते समय कुछ सामान्य गलतियां इसकी गुणवत्ता खराब कर सकती हैं। सबसे पहली गलती है कद्दू को बहुत अधिक उबाल देना। ऐसा करने से टुकड़े अपना आकार खो देते हैं और चाशनी में डालते ही टूटने लगते हैं।
दूसरी गलती चाशनी को अत्यधिक गाढ़ा करना है। बहुत गाढ़ी चाशनी में पेठे के टुकड़े बाहर से अधिक मीठे हो सकते हैं, जबकि भीतर तक मिठास पहुंचने में कठिनाई होती है।
तीसरी गलती टुकड़ों को पर्याप्त समय तक चाशनी में न रखना है। पेठे में मिठास और पारदर्शीपन लाने के लिए पर्याप्त समय देना आवश्यक है। इसके अलावा गर्म टुकड़ों को एक-दूसरे के ऊपर रखने से उनकी बनावट खराब हो सकती है।
स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। बर्तन, चाकू, छलनी और सुखाने वाली ट्रे साफ होनी चाहिए। मिठाई को नमी और धूल से बचाकर रखना चाहिए।
तैयार पेठे को कितने दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं?
पेठे की भंडारण अवधि उसकी नमी, चीनी की मात्रा और तैयार करने की स्वच्छता पर निर्भर करती है। घर पर तैयार किए गए कम सूखे और रसदार पेठे को साफ, ढक्कन वाले बर्तन में रखकर फ्रिज में सुरक्षित रखना बेहतर है। इसे सामान्यतः कुछ दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए।
अधिक सूखे पेठे को भी पूरी तरह ठंडा होने के बाद साफ और वायुरुद्ध डिब्बे में रखें। उसमें नमी या चाशनी जमा होने पर खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए भंडारण से पहले टुकड़ों को पर्याप्त ठंडा और सतह से सूखा होना चाहिए।
यदि पेठे में असामान्य गंध, फफूंद, चिपचिपापन या रंग में बदलाव दिखाई दे तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
परंपरा और आधुनिक स्वाद का सुंदर संगम है पेठा
पेठा केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय पाक परंपरा और कारीगरी का उदाहरण भी है। साधारण सफेद कद्दू को एक आकर्षक, पारदर्शी और स्वादिष्ट मिठाई में बदलने की प्रक्रिया अपने आप में विशेष है। इसमें सही सामग्री के साथ धैर्य, तापमान का नियंत्रण और चाशनी तैयार करने की समझ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आगरा की पहचान के रूप में प्रसिद्ध पेठे ने समय के साथ अनेक नए रूप धारण किए हैं, लेकिन इसका पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों को आकर्षित करता है। त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और विशेष अवसरों पर इसकी उपस्थिति मिठास का एहसास कराती है।
घर पर पेठा बनाना भी एक रोचक पाक अनुभव हो सकता है। यदि सफेद कद्दू का चयन सही हो, टुकड़ों को संतुलित तरीके से पकाया जाए और चाशनी में पर्याप्त समय दिया जाए तो बाजार जैसा स्वाद काफी हद तक घर पर प्राप्त किया जा सकता है। इस तरह पारंपरिक भारतीय मिठाई का आनंद अपनी रसोई में भी लिया जा सकता है।






