
सौरिख/छिबरामऊ, कन्नौज। रबी की फसलों की बुवाई और आलू की खेती के महत्वपूर्ण दौर में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कन्नौज जनपद के सौरिख स्थित सहकारी समिति में डीएपी और यूरिया खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ जुट गई। खाद प्राप्त करने की होड़ के बीच किसानों के बीच कई बार कहासुनी और झड़प की स्थिति उत्पन्न हुई। मामला बढ़ता देख समिति कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस की निगरानी में कतार लगवाकर खाद का वितरण कराया गया।
सुबह से शाम तक इंतजार, फिर भी खाली हाथ लौटे किसान
सहकारी समिति पर खाद लेने पहुंचे किसानों का कहना है कि उन्हें सुबह से ही लाइन में लगना पड़ता है। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी खाद उपलब्ध नहीं हो पाती। वितरण के दौरान उपलब्ध खाद समाप्त हो जाने से अनेक किसानों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि समय पर खाद नहीं मिलने से आलू और गेहूं की फसलों की जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।
निजी दुकानों पर महंगी खाद मिलने का आरोप
किसानों ने निजी खाद विक्रेताओं पर निर्धारित कीमत से अधिक वसूली करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता है, जहां प्रति बोरी 200 से 300 रुपये तक अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और पहले से बढ़ते कृषि खर्च के बीच किसानों की आर्थिक परेशानी भी गहरा रही है।
जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
गौरतलब है कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में भी कन्नौज जनपद की सहकारी समितियों पर खाद वितरण प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। हिन्दुस्तान और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार, सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जिले की कई समितियों पर वितरण व्यवस्था बाधित हुई थी। वहीं, प्रशासन की ओर से खाद का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई थी। इससे खाद की उपलब्धता के साथ-साथ उसके समयबद्ध वितरण की चुनौती भी सामने आती है।
किसानों ने सरकार और प्रशासन से लगाई गुहार
सौरिख क्षेत्र के किसानों ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि सहकारी समितियों पर डीएपी और यूरिया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही निजी खाद विक्रेताओं की बिक्री और निर्धारित मूल्य की नियमित जांच हो, ताकि किसानों को मजबूरी में अधिक कीमत न चुकानी पड़े।किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह समय और संसाधनों पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि बुवाई और फसल की जरूरत के समय खाद उपलब्ध नहीं होगी तो इसका असर सीधे उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।अब सवाल यह है कि जब किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना कृषि व्यवस्था की प्राथमिकता है, तो उन्हें अपनी ही जरूरत की खाद के लिए घंटों कतार में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है?






