अटल पेंशन योजना; किसे मिल सकता है हर महीने 5,000 रुपये पेंशन का लाभ? जानें पात्रता, उम्र की सीमा, निवेश और आवेदन की पूरी प्रक्रिया

संवाद 24 डेस्क। बुढ़ापे में नियमित आमदनी बनी रहे और आर्थिक जरूरतों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर न रहना पड़े, यह हर व्यक्ति की बड़ी चिंता होती है। खासकर उन लोगों के लिए यह चिंता अधिक होती है, जो निजी क्षेत्र में काम करते हैं, छोटे कारोबार से जुड़े हैं या असंगठित क्षेत्र में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे लोगों को नौकरी के दौरान भविष्य निधि या सेवानिवृत्ति के बाद नियमित पेंशन जैसी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पात्र व्यक्ति नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम जमा करके 60 वर्ष की उम्र के बाद हर महीने निश्चित पेंशन प्राप्त कर सकता है।
अटल पेंशन योजना में पेंशन की राशि 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रतिमाह तक निर्धारित की गई है। हालांकि, इस योजना का लाभ हर व्यक्ति नहीं उठा सकता। इसके लिए उम्र, आयकरदाता होने की स्थिति और बैंक खाते से संबंधित कुछ जरूरी शर्तें निर्धारित हैं। ऐसे में यदि आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं तो पहले यह जानना जरूरी है कि कौन इसके लिए पात्र है, किसे इसका लाभ नहीं मिल सकता और 5,000 रुपये मासिक पेंशन पाने के लिए कितना अंशदान करना पड़ता है।

क्या है अटल पेंशन योजना और कब हुई थी इसकी शुरुआत?
अटल पेंशन योजना केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पेंशन योजना है। इसकी शुरुआत 1 जून 2015 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के ऐसे नागरिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है, जिनके पास सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आमदनी का कोई निश्चित साधन नहीं होता। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों, घरेलू कामगारों, छोटे दुकानदारों, किसानों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और निम्न आय वर्ग के नागरिकों को ध्यान में रखकर इस योजना को तैयार किया गया है।
इस योजना का संचालन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी पीएफआरडीए के प्रशासनिक ढांचे के तहत किया जाता है। इसमें खाताधारक को अपनी उम्र और चुनी गई पेंशन राशि के अनुसार नियमित अंशदान करना होता है। यह अंशदान 60 वर्ष की उम्र तक जमा किया जाता है। इसके बाद खाताधारक को जीवनभर निर्धारित न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल खाताधारक ही नहीं, बल्कि उसकी मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को भी पेंशन का लाभ मिलता है। जीवनसाथी की मृत्यु के बाद निर्धारित पेंशन निधि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है।

अटल पेंशन योजना का लाभ किसे मिल सकता है? जानिए पात्रता की शर्तें
अटल पेंशन योजना में शामिल होने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं। इन शर्तों को पूरा करने वाला भारतीय नागरिक इस योजना में अपना खाता खुलवा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त आवेदक की उम्र से संबंधित है। योजना में शामिल होने के लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष होनी चाहिए। यानी 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुका व्यक्ति इसमें आवेदन कर सकता है, लेकिन 40 वर्ष पूरे होने के बाद नया खाता खुलवाने की अनुमति नहीं है।
दूसरी महत्वपूर्ण शर्त बैंक खाते से संबंधित है। आवेदक के पास किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी है। इसी खाते के माध्यम से योजना का अंशदान जमा किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति का बैंक में बचत खाता नहीं है तो वह पहले बैंक या डाकघर में खाता खुलवा सकता है। इसके बाद अटल पेंशन योजना के लिए आवेदन कर सकता है।
तीसरी शर्त आयकरदाता होने से जुड़ी है। 1 अक्टूबर 2022 से लागू नियम के अनुसार ऐसा भारतीय नागरिक जो आवेदन की तारीख पर आयकरदाता है या पहले कभी आयकरदाता रहा है, वह नया अटल पेंशन योजना खाता नहीं खुलवा सकता। यह प्रतिबंध नए आवेदकों पर लागू होता है। हालांकि, जिन लोगों ने 30 सितंबर 2022 तक इस योजना में खाता खुलवा लिया था, वे केवल आयकरदाता होने के कारण योजना से बाहर नहीं होते। वे निर्धारित नियमों के अनुसार अपना अंशदान जारी रख सकते हैं।
इसके अलावा एक व्यक्ति अपने नाम पर अटल पेंशन योजना का केवल एक ही खाता खुलवा सकता है। एक से अधिक खाते खोलने की अनुमति नहीं है। विवाहित व्यक्ति के मामले में जीवनसाथी का विवरण और नामांकन से संबंधित जानकारी देना भी जरूरी होता है। अविवाहित व्यक्ति अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को नामित कर सकता है। विवाह होने के बाद जीवनसाथी का विवरण अपडेट कराना चाहिए।

किन लोगों को नहीं मिलेगा अटल पेंशन योजना का लाभ?
अटल पेंशन योजना के नियमों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति इसके लिए पात्र नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की उम्र 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है तो वह नया खाता नहीं खुलवा सकता। इसी तरह 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए भी इस योजना में खाता खोलने का प्रावधान नहीं है।
इसके अलावा जो व्यक्ति आवेदन की तारीख पर आयकर देता है या पहले आयकरदाता रह चुका है, वह 1 अक्टूबर 2022 के बाद नया खाता नहीं खुलवा सकता। यहां यह समझना जरूरी है कि केवल अधिक आमदनी होना और आयकरदाता होना एक ही बात नहीं है। पात्रता का निर्धारण संबंधित आयकर नियमों के तहत व्यक्ति की आयकरदाता स्थिति से होता है।
यदि कोई व्यक्ति पहले से अटल पेंशन योजना का खाताधारक है तो केवल बाद में आयकरदाता बन जाने से उसका पुराना खाता स्वतः बंद नहीं होता। 30 सितंबर 2022 तक योजना से जुड़ चुके खाताधारकों को निर्धारित शर्तों के अनुसार योगदान जारी रखने की अनुमति है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता की पुष्टि बैंक या डाकघर से जरूर कर लेनी चाहिए।

60 वर्ष की उम्र के बाद कितनी मिलेगी पेंशन?
अटल पेंशन योजना में खाताधारक को अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार पांच पेंशन विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होता है। इसमें 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन इस प्रकार निर्धारित है।1,000 रुपये प्रतिमाह। 2,000 रुपये प्रतिमाह। 3,000 रुपये प्रतिमाह। 4,000 रुपये प्रतिमाह। 5,000 रुपये प्रतिमाह। खाताधारक जिस पेंशन विकल्प का चयन करता है, उसी के अनुसार उसके खाते से नियमित अंशदान लिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 5,000 रुपये मासिक पेंशन का विकल्प चुनता है तो उसे अपनी उम्र के हिसाब से निर्धारित रकम जमा करनी होगी। यह पेंशन 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद जीवनभर मिलती है। योजना के तहत सरकार निर्धारित न्यूनतम पेंशन की गारंटी देती है।

5,000 रुपये पेंशन के लिए कितना जमा करना होगा?
इस योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कम उम्र में शामिल होने वाले व्यक्ति को अपेक्षाकृत कम अंशदान करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ अंशदान की रकम भी बढ़ती जाती है। इसकी वजह यह है कि कम उम्र में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति के पास 60 वर्ष की उम्र तक योगदान करने के लिए अधिक समय होता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष की उम्र में अटल पेंशन योजना से जुड़ता है और 5,000 रुपये मासिक पेंशन का विकल्प चुनता है तो उसे प्रतिमाह 210 रुपये जमा करने होते हैं। वहीं 30 वर्ष की उम्र में इसी पेंशन विकल्प के साथ जुड़ने वाले व्यक्ति को प्रतिमाह 577 रुपये का अंशदान करना होता है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि योजना में जल्दी शामिल होने से नियमित योगदान का आर्थिक बोझ अपेक्षाकृत कम रहता है। हालांकि, अंशदान की वास्तविक रकम चयनित पेंशन विकल्प और प्रवेश की उम्र के अनुसार निर्धारित होती है। आवेदन करते समय बैंक से आधिकारिक अंशदान तालिका देखकर ही अपनी किस्त तय करनी चाहिए।

कितने साल तक करना होगा अंशदान?
अटल पेंशन योजना में शामिल होने के बाद खाताधारक को 60 वर्ष की उम्र तक नियमित अंशदान करना होता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष की उम्र में इस योजना से जुड़ता है तो उसे लगभग 42 वर्षों तक योगदान करना होगा। वहीं 30 वर्ष की उम्र में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को लगभग 30 वर्षों तक अंशदान करना पड़ेगा।
इस योजना में अंशदान मासिक, तिमाही या छमाही आधार पर जमा करने का विकल्प उपलब्ध है। खाताधारक अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान की अवधि चुन सकता है। सामान्य तौर पर निर्धारित तारीख पर बैंक खाते से रकम स्वतः काट ली जाती है। इसलिए आवेदन करते समय खाते में पर्याप्त राशि रखना जरूरी है, ताकि किस्त जमा होने में परेशानी न आए।
इस योजना को अल्पकालिक निवेश के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसका उद्देश्य लंबी अवधि में नियमित योगदान के माध्यम से वृद्धावस्था के लिए पेंशन सुनिश्चित करना है। इसलिए इसमें शामिल होने से पहले व्यक्ति को अपनी आमदनी, घरेलू खर्च और भविष्य की आर्थिक जरूरतों का आकलन कर लेना चाहिए।

खाताधारक की मृत्यु होने पर किसे मिलेगा पेंशन का लाभ?
अटल पेंशन योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका लाभ खाताधारक की मृत्यु के बाद भी परिवार तक पहुंच सकता है। यदि खाताधारक 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद पेंशन प्राप्त कर रहा है और उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवनसाथी को उतनी ही मासिक पेंशन जीवनभर मिलती रहेगी, जितनी पेंशन खाताधारक को मिल रही थी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को 60 वर्ष की उम्र के बाद 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी और उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवनसाथी को भी 5,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। जीवनसाथी की मृत्यु के बाद योजना में निर्धारित पेंशन निधि नामित व्यक्ति को वापस कर दी जाती है।
यदि खाताधारक की मृत्यु 60 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है तो उसके जीवनसाथी के पास दो विकल्प होते हैं। पहला, वह मृतक के खाते में शेष अवधि तक अंशदान जारी रख सकता है और मूल खाताधारक की 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर निर्धारित पेंशन प्राप्त कर सकता है। दूसरा, वह योजना में उस समय तक जमा हुई पेंशन निधि प्राप्त कर सकता है। अविवाहित खाताधारक की मृत्यु होने पर निर्धारित राशि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है।

अटल पेंशन योजना में खाता कैसे खुलवाएं? जानें आवेदन की प्रक्रिया
अटल पेंशन योजना में खाता खुलवाने की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति अपने उस बैंक की शाखा में जा सकता है, जहां उसका बचत खाता है। इसके अलावा डाकघर में बचत खाता रखने वाले व्यक्ति भी वहां से योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करने के लिए सबसे पहले बैंक या डाकघर से अटल पेंशन योजना का पंजीकरण फॉर्म प्राप्त करना होगा। इस फॉर्म में आवेदक को अपना नाम, जन्मतिथि, पता, मोबाइल नंबर, बचत खाते का विवरण और नामित व्यक्ति की जानकारी भरनी होगी। इसके साथ ही अपनी पसंद की मासिक पेंशन राशि का चयन करना होगा।
आवेदन के दौरान बैंक खाते से अंशदान की रकम स्वतः काटने की अनुमति भी देनी होती है। बैंक संबंधित विवरणों का सत्यापन करने के बाद आवेदन प्रक्रिया पूरी करता है। योजना में आधार संख्या देना भी उपयोगी है, क्योंकि इससे पहचान और खाते से जुड़ी जानकारी के सत्यापन में मदद मिलती है। हालांकि, आधिकारिक पात्रता शर्तों में बचत खाते की उपलब्धता अनिवार्य है। इच्छुक व्यक्ति ई-अटल पेंशन योजना की सुविधा के माध्यम से ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।

किस्त जमा नहीं हुई तो क्या होगा?
अटल पेंशन योजना में नियमित अंशदान करना जरूरी है। यदि किसी महीने बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण किस्त नहीं कट पाती है तो खाताधारक का अंशदान बकाया हो सकता है। ऐसी स्थिति में खाते पर निर्धारित विलंब शुल्क या अतिरिक्त शुल्क लागू हो सकता है।
लगातार किस्त जमा नहीं होने पर खाते को निष्क्रिय करने या बंद करने जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए खाताधारक को अपने बैंक खाते में पर्याप्त राशि रखनी चाहिए और समय-समय पर अंशदान की स्थिति की जांच करते रहना चाहिए।
यदि किसी कारण से किस्त नहीं कट पाई है तो संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करके बकाया अंशदान और लागू शुल्क की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। समय रहते भुगतान करने से खाते को नियमित बनाए रखने में मदद मिलती है।

क्या 60 वर्ष से पहले योजना से बाहर निकल सकते हैं?
अटल पेंशन योजना में 60 वर्ष की उम्र से पहले स्वेच्छा से बाहर निकलने की अनुमति है। हालांकि, ऐसा करने पर खाताधारक को योजना के सभी निर्धारित पेंशन लाभ नहीं मिलते। स्वैच्छिक निकास की स्थिति में उसके स्वयं के जमा किए गए अंशदान और उस पर अर्जित वास्तविक शुद्ध आय वापस की जाती है। इसमें निर्धारित खाता रखरखाव शुल्क की कटौती की जाती है।
जिन पुराने खाताधारकों को शुरुआती सरकारी सह-अंशदान का लाभ मिला था, उनके मामले में सरकारी सह-अंशदान और उस पर अर्जित आय की वापसी के अलग नियम हैं। इसलिए समय से पहले योजना छोड़ने का निर्णय लेने से पहले बैंक से पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
इस योजना का वास्तविक उद्देश्य 60 वर्ष की उम्र तक नियमित अंशदान जारी रखकर जीवनभर पेंशन का लाभ प्राप्त करना है। इसलिए केवल अस्थायी आर्थिक परेशानी के कारण जल्दबाजी में खाता बंद करने के बजाय उपलब्ध विकल्पों को समझना बेहतर होता है।

क्या अटल पेंशन योजना में कर छूट भी मिलती है?
अटल पेंशन योजना से जुड़े लोगों के लिए कर लाभ का विषय भी महत्वपूर्ण है। इस योजना में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से संबंधित अधिसूचना के तहत निर्धारित कर लाभ लागू हो सकते हैं। हालांकि, कर छूट का वास्तविक लाभ व्यक्ति की कर व्यवस्था और लागू आयकर प्रावधानों पर निर्भर करता है।
विशेष रूप से नई कर व्यवस्था अपनाने वाले लोगों को संबंधित प्रावधानों की जांच करनी चाहिए। केवल योजना में खाता खुलवा लेने से प्रत्येक खाताधारक को समान कर छूट मिलना जरूरी नहीं है। इसलिए कर लाभ के बारे में निर्णय लेने से पहले आयकर नियमों या किसी कर विशेषज्ञ से जानकारी लेना उचित होगा।

आवेदन करने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
अटल पेंशन योजना में शामिल होने से पहले कुछ बातों को समझना जरूरी है। सबसे पहले अपनी उम्र और आयकरदाता की स्थिति की जांच करें। इसके बाद तय करें कि भविष्य में आपको कितनी मासिक पेंशन की जरूरत होगी। पेंशन का विकल्प चुनते समय अपनी मौजूदा आमदनी और नियमित अंशदान करने की क्षमता को ध्यान में रखें।
यह भी ध्यान रखें कि 5,000 रुपये की पेंशन पाने के लिए 5,000 रुपये एकमुश्त जमा नहीं करने होते, बल्कि उम्र के अनुसार निर्धारित अंशदान नियमित रूप से करना होता है। योजना में मिलने वाली पेंशन 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद शुरू होती है। इसलिए इसे तत्काल आर्थिक लाभ देने वाली योजना समझना सही नहीं होगा।
खाताधारक को अपने नामित व्यक्ति का विवरण भी सही रखना चाहिए। विवाह होने या पारिवारिक परिस्थितियों में बदलाव आने पर बैंक में आवश्यक जानकारी अपडेट करानी चाहिए। इसके साथ ही बैंक खाते में पर्याप्त राशि बनाए रखना जरूरी है, ताकि निर्धारित अंशदान समय पर जमा हो सके।

क्या अटल पेंशन योजना बुढ़ापे के लिए अच्छा विकल्प है?
अटल पेंशन योजना उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनके पास सेवानिवृत्ति के बाद नियमित पेंशन का कोई दूसरा साधन नहीं है। विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और छोटे कारोबारियों के लिए यह योजना वृद्धावस्था में एक निश्चित मासिक आमदनी का आधार तैयार कर सकती है।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि योजना के तहत अधिकतम निर्धारित पेंशन 5,000 रुपये प्रतिमाह है। भविष्य में महंगाई बढ़ने के साथ इस रकम की वास्तविक क्रय शक्ति कम हो सकती है। इसलिए जिन लोगों की आर्थिक क्षमता बेहतर है, उन्हें अपने भविष्य की जरूरतों के अनुसार अन्य बचत और सेवानिवृत्ति योजनाओं पर भी विचार करना चाहिए।
कुल मिलाकर अटल पेंशन योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कम उम्र से छोटी-छोटी रकम जमा करके 60 वर्ष के बाद नियमित पेंशन प्राप्त करने की व्यवस्था है। साथ ही खाताधारक की मृत्यु के बाद जीवनसाथी को पेंशन और उसके बाद नामित व्यक्ति को निर्धारित पेंशन निधि मिलने का प्रावधान इसे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से भी जोड़ता है। लेकिन योजना से जुड़ने से पहले पात्रता, अंशदान और निकासी के नियमों को अच्छी तरह समझना जरूरी है। सही उम्र में योजना से जुड़कर नियमित योगदान करने वाले पात्र नागरिक अपने बुढ़ापे के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक आधार तैयार कर सकते हैं।

Geeta Singh
Geeta Singh

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