1 नवंबर से बदल गए कई बड़े नियम: महंगा हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर, टोल टैक्स में राहत, म्यूचुअल फंड और जीएसटी के नए नियम भी लागू

संवाद 24 डेस्क। नवंबर महीने की शुरुआत आम लोगों, कारोबारियों, वाहन चालकों, निवेशकों और पेंशनधारकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है। 1 नवंबर 2026 से देश में रोजमर्रा के खर्च और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई नए नियम प्रभावी हो गए हैं। एक तरफ जहां व्यावसायिक उपयोग वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स देने वाले कुछ वाहन मालिकों को रियायती वार्षिक पास की सुविधा मिलने जा रही है। म्यूचुअल फंड निवेश के नियमों में भी पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बदलाव किया गया है।
इसके अलावा वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था में व्यापारियों को राहत देने वाले प्रावधान लागू हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के क्रेडिट कार्ड से जुड़े शुल्कों में संशोधन किया गया है। पेंशनधारकों के लिए जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वहीं मोबाइल फोन पर कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम दिखाने की व्यवस्था और विमान ईंधन की कीमतों में बदलाव भी इस महीने की शुरुआत के महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। इन सभी बदलावों का असर अलग-अलग वर्गों की जेब और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि 1 नवंबर से क्या-क्या बदल गया है और आम उपभोक्ताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
हर महीने की पहली तारीख को पेट्रोलियम कंपनियां रसोई गैस की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत 1 नवंबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबा, मिठाई की दुकानों, खानपान सेवाओं और छोटे-बड़े खाद्य कारोबारियों पर पड़ सकता है।
उपलब्ध शहरवार कीमतों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 2,810 रुपये से बढ़कर 2,820 रुपये हो गई है। मुंबई में इसकी कीमत 2,764.50 रुपये से बढ़कर 2,775 रुपये और कोलकाता में 2,954 रुपये से बढ़कर 2,971 रुपये हो गई है। चेन्नई में भी सिलेंडर की कीमत में वृद्धि दर्ज की गई है और नई कीमत 2,994.50 रुपये हो गई है। अलग-अलग शहरों में बढ़ोतरी की राशि अलग है।
हालांकि घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान्य गैस सिलेंडर इस मूल्यवृद्धि से प्रभावित नहीं हुआ है।
व्यावसायिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल सिलेंडर खरीदने वाले कारोबारियों तक सीमित नहीं रह सकता। होटल और रेस्तरां संचालक यदि अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाते हैं, तो इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है। खासकर त्योहारों के मौसम में बाहर खाना खाने और मिठाइयां खरीदने का खर्च बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

टोल प्लाजा के आसपास रहने वालों को मिलेगा सस्ता वार्षिक पास
राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित आवागमन करने वाले वाहन मालिकों के लिए 1 नवंबर से एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की गई है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र निजी वाहन मालिकों के लिए रियायती स्थानीय पास की व्यवस्था की है। इस सुविधा का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है, जिन्हें अपने घर, कार्यालय, बाजार या अन्य जरूरी कामों के लिए बार-बार एक ही टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है।
नए प्रावधान के तहत पात्र वाहन मालिक सालाना 1,500 रुपये या 3,000 रुपये का भुगतान करके संबंधित टोल प्लाजा के लिए स्थानीय पास प्राप्त कर सकते हैं। यदि टोल प्लाजा नगर पालिका या स्थानीय नगर क्षेत्र की सीमा से बाहर स्थित है, तो वार्षिक शुल्क 1,500 रुपये होगा। वहीं नगर पालिका या स्थानीय नगर क्षेत्र की सीमा के भीतर स्थित टोल प्लाजा के लिए यह शुल्क 3,000 रुपये निर्धारित किया गया है।
इस सुविधा का लाभ लेने के लिए वाहन मालिक का संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहना जरूरी है। वाहन पर वैध और सक्रिय फास्टैग होना चाहिए तथा उसका पंजीकरण गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए होना चाहिए। यह पास केवल उसी टोल प्लाजा के लिए मान्य होगा, जिसके लिए इसे जारी किया गया है। इससे दूसरे टोल प्लाजा पर मुफ्त या रियायती आवागमन का अधिकार नहीं मिलेगा।
हालांकि इस सुविधा की कुछ शर्तें भी हैं। बंद उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर यह पास उपलब्ध नहीं होगा। इसके अलावा यदि वाहन चालकों के उपयोग के लिए सर्विस रोड या कोई वैकल्पिक सड़क उपलब्ध है, तो वे इस रियायती पास के पात्र नहीं होंगे।
यहां यह समझना जरूरी है कि यह पहले से उपलब्ध राष्ट्रीय राजमार्ग वार्षिक पास से अलग सुविधा है। स्थानीय पास खास तौर पर टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले पात्र लोगों के लिए है। इससे नियमित आवागमन करने वाले लोगों का खर्च कम हो सकता है।

म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट प्लान होगा पहला विकल्प, निवेशकों को मिलेगा खर्च समझने का मौका
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए भी 1 नवंबर से महत्वपूर्ण बदलाव लागू हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के डिजिटल मंचों पर डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट विकल्प बनाने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य निवेशकों को निवेश की लागत के बारे में अधिक जागरूक बनाना और योजनाओं के चयन में पारदर्शिता बढ़ाना है।
अब परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों की वेबसाइट और डिजिटल मंचों पर निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान को प्राथमिक विकल्प के रूप में दिखाया जाएगा। यदि कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनना चाहता है, तो उसे पहले यह जानकारी दी जाएगी कि इस योजना का व्यय अनुपात डायरेक्ट प्लान की तुलना में अधिक है।
दरअसल, म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट और रेगुलर योजनाओं में निवेश का पैसा एक ही योजना के तहत लगाया जा सकता है, लेकिन दोनों की लागत अलग होती है। डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी के माध्यम से निवेश करता है। इसमें वितरक का कमीशन शामिल नहीं होता, इसलिए इसका व्यय अनुपात सामान्यतः कम रहता है।
इसके विपरीत रेगुलर प्लान में निवेशक किसी वितरक, एजेंट या सलाहकार के माध्यम से निवेश करता है। इस व्यवस्था में वितरक का कमीशन भी योजना के खर्च में शामिल होता है। इसी कारण रेगुलर प्लान का व्यय अनुपात अधिक हो सकता है।
इस बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि रेगुलर प्लान बंद हो जाएंगे या निवेशकों को उनमें निवेश करने से रोका जाएगा। निवेशक अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार दोनों में से किसी एक का चयन कर सकेंगे। जिन लोगों को निवेश संबंधी मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, उनके लिए रेगुलर प्लान उपयोगी हो सकता है। वहीं निवेश की समझ रखने वाले लोग कम लागत के कारण डायरेक्ट प्लान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
निवेशकों को केवल कम खर्च देखकर योजना का चुनाव नहीं करना चाहिए। योजना का पिछला प्रदर्शन, जोखिम, निवेश का उद्देश्य, अवधि और अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

जीएसटी के नए नियम लागू, कारोबारियों को रिफंड और छूट में राहत
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था में भी 1 नवंबर से कई महत्वपूर्ण संशोधन लागू हो गए हैं। इनका उद्देश्य व्यापारियों की कार्यप्रणाली को आसान बनाना, कर संबंधी विवाद कम करना और कारोबार में फंसी पूंजी को निकालने में सहायता करना है।
नए प्रावधानों के तहत बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट और क्रेडिट नोट से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है। अब निर्धारित शर्तें पूरी होने पर बिक्री के बाद दी गई छूट को कर योग्य मूल्य से घटाने की सुविधा मिल सकती है। इसके लिए विक्रेता को संबंधित क्रेडिट नोट जारी करना होगा और खरीदार को उस छूट से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट का आवश्यक समायोजन करना होगा।
इसका लाभ उन कारोबारियों को मिल सकता है, जो अपने ग्राहकों को बिक्री के बाद विशेष छूट, प्रोत्साहन या अन्य व्यावसायिक रियायत देते हैं। पहले ऐसी छूटों के कर संबंधी समायोजन में कई बार दस्तावेजी और प्रक्रियागत जटिलताएं सामने आती थीं।
इसके अतिरिक्त उलटी शुल्क संरचना के मामलों में पात्र रिफंड दावों के लिए 90 प्रतिशत अनंतिम रिफंड की सुविधा का विस्तार किया गया है। उलटी शुल्क संरचना की स्थिति तब बनती है, जब किसी व्यवसाय के लिए कच्चे माल या इनपुट पर कर की दर तैयार उत्पाद की तुलना में अधिक होती है। ऐसी स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता रहता है और कारोबारी की पूंजी फंस सकती है।
निर्यातकों के लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। कर का भुगतान करके वस्तुओं का निर्यात करने पर एक हजार रुपये की न्यूनतम रिफंड सीमा समाप्त कर दी गई है। इससे छोटी राशि के पात्र रिफंड दावों को भी राहत मिल सकती है।
इन बदलावों से विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारियों, निर्यातकों तथा विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि रिफंड और कर समायोजन का लाभ निर्धारित कानूनी शर्तों और आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने पर ही मिलेगा।

पीएनबी क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ सकता है महंगा, कई शुल्कों में संशोधन
पंजाब नेशनल बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए भी नवंबर की पहली तारीख से नए शुल्क लागू हो गए हैं। बैंक ने क्रेडिट कार्ड से जुड़ी कई सेवाओं के शुल्कों में संशोधन किया है। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो कार्ड से खरीदारी के अलावा उपयोगिता बिलों का भुगतान, नकदी निकासी और अन्य वित्तीय लेनदेन करते हैं।
नए शुल्क ढांचे के तहत पात्र वीजा और रुपे क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट भुनाने के प्रत्येक अनुरोध के लिए 99 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। पहले इस सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता था।
उपयोगिता बिलों के भुगतान को लेकर भी नया प्रावधान किया गया है। यदि किसी बिलिंग चक्र में क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बिजली, पानी, गैस और अन्य उपयोगिता सेवाओं के कुल भुगतान की राशि 50,000 रुपये से अधिक होती है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार एक प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क प्रति लेनदेन अधिकतम 2,000 रुपये तक सीमित रहेगा। इसके अतिरिक्त लागू कर भी देना होगा।
बैंक ने नकदी निकासी, देर से भुगतान, चेक वापसी और स्वचालित भुगतान निर्देश विफल होने से संबंधित शुल्कों में भी संशोधन किया है। तीन महीने से अधिक पुराना डुप्लीकेट विवरण मांगने पर भी शुल्क देना पड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक विवरण के लिए यह शुल्क लागू नहीं होगा।
इस बदलाव के बाद क्रेडिट कार्ड धारकों को सलाह है कि वे अपने कार्ड की संशोधित शुल्क सूची जरूर देखें। विशेष रूप से अधिक राशि के उपयोगिता बिलों का भुगतान करने वाले ग्राहकों को बिलिंग चक्र के दौरान अपने कुल खर्च पर ध्यान देना चाहिए।

पेंशनधारकों के लिए जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया शुरू
सरकारी पेंशन प्राप्त करने वाले लाखों लोगों के लिए नवंबर का महीना महत्वपूर्ण होता है। पेंशन जारी रखने के लिए जीवन प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी है। 1 नवंबर 2026 से 80 वर्ष से कम आयु के पेंशनधारकों के लिए वार्षिक जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पेंशनधारक 30 नवंबर तक अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं। वहीं 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनधारकों को यह सुविधा 1 अक्टूबर से ही उपलब्ध है।
अब पेंशनधारकों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए हर बार बैंक जाने की आवश्यकता नहीं है। वे जीवन प्रमाण मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से चेहरे की पहचान यानी चेहरा प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करके डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार कर सकते हैं।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पेंशनधारक के पास उपयुक्त स्मार्टफोन और आवश्यक पहचान संबंधी जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा बैंक शाखा, डिजिटल जीवन प्रमाण केंद्र और निर्धारित बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से भी प्रमाणपत्र जमा किया जा सकता है।
जीवन प्रमाणपत्र जमा करने में देरी होने पर पेंशन भुगतान प्रभावित हो सकता है। इसलिए पेंशनधारकों को अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों को अपने परिवार के सदस्यों की सहायता लेकर समय रहते प्रमाणपत्र जमा करना चाहिए।

मोबाइल पर दिखेगा अनजान कॉल करने वाले का नाम, स्पैम कॉल पर लग सकती है लगाम
मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए 1 नवंबर से एक बड़ा बदलाव लागू किया गया है। दूरसंचार विभाग ने सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के तहत आने वाली कॉल के समय मोबाइल स्क्रीन पर फोन नंबर के साथ कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम भी दिखाई देगा।
अभी तक किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर केवल नंबर दिखाई देता था। नाम जानने के लिए कई लोग अलग-अलग कॉलर पहचानने वाले अनुप्रयोगों का इस्तेमाल करते थे। नई व्यवस्था में दूरसंचार कंपनियों के ग्राहक अभिलेखों में दर्ज नाम के आधार पर पहचान दिखाई जाएगी।
यदि किसी व्यक्ति का नंबर मोबाइल में पहले से सुरक्षित है, तो स्क्रीन पर संपर्क सूची में दर्ज नाम दिखाई देगा। वहीं किसी अनजान घरेलू नंबर से कॉल आने पर दूरसंचार कंपनी के ग्राहक अभिलेख में दर्ज नाम प्रदर्शित किया जाएगा। विदेश से आने वाली कॉल के लिए अंतरराष्ट्रीय कॉल का संकेत दिखाया जा सकता है।
इस सुविधा को लागू करने के लिए मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अलग से आवेदन करने या कोई नया अनुप्रयोग डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। शुरुआत में यह व्यवस्था 4जी और इससे आगे की तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर लागू की गई है। 2जी, 3जी और लैंडलाइन नेटवर्क के लिए इसे लागू करने पर अलग से विचार किया जाएगा।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य फर्जी कॉल, धोखाधड़ी और अनचाही व्यावसायिक कॉल की पहचान को आसान बनाना है। हालांकि केवल नाम दिखाई देने से यह गारंटी नहीं मिलती कि कॉल करने वाला व्यक्ति भरोसेमंद ही है। इसलिए मोबाइल उपयोगकर्ताओं को किसी भी अनजान कॉल पर बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय विवरण साझा नहीं करने चाहिए।
गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए जिन ग्राहकों ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन प्रतिबंध की सुविधा ली है, उनके नाम प्रदर्शित नहीं किए जाएंगे। कारोबार और सामूहिक कनेक्शन वाले ग्राहक निर्धारित सत्यापन के बाद अपने पंजीकृत व्यापार चिह्न या व्यापारिक नाम को भी प्रदर्शित कराने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।

हवाई यात्रा भी हो सकती है महंगी, विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी
नवंबर की शुरुआत विमानन क्षेत्र के लिए भी राहत भरी नहीं रही है। विमानन टरबाइन ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। यह वही ईंधन है, जिसका इस्तेमाल विमानों को उड़ाने के लिए किया जाता है।
नई दरों के अनुसार एटीएफ की कीमत 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 138.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है। कई कंपनियों के लिए यह खर्च कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत तक हो सकता है।
ऐसे में विमान ईंधन महंगा होने से विमानन कंपनियों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि इसका असर तुरंत हवाई टिकटों पर कितना पड़ेगा, यह संबंधित विमानन कंपनियों की व्यावसायिक नीतियों, प्रतिस्पर्धा और अन्य परिचालन खर्चों पर निर्भर करेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव विमान ईंधन की दरों को प्रभावित करता है। ऐसे में यात्रियों को आने वाले दिनों में हवाई किराये पर भी नजर रखनी चाहिए।

आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?
1 नवंबर से लागू हुए इन बदलावों का प्रभाव सभी लोगों पर एक जैसा नहीं होगा। घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगा होने से खाद्य कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। इसका अप्रत्यक्ष असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास रहने वाले पात्र निजी वाहन मालिकों को स्थानीय टोल पास से आर्थिक राहत मिल सकती है। वहीं म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को योजना चुनते समय उसकी वास्तविक लागत समझने का अवसर मिलेगा। जीएसटी के नए प्रावधान कारोबारियों और निर्यातकों के लिए राहत लेकर आए हैं।
दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों को बैंक के नए शुल्कों का ध्यान रखना होगा। पेंशनधारकों को नवंबर के भीतर जीवन प्रमाणपत्र जमा करना होगा। मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान करना आसान हो सकता है, जबकि विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें विमानन क्षेत्र के खर्च पर दबाव डाल सकती हैं।

नवंबर में इन बदलावों को नजरअंदाज न करें
कुल मिलाकर 1 नवंबर 2026 से लागू हुए बदलाव देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इनमें कुछ प्रावधान उपभोक्ताओं और कारोबारियों को राहत देते हैं, जबकि कुछ के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
आम लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपनी जरूरत के अनुसार इन नियमों की जानकारी रखें। वाहन मालिक स्थानीय टोल पास की पात्रता जांचें, निवेशक म्यूचुअल फंड की लागत और जोखिम को समझें, क्रेडिट कार्ड धारक संशोधित शुल्क सूची देखें और पेंशनधारक समय पर जीवन प्रमाणपत्र जमा करें।
इन बदलावों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा, जब लोग इनके नियमों और शर्तों को समझकर सही समय पर आवश्यक कदम उठाएंगे। नवंबर की शुरुआत में लागू हुए ये नए प्रावधान आने वाले समय में उपभोक्ता खर्च, कारोबार, निवेश और डिजिटल सेवाओं की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

Geeta Singh
Geeta Singh

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