
संवाद 24 डेस्क। भारतीय खानपान की विशेषता यह है कि यहाँ साधारण सामग्री से भी स्वादिष्ट, सुगंधित और संतोषजनक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। उपमा ऐसा ही लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे नाश्ते से लेकर हल्के भोजन तक कई अवसरों पर पसंद किया जाता है। सामान्यतः सूजी से बनने वाले उपमा के अतिरिक्त, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अनाज तथा अन्य सामग्रियों से भी इसकी विविध किस्में बनाई जाती हैं। समक उपमा भी इसी तरह का एक विकल्प है, जिसे विशेष रूप से व्रत के दिनों में पसंद किया जा सकता है।
समक, जिसे सामक के चावल, व्रत के चावल या अंग्रेजी में Barnyard Millet कहा जाता है, वास्तव में धान से प्राप्त होने वाले सामान्य चावल नहीं हैं, बल्कि एक प्रकार के छोटे अनाज के दाने हैं। इनका उपयोग भारतीय भोजन में खिचड़ी, पुलाव, खीर और उपमा जैसे व्यंजन तैयार करने के लिए किया जाता है। समक का हल्का स्वाद और दानों की बनावट इसे विभिन्न मसालों, सब्जियों तथा मूंगफली के साथ पकाने के लिए उपयुक्त बनाती है।
समक उपमा की खासियत यह है कि इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है। यदि इसे सही मात्रा में पानी, उपयुक्त मसालों और संतुलित सामग्री के साथ पकाया जाए, तो इसका स्वाद बढ़िया आता है और दाने भी अलग-अलग बने रहते हैं। आइए, इसकी सामग्री, बनाने की विधि, जरूरी सावधानियों और पौष्टिकता से जुड़ी बातों को विस्तार से समझें।
समक उपमा क्या है और इसे क्यों पसंद किया जाता है?
समक उपमा एक ऐसा व्यंजन है, जिसमें सामक के छोटे दानों को हल्का भूनकर या सीधे धोकर, पानी और स्वादानुसार मसालों के साथ पकाया जाता है। इसमें जीरा, हरी मिर्च, अदरक, मूंगफली, करी पत्ता और धनिया जैसी सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। व्रत के नियमों के अनुसार सेंधा नमक डालकर इसे तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में भी इसे नाश्ते या हल्के दोपहर के भोजन के रूप में बनाया जा सकता है।
इस व्यंजन का स्वाद काफी हद तक पकाने की तकनीक पर निर्भर करता है। अधिक पानी डालने से समक चिपचिपा हो सकता है, जबकि पानी कम रहने पर दाने अधपके रह सकते हैं। इसलिए सामग्री का सही अनुपात, मध्यम आँच और पकने के बाद कुछ समय तक ढककर रखना अच्छे परिणाम के लिए महत्वपूर्ण है।
समक उपमा बनाने की संपूर्ण सामग्री
तैयारी का समय: 10 मिनट · पकाने का समय: 15–20 मिनट · मात्रा: 2–3 व्यक्तियों के लिए
समक उपमा बनाने के लिए ऐसी सामग्री चुनी जाती है, जो इसके स्वाद, सुगंध और बनावट को बेहतर बनाए। नीचे दी गई सामग्री से व्रत के अनुकूल उपमा तैयार किया जा सकता है। व्रत में प्रत्येक सामग्री का उपयोग अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।
मुख्य सामग्री
समक के चावल — 1 कप
पानी — लगभग 2½ से 3 कप
घी — 1 से 2 बड़े चम्मच
मूंगफली — 2 बड़े चम्मच
जीरा — 1 छोटा चम्मच
हरी मिर्च — 1–2, बारीक कटी हुई
अदरक — 1 छोटा चम्मच, बारीक कटा हुआ या कसा हुआ
करी पत्ता — 8–10 पत्तियाँ
आलू — 1 छोटा, बारीक कटा हुआ (वैकल्पिक)
गाजर — ¼ कप, बारीक कटी हुई (वैकल्पिक; व्रत के नियमों के अनुसार)
सेंधा नमक — स्वादानुसार
हरा धनिया — 2 बड़े चम्मच, बारीक कटा हुआ
नींबू का रस — 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
काजू — 6–8, छोटे टुकड़ों में (वैकल्पिक)
ध्यान दें: सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का उपयोग व्रत के लिए किया जाता है। यदि आपके व्रत में कुछ सब्जियाँ या अन्य सामग्री वर्जित हैं, तो उन्हें छोड़ दें।
समक उपमा बनाने की विधि: इन चरणों से तैयार करें स्वादिष्ट व्यंजन
चरण 1: समक के चावलों की सफाई और भिगोना
सबसे पहले समक के चावलों को एक बर्तन में लेकर उनमें मौजूद कंकड़ या अन्य अवांछित कण निकाल दें। इसके बाद साफ पानी से दो से तीन बार हल्के हाथों से धो लें। चावलों को लगभग 15–20 मिनट पानी में भिगोकर रखें। इससे दाने पानी सोख लेते हैं और पकाने में अपेक्षाकृत कम समय लगता है। भिगोने के बाद अतिरिक्त पानी निकाल दें।
चरण 2: मूंगफली और मसालों को भूनना
एक भारी तले की कड़ाही या पैन को मध्यम आँच पर गर्म करें। उसमें थोड़ा घी डालें और मूंगफली को हल्का सुनहरा होने तक भून लें। यदि काजू इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें भी हल्का भूनकर अलग रख सकते हैं। अब उसी पैन में बचा हुआ घी डालें। जीरा डालकर चटकने दें, फिर अदरक, हरी मिर्च और करी पत्ता डालें। इन्हें कुछ सेकंड तक भूनें, ताकि उनकी सुगंध घी में अच्छी तरह घुल जाए।
चरण 3: आलू और दूसरी सब्जियाँ पकाना
यदि आप आलू या गाजर डाल रहे हैं, तो उन्हें मसालों में मिलाकर कुछ मिनट तक भूनें। आलू को थोड़ा नरम होने तक पकाना जरूरी है, क्योंकि समक के चावल अपेक्षाकृत जल्दी पक सकते हैं। व्रत के दौरान सब्जियों के उपयोग को लेकर अपने नियमों का ध्यान रखें। यदि बिना सब्जियों वाला उपमा पसंद है, तो इस चरण को छोड़ सकते हैं।
चरण 4: समक के चावल मिलाना
अब भीगे हुए और पानी निकाले हुए समक के चावल कड़ाही में डालें। उन्हें मसालों के साथ हल्के हाथों से मिलाएँ। लगभग एक से दो मिनट तक चलाएँ, ताकि चावल पर घी और मसालों की हल्की परत चढ़ जाए। इस प्रक्रिया से स्वाद बेहतर होता है और पकाते समय दानों को समान रूप से मसालों का स्वाद मिलता है।
चरण 5: पानी और नमक डालकर पकाना
अब कड़ाही में लगभग 2½ कप पानी डालें और स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएँ। पानी में उबाल आने दें। इसके बाद आँच धीमी कर दें और कड़ाही को ढककर लगभग 8–12 मिनट पकाएँ। बीच में एक बार हल्के हाथ से चला सकते हैं। पकने का समय समक की किस्म, भिगोने की अवधि और दानों के आकार के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
यदि चावल अभी भी सख्त हों और पानी सूख गया हो, तो थोड़ा गर्म पानी डालकर कुछ मिनट और पकाएँ। यदि आपको अधिक नरम उपमा पसंद है, तो आवश्यकता के अनुसार पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ाई जा सकती है। दूसरी ओर, दाने अलग-अलग रखने के लिए पानी एक साथ बहुत अधिक न डालें।
चरण 6: उपमा को दम देना
जब समक के चावल नरम हो जाएँ और अतिरिक्त पानी लगभग समाप्त हो जाए, तो आँच बंद कर दें। कड़ाही को ढककर 3–5 मिनट के लिए छोड़ दें। इस दौरान बची हुई नमी दानों में समान रूप से फैलती है। इसके बाद चम्मच या काँटे की सहायता से उपमा को हल्के हाथों से फुलाएँ। तेज हाथ से चलाने पर दाने टूट सकते हैं और बनावट चिपचिपी हो सकती है।
चरण 7: सजाएँ और गरमागरम परोसें
अंत में भुनी हुई मूंगफली, काजू, बारीक कटा हरा धनिया और चाहें तो थोड़ा नींबू का रस डालें। सभी सामग्री को धीरे-धीरे मिलाएँ। आपका स्वादिष्ट समक उपमा तैयार है। इसे गरमागरम परोसें। इसके साथ सादा दही, नारियल की चटनी या अपनी पसंद की व्रत-अनुकूल चटनी दी जा सकती है, बशर्ते वे आपके व्रत के नियमों के अनुरूप हों।
समक उपमा को स्वादिष्ट बनाने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
समक उपमा की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार पानी का सही अनुपात है। शुरुआत में 1 कप समक के लिए लगभग 2½ कप पानी लेना उपयोगी रहता है। अधिक नरम बनावट के लिए 3 कप तक पानी की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, हर किस्म का समक एक जैसा पानी नहीं सोखता, इसलिए पकाते समय उसकी स्थिति देखते रहना बेहतर है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है आँच का नियंत्रण। तेज आँच पर पानी जल्दी सूख सकता है, जबकि दाने भीतर से कच्चे रह सकते हैं। धीमी आँच पर ढककर पकाने से दाने समान रूप से नरम होते हैं। इसी तरह, बार-बार तेज चलाने से बचना चाहिए। यदि आप पहली बार यह व्यंजन बना रहे हैं, तो कम मात्रा में पानी डालकर आवश्यकता के अनुसार बढ़ाना बेहतर रहेगा।
तीसरी बात है मसालों का संतुलन। समक का अपना स्वाद हल्का होता है, इसलिए बहुत अधिक तीखे मसाले डालने की आवश्यकता नहीं है। जीरा, अदरक, हरी मिर्च और करी पत्ता इसकी सुगंध को उभारते हैं। मूंगफली हल्का कुरकुरापन और अलग स्वाद देती है, जबकि नींबू का रस अंत में हल्की खटास जोड़ता है।
समक के चावलों की पौष्टिकता: भोजन में इसका क्या महत्व है?
समक यानी बार्नयार्ड मिलेट एक प्रकार का मोटा अनाज है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, आहार रेशा, प्रोटीन और कुछ खनिज पाए जाते हैं। इसकी वास्तविक पोषण मात्रा अनाज की किस्म, प्रसंस्करण और पकाने की विधि के अनुसार अलग हो सकती है। समक को विविधतापूर्ण भोजन का हिस्सा बनाना अनाज के विकल्पों में विविधता लाने का एक तरीका है।
समक प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए अनाज का एक विकल्प हो सकता है जिन्हें चिकित्सकीय कारणों से ग्लूटेन से बचना पड़ता है। हालांकि, ऐसे लोगों को पैकेट पर दी गई जानकारी और प्रसंस्करण के दौरान दूसरे अनाजों से संभावित संपर्क की जाँच करनी चाहिए।
समक में मौजूद आहार रेशा सामान्य पाचन क्रिया और संतुलित आहार में योगदान दे सकता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इसे केवल व्रत का भोजन मानने के बजाय सामान्य दिनों में भी अनाज के विविध विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।
फिर भी, किसी एक अनाज को सभी लोगों के लिए सर्वोत्तम या किसी बीमारी का उपचार मानना उचित नहीं है। मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों वाले व्यक्तियों के लिए भोजन की मात्रा, साथ में खाई जाने वाली सामग्री और संपूर्ण आहार का संतुलन महत्वपूर्ण होता है।
व्रत में समक उपमा क्यों बन सकता है अच्छा विकल्प?
व्रत के दिनों में कई लोग साबूदाना, आलू या फलाहारी व्यंजनों के साथ कुछ अलग खाना चाहते हैं। ऐसे में समक उपमा स्वाद और बनावट में बदलाव ला सकता है। इसे मीठे व्यंजनों की जगह नमकीन रूप में तैयार किया जा सकता है और मूंगफली जैसी सामग्री से इसका स्वाद तथा बनावट बेहतर की जा सकती है।
इसकी एक उपयोगी विशेषता यह है कि इसे अपनी पसंद के अनुसार बदला जा सकता है। कोई व्यक्ति इसे केवल जीरा और घी के साथ बना सकता है, जबकि कोई मूंगफली, आलू या काजू मिलाकर अधिक विविध स्वाद पसंद कर सकता है। सामग्री का चुनाव व्रत के नियमों और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार होना चाहिए।
हालाँकि, व्रत में बना होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यंजन अपने आप कम कैलोरी वाला या हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो जाता है। घी, मूंगफली और काजू भी ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए मात्रा और संपूर्ण भोजन का संतुलन ध्यान में रखना चाहिए।
समक उपमा में किए जा सकते हैं ये स्वादिष्ट बदलाव
सब्जियों वाला समक उपमा: यदि आप इसे सामान्य दिनों में बना रहे हैं, तो मटर, गाजर और अन्य पसंदीदा सब्जियाँ मिलाई जा सकती हैं। इससे स्वाद, रंग और भोजन में विविधता आती है।
मूंगफली वाला समक उपमा: मूंगफली को अलग से भूनकर अंत में डालने से कुरकुरापन बना रहता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिन्हें उपमा में अलग-अलग बनावट पसंद है।
पनीर वाला समक उपमा: सामान्य दिनों में थोड़ी मात्रा में पनीर डालकर इसे अधिक भरपूर बनाया जा सकता है। पनीर को अंत में मिलाने से उसकी बनावट बेहतर बनी रहती है। व्रत में पनीर का इस्तेमाल अपनी परंपरा के अनुसार ही करें।
हल्का मसालेदार समक उपमा: जिन लोगों को तीखा भोजन पसंद नहीं है, वे हरी मिर्च की मात्रा कम रख सकते हैं। अदरक और जीरे से भी अच्छी सुगंध मिल जाती है।
भंडारण और स्वच्छता से जुड़ी जरूरी सावधानियाँ
समक उपमा ताजा बनाकर खाना सबसे अच्छा रहता है। यदि कुछ मात्रा बच जाए, तो उसे बहुत देर तक कमरे के तापमान पर न रखें। ठंडा होने के बाद उसे साफ, ढके हुए डिब्बे में रखकर फ्रिज में सुरक्षित करें और सामान्यतः अगले दिन तक उपयोग कर लें। दोबारा गर्म करते समय आवश्यकता हो तो थोड़ा पानी डालें, ताकि उपमा सूखा न लगे। खाने से पहले उसे अच्छी तरह गर्म करें।
समक के चावलों को खरीदते समय साफ पैकेट, उचित भंडारण और समाप्ति तिथि की जाँच करें। उनमें नमी, कीड़े या असामान्य गंध दिखाई दे, तो उनका इस्तेमाल न करें। पकाने से पहले अच्छी तरह धोना और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
परंपरा और स्वाद का सरल मेल
समक उपमा भारतीय रसोई का ऐसा व्यंजन है, जिसे साधारण सामग्री और सही तकनीक से स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। समक के चावल, घी, जीरा, अदरक और मूंगफली का मेल इसे सुगंधित बनाता है, जबकि पानी की सही मात्रा और धीमी आँच इसकी बनावट को बेहतर बनाती है। व्रत में इसे सेंधा नमक और नियमों के अनुरूप सामग्री से तैयार किया जा सकता है, वहीं सामान्य दिनों में सब्जियों या पनीर के साथ इसकी दूसरी किस्में भी बनाई जा सकती हैं।
इस व्यंजन की खासियत किसी जटिल विधि में नहीं, बल्कि सामग्री के संतुलन और पकाने की सावधानी में छिपी है। यदि समक को अच्छी तरह धोया जाए, पानी का अनुपात सही रखा जाए और पकने के बाद कुछ देर ढककर छोड़ा जाए, तो घर पर स्वादिष्ट उपमा बनाना आसान हो जाता है। इस तरह समक उपमा न केवल पारंपरिक खानपान में विविधता लाता है, बल्कि रोजमर्रा के भोजन में मोटे अनाज को शामिल करने का एक व्यावहारिक तरीका भी बन सकता है।






