
संवाद 24 नई दिल्ली। जब पूरा देश रोशनी और उल्लास के सबसे बड़े त्योहारी मौसम की अगवानी में डूबा है, तब राजधानी दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में सन्नाटा, बेबसी और आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान जहां बाजारों में तिल धरने की जगह नहीं होती थी, वहीं लगातार हो रहे राजनीतिक व सामाजिक प्रदर्शनों, कड़े पुलिस पहरे और ट्रैफिक नाकेबंदी ने व्यापारियों की कमर तोड़ कर रख दी है। कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, खान मार्केट और सदर बाजार जैसे ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्रों के कारोबारियों का कहना है कि उनकी सालभर की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है और अब यह संकट सीधे उनके पेट और आजीविका पर वार कर रहा है।
कनॉट प्लेस में कर्फ्यू जैसा मंजर, ग्राहक नदारद
दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (सीपी) और पालिका बाजार के आसपास शुक्रवार को नजारा किसी छावनी जैसा नजर आया। सीजेपी (संयुक्त युवा मंच) के प्रदर्शन और उसके बाद इंडिया ब्लॉक के धरने के आह्वान के चलते पूरे इनर व आउटर सर्कल में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती कर दी गई। सुरक्षा कारणों से जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड्स और जांच चौकियों के चलते आम खरीदार बाजारों का रुख करने से कतराते रहे। दुकानदारों के मुताबिक, त्योहारी वीकेंड वह समय होता है जब पूरे हफ्ते की तुलना में 80 से 90 प्रतिशत तक व्यापार होता है। मगर इस बार नजारा बिल्कुल उलट था। मशहूर प्रतिष्ठान वेंगर्स के प्रतिनिधियों से लेकर छोटे पटरी दुकानदारों तक का कहना है कि आम दिनों के मुकाबले 10 प्रतिशत ग्राहक भी नहीं पहुंचे। गुजरात और दूरदराज के राज्यों से पारंपरिक त्योहारी उत्पाद, मिट्टी के दीये, सजावटी हस्तशिल्प और कपड़े लेकर पहुंचे मौसमी विक्रेता सबसे ज्यादा बदहाल हैं। कई विक्रेताओं ने नम आंखों से बताया कि वे भारी लागत लगाकर दिल्ली आए थे, लेकिन दिनभर इंतजार के बाद भी बोहनी तक मुश्किल हो रही है।
‘कनॉट प्लेस आपका मंच नहीं, हमारा कार्यस्थल है’
व्यापारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने कड़ा एतराज जताते हुए सार्वजनिक संदेश जारी किया है। एसोसिएशन के पोस्टरों पर साफ लिखा गया – “हम लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के आपके अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन कनॉट प्लेस कोई विरोध प्रदर्शन का मैदान नहीं, बल्कि हमारा कार्यस्थल है। आप अपने बेहतर कल के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन हमारे आज को मत मारिए।” एनडीटीए के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने चिंता जताते हुए कहा कि कनॉट प्लेस उत्तर और दक्षिण दिल्ली को जोड़ने वाली मुख्य धुरी है। यहां एक भी रास्ता बंद होने से समूची दिल्ली की रफ्तार थम जाती है। व्यापारियों को भारी किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल और संपत्तिकर चुकाना होता है। जब बिक्री ही 10 प्रतिशत पर सिमट जाएगी, तो व्यापारी इन खर्चों की भरपाई कहां से करेंगे? उन्होंने प्रशासन से दो टूक मांग की कि ऐसे तमाम प्रदर्शनों को पूर्व-निर्धारित धरना स्थलों (जैसे जंतर-मंतर या रामलीला मैदान) तक ही सीमित रखा जाए।
थोक बाजारों में फंसी करोड़ों की पूंजी
संकट केवल लक्जरी या रिटेल मार्केट्स तक सीमित नहीं है। थोक व्यापार के सबसे बड़े केंद्र सदर बाजार, भागीरथ पैलेस (इलेक्ट्रॉनिक्स), खारी बावली (मसाला बाजार) और चांदनी चौक में भी स्थिति बदतर हो चुकी है। सदर बाजार बारा मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा और दिल्ली व्यापार महासंघ के राजेंद्र कपूर ने बताया कि उत्तर भारत भर से खुदरा व्यापारी दिवाली का स्टॉक उठाने दिल्ली आते हैं। लेकिन शहर भर में लगे जाम और रास्तों की पाबंदियों के कारण बाहरी व्यापारी माल लोड नहीं करा पा रहे हैं। त्योहारी माल समय पर नहीं बिका तो करोड़ों रुपये की पूंजी फंस जाएगी और कई छोटे व्यापारी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने बताया कि निजामुद्दीन, सफदरजंग, इंडिया हैबिटेट सेंटर और रेसकोर्स की तरफ से आने वाले लगभग सभी एंट्री प्वाइंट्स ब्लॉक होने से वीआईपी इलाकों के बाजार भी वीरान नजर आए।
प्रधानमंत्री, गृह मंत्री को पत्र; सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को अहम सुनवाई
व्यापारिक संगठनों ने अपनी इस बदहाली को लेकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस आयुक्त को औपचारिक पत्र भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। व्यापारियों का साफ कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छीनने की इजाजत किसी को नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, कई व्यापारिक संघों ने राहत और मुआवजे की मांग को लेकर देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 26 अक्टूबर मुकर्रर की है। अदालत ने प्रारंभिक टिप्पणियों में यह संकेत भी दिया है कि यदि नियमों की अनदेखी या गैर-कानूनी प्रदर्शनों के चलते व्यापारियों का व्यवसाय अनुचित रूप से प्रभावित साबित होता है, तो उन्हें मुआवजे का हकदार माना जा सकता है। अब देखना यह होगा कि त्योहारी सीजन की बची हुई अवधि में प्रशासन व्यापारियों के विश्वास और बाजारों की रौनक को किस तरह बहाल करता है।






