
संवाद 24 बिहार। किसी ने सोचा भी नहीं था कि उत्साह और उमंग के साथ एक मांगलिक-सामाजिक भोज में शामिल होने निकले मासूमों के लिए यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। बिहार के वैशाली जिले के दियारा इलाके राघोपुर में मंगलवार की रात एक ऐसी दर्दनाक त्रासदी घटी, जिसने पूरे इलाके की रूह कंपा दी। गंगा की जलधारा की गोद में बसे राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद पंचायत में बच्चों से भरी एक छोटी देसी नाव असंतुलित होकर जलमग्न हो गई। इस भीषण जल हादसे में 13 मासूमों की डूबने से अकाल मौत हो गई, जबकि कई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। हादसे के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है और हर आंख नम है।
उत्साह से भरी यात्रा और बीच मजधार में मौत का तांडव
घटना मंगलवार की रात करीब साढ़े आठ बजे की बताई जा रही है। रामपुर श्यामचंद पंचायत अंतर्गत भगतान टोला स्थित माता महारानी स्थान के समीप रहने वाले सिंघेश्वर राय के यहां भोज का आयोजन था। आसपास के टोले-मोहल्लों से करीब 20 से 25 लोग, जिनमें ज्यादातर किशोर और मासूम बच्चे शामिल थे, एक छोटी नाव पर सवार होकर भोज में शामिल होने के लिए ढाब के उस पार जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव किनारा छोड़कर जैसे ही गहरे पानी के बीच पहुंची, अचानक अनियंत्रित होकर डगमगाने लगी। संकरी नाव पर क्षमता से अधिक वजन और बहाव के दबाव के कारण पानी अंदर भरने लगा और देखते ही देखते नाव पलट गई। चीख-पुकार मचते ही सभी पानी में समा गए। रात के घने अंधेरे और ठंडे पानी के बीच बच्चों की चीखें दूर तक गूंज उठीं, लेकिन जब तक कोई संभलता, तब तक पानी उन्हें अपनी आगोश में ले चुका था।
चीख-पुकार सुन दौड़े ग्रामीण, अंधेरे में देवदूत बनकर कूदे लोग
हादसे के बाद ढाब किनारे खड़े लोगों ने शोर मचाया तो आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। बिना किसी प्रशासनिक मदद का इंतजार किए स्थानीय तैराक और ग्रामीण तुरंत नदी में कूद पड़े। मशाल, टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में लगभग एक घंटे तक चले अथक प्रयासों के बाद पानी में डूबे लोगों को बाहर निकाला गया। आनन-फानन में बच्चों को निजी वाहनों, बाइकों और ई-रिक्शा के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), राघोपुर फतेहपुर पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने 17 बच्चों की प्राथमिक जांच शुरू की। कुछ ही देर में डॉक्टरों ने 13 मासूमों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का यह ऐलान सुनते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। माता-पिता अपने कलेजे के टुकड़ों से लिपटकर दहाड़ मारकर रोने लगे। अस्पताल में मौजूद तीन गंभीर बच्चों को नाजुक हालत देखते हुए तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) और अन्य को एनएमसीएच (NMCH) रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रशासनिक अमले में हड़कंप, मौके पर पहुंचीं डीएम और एसएसपी
इतने बड़े पैमाने पर मासूमों की मौत की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह और वरीय पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रात करीब साढ़े आठ बजे यह हृदयविदारक घटना घटी। नाव पर करीब 20 बच्चे सवार थे, जो पास के गांव में भोज में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने पुष्टि की कि 13 बच्चों की असमय मृत्यु हो गई है, जिनकी उम्र लगभग 15 वर्ष के आसपास है। इसके साथ ही सात अन्य बच्चों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया है। डीएम ने बताया कि राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीम रातभर तलाशी अभियान चला रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी में कोई अन्य व्यक्ति फंसा न रह गया हो।
आक्रोश और सवाल: आखिर जर्जर नावों पर कब लगेगा लगाम?
इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश भी देखने को मिला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दियारा क्षेत्र में आवागमन का एकमात्र साधन नाव ही है, लेकिन प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते। क्षमता से अधिक सवारी बैठाना और बिना लाइफ जैकेट जर्जर नावों का संचालन यहां आम बात बन चुकी है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
सरकार ने की आर्थिक मुआवजे की घोषणा
इस भीषण त्रासदी पर दुख प्रकट करते हुए उपमुख्यमंत्री/मुख्यमंत्री स्तर से मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है। सरकार ने प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (अनुग्रह राशि) तत्काल देने का ऐलान किया है। साथ ही जिला प्रशासन को घायलों के समुचित एवं निशुल्क इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।






