‘पावर टू कंट्रोल’ नहीं ‘पावर टू एम्पावर’: ब्लूमबर्ग फोरम में पीएम मोदी ने रखा वैश्विक विजन, भारत की आर्थिक और लोकतांत्रिक ताकत से दुनिया कैसे बनेगी समृद्ध?

संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक उथल-पुथल के दौर में भारत ने दुनिया के सामने समावेशी विकास, तकनीकी सशक्तीकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक नया वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रतिष्ठित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी के नुकसान पर अपनी तरक्की की राह नहीं देखता, बल्कि पूरी दुनिया के साथ और पूरी दुनिया के कल्याण के लिए आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ (Mother of Democracy) बताते हुए कहा कि शक्ति का वास्तविक उद्देश्य नियंत्रण स्थापित करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सक्षम और सशक्त बनाना है। वैश्विक निवेशकों, शीर्ष उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति में दिया गया यह वक्तव्य ऐसे समय में सामने आया है, जब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं भारत को वैश्विक आर्थिक विकास के सबसे मजबूत इंजन के रूप में देख रही हैं। यह नीतिगत दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारत की विकास गाथा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन के साथ वैश्विक स्थिरता और साझी समृद्धि में योगदान दे रही है।

‘पावर टू एम्पावर’: तकनीक और सत्ता की नई परिभाषा
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता और प्रभाव के पारंपरिक नजरिए को बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि आज की दुनिया को ‘पावर टू कंट्रोल’ (नियंत्रण की शक्ति) से आगे बढ़कर ‘पावर टू एम्पावर’ (सशक्तीकरण की शक्ति) की सोच को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि सफलता की असली सार्थकता केवल खुद सफल होने में नहीं, बल्कि दूसरों की सफलता का मार्ग प्रशस्त करने में है।
अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिक तकनीकी विकास को लेकर एक बुनियादी प्रश्न उठाया:
1- क्या तकनीकी नवाचार केवल कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट्स या विशिष्ट वर्ग तक सीमित रहेगा, या यह करोड़ों सामान्य नागरिकों के जीवन में प्रगति के द्वार खोलेगा?
2- क्या ज्ञान का प्रसार कुछ लोगों का एकाधिकार बनेगा या यह हर व्यक्ति की क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम बनेगा?
प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे यूपीआई, जन-धन, आधार) के जरिए दुनिया को दिखा दिया है कि तकनीक का वास्तविक लोकतंत्रीकरण कैसे किया जाता है। केंद्र सरकार की जन-हितैषी नीतियों के कारण तकनीक आज अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बिचौलिए के सीधी मदद पहुंचाने का सबसे पारदर्शी और प्रभावी साधन बन चुकी है।

‘लोकतंत्र की जननी’ और अभिव्यक्ति की खुली ताकत
भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और खुले विमर्श पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता और व्यापक मीडिया परिदृश्य इसके जीवंत समाज का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। उन्होंने आंकड़ों के जरिए भारत की लोकतांत्रिक मजबूती को पेश करते हुए बताया कि देश में 100 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं, लगभग 80,000 पंजीकृत समाचार पत्र व पत्रिकाएं संचालित हैं और 1,000 से अधिक सैटेलाइट टेलीविजन चैनल सक्रिय हैं।
डिजिटल युग में जनभागीदारी के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:
1- देश में 50 करोड़ (500 मिलियन) से अधिक यूट्यूब उपयोगकर्ता और 50 करोड़ से अधिक इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता मौजूद हैं, जो जनता की खुली आवाज और लोकतांत्रिक संवाद की व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं।
2- भारत किसी भी वैश्विक व्यवस्था में अलग-थलग पड़कर या अपने ज्ञान को सीमित रखकर आगे नहीं बढ़ता, बल्कि अपनी क्षमताओं को साझा कर सभी के साथ मिलकर काम करने का पक्षधर है।

वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद ठिकाना
आर्थिक मोर्चे पर नीतिगत निरंतरता, विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियां और ढांचागत सुधारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भविष्य के अवसरों का सबसे सही और विश्वसनीय गंतव्य है। वैश्विक सप्लाई चेन के विविधीकरण के इस दौर में भारत का स्थिर राजनीतिक वातावरण, पारदर्शी नियम और मजबूत बैंकिंग ढांचा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना साबित हो रहे हैं। सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों के कारण वैश्विक स्तर पर मंदी की चिंताओं के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर गति से आगे बढ़ रही है, जिससे यह वैश्विक पूंजी के लिए स्वाभाविक केंद्र बन गया है।

लोककल्याणकारी नेतृत्व की ओर मजबूत कदम
ब्लूमबर्ग फोरम में भारत का यह दृष्टिकोण साफ करता है कि देश का विकास प्रतिस्पर्धी टकराव के आधार पर नहीं, बल्कि साझी प्रगति के सिद्धांत पर आधारित है। पारदर्शी नीतियां, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रौद्योगिकी का मानवीय उपयोग भारत को एक जिम्मेदार और दूरदर्शी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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