
जिले में बिना मान्यता अथवा आवश्यक पंजीकरण के संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला विद्यालय निरीक्षक संजीव कुमार ने ऐसे कोचिंग सेंटरों के संचालकों को एक सप्ताह के भीतर संस्थान बंद करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग की इस चेतावनी से नियमों की अनदेखी कर कोचिंग संस्थान चलाने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पहले भी दिए गए थे नोटिस, फिर भी जारी रहा संचालन
जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इससे पहले भी विभाग ने संबंधित कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। विभागीय जांच के दौरान इसके बावजूद कुछ संस्थान निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित होते नहीं पाए गए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने अब अंतिम चेतावनी देते हुए एक सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।
पंजीकरण और नवीनीकरण कराना अनिवार्य
उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 और इससे संबंधित नियमावली में प्रावधान किए गए हैं। वहीं, केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2024 में कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें पंजीकरण, शुल्क में पारदर्शिता, बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसे विषय शामिल हैं। इन दिशा-निर्देशों को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उचित कानूनी व्यवस्था के लिए भेजा गया था।
निरीक्षण में गड़बड़ी मिली तो लगेगा जुर्माना
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी नियमों के विपरीत कोचिंग सेंटर संचालित होते मिले तो संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। विभाग ने संचालकों को निर्देश दिया है कि वे पंजीकरण और नवीनीकरण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करें तथा लागू नियमों के अनुसार ही संस्थान का संचालन करें।
विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजरें विभाग की अगली कार्रवाई पर
एक सप्ताह की मोहलत के बाद शिक्षा विभाग किस स्तर पर जांच और कार्रवाई करता है, इस पर विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर रहेगी। फिलहाल विभाग की ओर से दी गई चेतावनी का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों को निर्धारित नियमों के दायरे में लाना और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है।






