जमीन के एग्रीमेंट की रसीद पर क्यों छिड़ा विवाद फर्रुखाबाद में व्यापारी ने पुलिस और निबंधन कार्यालय पर उठाए सवाल

सदर तहसील में एग्रीमेंट की अवधि बढ़वाने के लिए पर्ची कटवाने पहुंचे व्यापारी को कथित तौर पर नहीं मिली सुविधा; आईजीआरएस पर शिकायत के बाद जिलाधिकारी से लेकर शासन तक मामला पहुंचाने की तैयारी।

जमीन के एग्रीमेंट की अवधि बढ़वाने और रसीद कटवाने को लेकर फर्रुखाबाद सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में विवाद सामने आया है। ईंट-भट्ठा व्यवसायी आयुष रस्तोगी ने आरोप लगाया है कि जमीन के पुराने विवाद के बीच उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। व्यापारी का दावा है कि इस दौरान पुलिस की मौजूदगी और दूसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण उनका काम नहीं हो सका। मामले को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

2020 में हुआ था जमीन का एग्रीमेंट, रास्ते को लेकर बढ़ा विवाद

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2020 में आयुष रस्तोगी ने तलैया फजल इमाम निवासी प्रदीप गुप्ता, आशीष गुप्ता और अरविंद गुप्ता आदि से श्याम नगर स्थित साक्षीधाम के पीछे की जमीन का एग्रीमेंट कराया था। आरोप है कि जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था नहीं थी और बाद में सरकारी तालाब की जमीन को पाटकर रास्ता बनाया गया। बताया गया है कि जब जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार करने का प्रयास किया गया, तब प्रशासन ने तालाब की जमीन पर कार्रवाई की। विवाद के चलते वर्ष 2023 में एग्रीमेंट की अवधि बढ़वाए जाने की बात कही गई है। आयुष रस्तोगी का आरोप है कि वर्ष 2026 तक भी रास्ते से संबंधित समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने दूसरे पक्ष को एग्रीमेंट की अवधि आगे बढ़ाने के लिए नोटिस दिया और 8 अक्टूबर को निबंधन कार्यालय में संबंधित प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे। जमीन, रास्ते और एग्रीमेंट से संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुबह घर पहुंची पुलिस, व्यापारी ने जताई आपत्ति

आयुष रस्तोगी के अनुसार, 8 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे। उनका आरोप है कि दरोगा शिव कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और बताया कि मोहल्ला खतरंबा निवासी अखिलेश उर्फ रामजी शुक्ला ने उनके खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया है। उन्हें प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार के पास बुलाए जाने की बात भी कही गई। व्यापारी के पक्ष के मुताबिक, पुलिस के पहुंचने के बाद उनकी प्रभारी निरीक्षक से बातचीत हुई। हालांकि, पुलिस किस शिकायत की जांच कर रही थी, शिकायत में क्या आरोप लगाए गए थे और पुलिस के घर पहुंचने का आधिकारिक आधार क्या था, इसकी पुष्टि संबंधित पुलिस अधिकारियों के बयान या अभिलेखों से नहीं हो सकी है।

निबंधन कार्यालय में पर्ची कटवाने पहुंचे अधिवक्ता, लेकिन नहीं हुआ काम

विवाद का अगला घटनाक्रम सदर तहसील स्थित निबंधन कार्यालय में सामने आया। आयुष रस्तोगी के अधिवक्ता पंकज राजपूत एग्रीमेंट की अवधि बढ़वाने से संबंधित पर्ची कटवाने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां उन्हें बताया गया कि आयुष रस्तोगी के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उनके ईंट-भट्ठे को सील करने की तैयारी भी की जा रही है। व्यापारी पक्ष का दावा है कि बजरिया चौकी के प्रभारी यतेन्द्र सिंह पुलिसकर्मियों के साथ कार्यालय में मौजूद थे और कुछ अन्य पुलिसकर्मी भी आसपास दिखाई दिए। अधिवक्ता की ओर से यह सवाल उठाए जाने की बात कही गई कि जमीन के एग्रीमेंट से संबंधित प्रक्रिया को पूरा करने में पुलिस की मौजूदगी किस आधार पर बाधा बन रही है। व्यापारी पक्ष के अनुसार, रजिस्ट्रार ने पुलिस की मौजूदगी का हवाला देते हुए पर्ची काटने में असमर्थता जताई। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने वास्तव में क्या कहा और पर्ची जारी न करने का कोई लिखित कारण दिया गया या नहीं, इसकी पुष्टि होना बाकी है।

दूसरे पक्ष की मौजूदगी पर भी उठे सवाल

आयुष रस्तोगी के पक्ष ने आरोप लगाया है कि जमीन विवाद से जुड़े दूसरे पक्ष के लोग भी दिनभर निबंधन कार्यालय में मौजूद रहे। व्यापारी पक्ष ने अमन नामक युवक की मौजूदगी और कथित तौर पर मंत्री का नाम लिए जाने का भी दावा किया है। इन आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या अधिकारी की मिलीभगत को स्थापित नहीं माना जा सकता। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित लोगों की कार्यालय में मौजूदगी किस उद्देश्य से थी और क्या किसी ने निबंधन प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।

आईजीआरएस पर शिकायत, अब प्रशासनिक जांच की मांग

व्यापारी पक्ष के अनुसार, पूरे प्रकरण की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई है। अब जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने की तैयारी की जा रही है। शिकायत में कथित तौर पर पुलिस की भूमिका, निबंधन कार्यालय में पर्ची न कटने और जमीन के एग्रीमेंट से जुड़े विवाद की जांच कराने की मांग की गई है। उत्तर प्रदेश का आधिकारिक आईजीआरएस पोर्टल जनशिकायतों के निस्तारण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इस मामले में शिकायत संख्या, शिकायत की वर्तमान स्थिति और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए शिकायत दर्ज होने और उसके निस्तारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड से ही निकाला जा सकता है।

सरकारी तालाब और जमीन के रास्ते का मामला भी जांच के दायरे में

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण सवाल जमीन तक पहुंचने के रास्ते और कथित तौर पर सरकारी तालाब की भूमि के इस्तेमाल से जुड़ा है। यदि रास्ता वास्तव में सरकारी तालाब की जमीन पर बनाया गया था, तो संबंधित राजस्व अभिलेखों, भूमि की श्रेणी, नक्शे और प्रशासनिक कार्रवाई की जांच आवश्यक होगी। उत्तर प्रदेश के भूलेख पोर्टल पर भूमि अभिलेख और भूखंड से जुड़े वाद की स्थिति देखी जा सकती है। ऐसे रिकॉर्ड से जमीन की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है, लेकिन किसी पक्ष के स्वामित्व या रास्ते के अधिकार का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के आधार पर ही होगा।

जांच से ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

फर्रुखाबाद के इस प्रकरण में फिलहाल एक पक्ष की ओर से पुलिस और निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर, पुलिस की शिकायत, कथित चार मुकदमों, एग्रीमेंट की शर्तों और पर्ची जारी न किए जाने के कारणों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। अब प्रशासन के सामने प्रमुख सवाल हैं—क्या व्यापारी की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई हुई? एग्रीमेंट की अवधि बढ़ाने के लिए मांगी गई पर्ची किस कारण नहीं काटी गई? क्या जमीन के रास्ते और सरकारी तालाब से संबंधित विवाद का कोई आधिकारिक आदेश मौजूद है? और क्या इस पूरे घटनाक्रम में किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ?

Anuj Singh
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