दिल्ली के सीमापुरी में भरभराकर गिरी बहुमंजिला इमारत, मलबे के बीच से चीखों की गूंज

​संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके सीमापुरी में उस वक्त अचानक कोहराम मच गया, जब ईदगाह मछली मंडी के नजदीक स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। पलक झपकते ही आसमान छूते धूल के गुबार, कंक्रीट के भारी-भरकम स्लैब और मलबे के नीचे दबे लोगों की कराहती चीखों ने पूरे इलाके को दहला दिया। अचानक हुए इस तेज धमाके और मकान के गिरने से आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए और उन्हें लगा मानो कोई भीषण भूकंप आ गया हो।

​”कुछ सेकंड के लिए लगा भूकंप आया है” – चश्मदीदों की जुबानी
​हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त रोजाना की तरह चहल-पहल थी। तभी एक अजीब सी गड़गड़ाहट और तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। गली के बाहर खड़े स्थानीय निवासी बाबू खान ने बताया कि चंद ही सेकंड में सामने खड़ी इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई और हर तरफ सिर्फ धूल और धुएं का घना पर्दा छा गया। ​एक अन्य स्थानीय निवासी इस्माइल ने रुंधे गले से कहा कि ऐसा खौफनाक मंजर उन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा था। हर तरफ धूल का गुबार था और मलबे के नीचे से बचाओ-बचाओ की चीखें आ रही थीं। राहत और बचाव दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय मोहल्लेवासियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कंक्रीट के टुकड़ों को हटाना शुरू कर दिया और तुरंत चार लोगों को खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

​मलबे में दबी जिंदगी और हर आहट पर थमने वाली सांसें
​सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें भारी उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। मलबे के बीच जब भी किसी के जिंदा होने का संकेत मिलता या कोई आवाज सुनाई देती, तो वहां खड़े सैकड़ों परिजनों और पड़ोसियों की सांसें थम जाती थीं।
​हादसे के बाद इलाके में अपनों की तलाश कर रहे लोगों के चेहरों पर खौफ और बेबसी साफ देखी जा सकती थी। कई लोग लगातार अपने रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर मिला रहे थे, लेकिन बजती घंटी या बंद फोन उनकी बेचैनी को और बढ़ा रहे थे। हादसे की शिकार हुई एक गर्भवती महिला गुलफशां अपनी मां से मिलने आई थीं और घटना के समय नीचे बैठी थीं; उनके मलबे में दबे होने की खबर से परिजन बेसुध रोते नजर आए। राहत कर्मियों ने रात भर लगातार काम करते हुए भारी स्लैबों को कटर की मदद से काटा और कई लोगों को जिंदा निकालकर अस्पताल भेजा।

​संकरी गलियां बनीं चुनौती, ईदगाह के रास्ते से पहुंची मदद
​बचाव दल के सामने सबसे विकट समस्या इलाके की बेहद संकरी और तंग गलियां थीं, जहां भारी जेसीबी और क्रेन का सीधे पहुंचना नामुमकिन सा था। हालांकि, ईदगाह की तरफ से मिले खुले रास्ते ने राहत कार्य को बड़ी गति प्रदान की। इसी रास्ते से दमकल की गाड़ियों और हाइड्रोलिक उपकरणों को अंदर पहुंचाया गया। ​दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी आपातकालीन स्थिति को देखते हुए सीमापुरी गोल चक्कर और डीएलएफ भोपुरा की ओर जाने वाले मार्गों पर विशेष एडवाइजरी जारी कर दी, ताकि एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहनों को बिना किसी रुकावट के ग्रीन कॉरिडोर मिल सके।

​कमजोर नींव और गैर-कानूनी निर्माण पर उठते सवाल
​स्थानीय लोगों का कहना है कि महज 25 गज के छोटे से भूखंड पर बिना किसी मजबूत पिलर संरचना के पांच मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई थी। कुछ समय पहले ही ऊपर की मंजिलों का निर्माण हुआ था और इमारत काफी कमजोर स्थिति में थी। कई स्थानीय नागरिकों ने यह भी दावा किया कि पिछले दिनों महसूस हुए हल्के झटकों के बाद इमारत में दरारें आ गई थीं। ​प्रशासन ने मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं और हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फिलहाल मलबे को पूरी तरह हटाने और दबे हर शख्स को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *