लोकतंत्र पर संकट या सियासी संग्राम? मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, देशव्यापी आंदोलन से गरमाई सियासत

​संवाद 24 नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच छिड़ा विवाद अब सीधे सड़कों पर उतर आया है। कांग्रेस समेत समूचे विपक्षी मोर्चे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंकते हुए देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर और संसद मार्ग जैसे संवेदनशील इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

​13 करोड़ वोटों में हेरफेर का गंभीर आरोप
​इस पूरे राजनीतिक घमासान की धुरी मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया बनी हुई है। विपक्षी दलों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस विशेष प्रक्रिया की आड़ में देशभर के लगभग 13 करोड़ वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं। विपक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक चूक मानने से इनकार करते हुए सीधे तौर पर ‘वोटों की डकैती’ करार दे रहा है। विपक्षी गठबंधन का कहना है कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रणाली की आत्मा पर सीधा प्रहार है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे, पूरी संशोधन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने तथा हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम पुनः सूची में शामिल करने की मांग रखी है।

​संसद से सड़क तक संग्राम: हिरासत और कड़ा पहरा
​विवाद ने उस वक्त और आक्रामक रूप ले लिया जब विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। उस दौरान दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन के समीप बैरिकेडिंग कर सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया। धरने पर बैठे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित लगभग 10 सांसदों और ढाई सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में देर शाम रिहा किया गया। ​इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने इसे पुलिसिया दमन और लोकतंत्र का ‘काला दिन’ बताते हुए अपने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों ने रणनीति बदलकर संसद मार्ग और जंतर-मंतर पर निरंतर दबाव बनाए रखने की योजना तैयार की है।

​जंतर-मंतर पर कड़ा सुरक्षा घेरा
​विरोध की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने नई दिल्ली के पूरे मध्य क्षेत्र में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। संसद मार्ग, रायसीना रोड, आकाशवाणी भवन और जंतर-मंतर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाए गए हैं। आंदोलनकारियों की आवाजाही और भीड़ पर नियंत्रण रखने के लिए पूरे क्षेत्र पर ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क से पैनी नजर रखी जा रही है। संवेदनशील चौराहों पर दंगा रोधी वाहनों और अतिरिक्त सुरक्षा दस्तों को तैनात किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।

​”संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा तक जारी रहेगा संघर्ष”
​कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक के बाद राहुल गांधी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयुक्तों से मिलकर अपनी शिकायतें दर्ज कराना चाहता था, लेकिन संवाद से इनकार कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक संवाद के द्वार बंद कर देती हैं, तब जनता की अदालत में जाना ही एकमात्र विकल्प बचता है। विपक्ष का दावा है कि जब तक चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता और मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों को सुधारा नहीं जाता, तब तक यह आंदोलन केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के हर राज्य और जिले में आम जनता के बीच ले जाया जाएगा। ​दूसरी ओर, प्रशासनिक और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या यातायात अवरोध को रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। बहरहाल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उपजा यह तीखा टकराव आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक गरमाने के संकेत दे रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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