कन्नौज में नाबालिग साली को बहला-फुसलाकर दिल्ली ले जाने का मामला, जीजा को 20 साल की सजा

कन्नौज। तालग्राम थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में सामने आए नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर दिल्ली ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने आरोपी जीजा को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी पर 2 लाख 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मंदिर घुमाने के बहाने घर से ले गया था

अभियोजन पक्ष के अनुसार, तालग्राम थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी आरोपी राजू की साली थी। राजू की ससुराल उसी गांव में थी। आरोप है कि 6 जून 2019 की सुबह करीब 10 बजे वह किशोरी को मंदिर घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया।इसके बाद आरोपी उसे ट्रक के जरिए दिल्ली ले गया और वहां किराए के कमरे में रखा। शिकायत सामने आने के बाद किशोरी के पिता ने तालग्राम थाने में अपने दामाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

दिल्ली में कमरे से हुई दोनों की बरामदगी

मामले की जांच के दौरान तालग्राम पुलिस ने 25 जून 2019 को दिल्ली से आरोपी और किशोरी को बरामद कर लिया। पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया, जबकि किशोरी की चिकित्सकीय जांच और आवश्यक बयान दर्ज कराने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द किया गया।

अदालत में गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर चला मुकदमा

अभियोजन की ओर से मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी। शासकीय अधिवक्ता बृजेश शुक्ला के अनुसार, अभियोजन ने अदालत के समक्ष आरोपों को साबित किया।मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश रामगोपाल सिंह ने की। अदालत ने आरोपी राजू को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कारावास और 2.02 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।POCSO अधिनियम की धारा 6 में गंभीर श्रेणी के penetrative sexual assault के लिए कम से कम 20 वर्ष के कठोर कारावास का प्रावधान है, जो परिस्थितियों के अनुसार आजीवन कारावास तक हो सकता है।

दूसरा मामला: युवती को ले जाने पर तीन साल की सजा

कन्नौज में ही इंदरगढ़ थाना क्षेत्र से जुड़े एक अन्य पुराने मामले में अदालत ने एक युवक को युवती को भगाकर ले जाने के मामले में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।अभियोजन के मुताबिक, शाहनगर गांव निवासी रामू पर आरोप था कि वह 29 जुलाई 2020 को क्षेत्र की एक युवती को अपने साथ ले गया था। बाद में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली और पंजाब के लुधियाना में रहने लगे।

युवती ने अदालत में बताई थी अलग बात

मामले में युवती के पिता की ओर से उसे नाबालिग बताते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी। करीब एक महीने बाद दोनों इंदरगढ़ थाने पहुंचे। युवती ने पुलिस के समक्ष खुद को बालिग बताते हुए कहा था कि उसने अपनी इच्छा से रामू के साथ विवाह किया है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत दोषी 

माना और तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।धारा 363 के तहत किसी व्यक्ति को भारत या उसके वैध अभिभावक की अभिरक्षा से अपहरण करने पर सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान था। 2019-20 की घटनाओं से जुड़े मामलों में तत्कालीन IPC की धाराएं लागू रह सकती हैं, भले ही IPC को 1 जुलाई 2024 से BNS ने प्रतिस्थापित कर दिया है।

न्यायालय के फैसले से स्पष्ट संदेश

दोनों मामलों में अदालत के फैसले इस बात को रेखांकित करते हैं कि नाबालिगों को बहला-फुसलाकर या उनकी अभिरक्षा से बाहर ले जाकर यौन अपराध करने के मामलों में कानून बेहद सख्त है। विशेष रूप से पॉक्सो कानून बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *