यूक्रेन में भारतीय फार्मा प्लांट पर रूसी ड्रोन का भीषण प्रहार: 1 की मौत, इमारत खंडहर में तब्दील, 400 करोड़ का भारी नुकसान

संवाद 24 नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष की लपटों ने अब भारतीय कारोबारी प्रतिष्ठान को भी अपनी चपेट में ले लिया है। पूर्वोत्तर यूक्रेन के सीमावर्ती शहर सुमी में स्थित भारतीय फार्मा दिग्गज ‘कुसुम ग्रुप’ (Kusum Group) के अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर रूस ने बड़े पैमाने पर आत्मघाती ड्रोन हमला किया है। इस विध्वंसक हवाई हमले में फैक्ट्री परिसर में कार्यरत एक कर्मचारी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हमले के बाद प्लांट के मुख्य ढांचे में आग लग गई और आकाश में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया। प्राथमिक अनुमानों के अनुसार, इस हमले में कंपनी को लगभग 400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का सीधा नुकसान हुआ है।

​आसमान से बरसा बारूद, खंडहर बना आधुनिक परिसर
​स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, हमला भोर के समय हुआ जब आसमान में रूसी ड्रोनों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। निशाने पर आई कुसुम ग्रुप की यह फैक्ट्री सुमी शहर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। एक के बाद एक गिरे ड्रोनों के शक्तिशाली धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। ​धमाके की तीव्रता इतनी जबर्दस्त थी कि फैक्ट्री की मुख्य उत्पादन यूनिट की छतें और दीवारें भरभराकर ढह गईं। अंदर स्थापित करोड़ों रुपये के संवेदनशील उपकरण, प्रयोगशालाएं, दवा निर्माण लाइनें और तैयार स्टॉक मलबे तथा आग की भेंट चढ़ गए। स्थानीय आपातकालीन राहत दल और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया। बचाव दल लगातार मलबे में तलाशी अभियान चला रहे हैं, जिससे हताहतों की संख्या में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

​1990 के दशक में रखी गई थी नींव, युद्ध में भी नहीं रुकी थीं सांसें
​यह पूरी विनिर्माण इकाई भारतीय मूल के जाने-माने उद्यमी राजीव गुप्ता द्वारा संचालित कुसुम ग्रुप की है। राजीव गुप्ता 1990 के दशक में यूक्रेन पहुंचे थे और उन्होंने भारतीय दवाओं की आपूर्ति से अपने कारोबारी सफर का आगाज किया था।
​1994: कंपनी ने भारत से यूक्रेन में जीवनरक्षक दवाएं निर्यात करने वाली एक डिस्ट्रीब्यूटर फर्म के रूप में शुरुआत की।
​1996: यूक्रेन में कंपनी को औपचारिक संस्थागत रूप दिया गया।
​2002: कुसुम ग्रुप ने अन्य कंपनियों के वितरण का काम बंद कर अपने स्वयं के ब्रांडों की दवाओं का विपणन और विकास शुरू किया।
​2007-2009: कंपनी ने आत्मनिर्भर विनिर्माण की ओर कदम बढ़ाते हुए वर्ष 2007 में भारत में और 2009 में यूक्रेन के सुमी में अत्याधुनिक दवा संयंत्र स्थापित किया।
​कुसुम ग्रुप यूक्रेन, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और फिलीपींस सहित 9 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 50 से अधिक जेनेरिक फॉर्मूलेशन दवाओं की आपूर्ति करता है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन पूर्ण युद्ध छिड़ने के बाद भी सुमी स्थित इस संयंत्र ने विषम परिस्थितियों में स्थानीय नागरिकों और अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाओं का उत्पादन जारी रखा था, जिसे अब रूसी हमलों ने पूरी तरह ठप कर दिया है।

​कूटनीतिक हलकों में हलचल, 400 करोड़ का नुकसान
​कुसुम ग्रुप स्वयं को ‘भारतीय जड़ों वाली यूक्रेनी कंपनी’ के रूप में परिभाषित करता है। भारत और रूस के बीच जहां रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं, वहीं भारतीय नागरिक द्वारा संचालित एक गैर-सैन्य, मानवीय चिकित्सा प्रतिष्ठान पर हुए इस सीधे और घातक हमले ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। ​प्रारंभिक आकलन के मुताबिक लगभग ₹400 करोड़ से अधिक का ढांचागत व तकनीकी नुकसान हुआ है। यूक्रेन के स्थानीय प्रशासन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक व स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे पर किया गया कायराना हमला करार दिया है। इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर कार्यरत भारतीय उपक्रमों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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