
संवाद 24 बांदा। अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर संत कृपाल सिंह विधि महाविद्यालय, लामा में शुक्रवार को विशेष व्याख्यान, छात्र संवाद और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को कानून के साथ-साथ न्याय, सामाजिक जिम्मेदारी, संवैधानिक अधिकारों और व्यावसायिक नैतिकता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (SC/ST Act) डॉ. विकास श्रीवास्तव, अपर जिला न्यायाधीश (POCSO) प्रदीप कुमार मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सौरभ सिंह (ADJ) तथा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने महात्मा गांधी और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित किया गया और उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।
मुख्य अतिथि डॉ. विकास श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के सिद्धांत आज भी न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित कानून के विभिन्न विधिक पक्षों पर चर्चा करते हुए कहा कि संविधान ने वंचित एवं कमजोर वर्गों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कानून की जानकारी के साथ उसके सामाजिक उद्देश्य को समझने पर भी जोर दिया।
अपर जिला न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने पॉक्सो कानून और बाल अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं की भूमिका केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण आवश्यक है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सौरभ सिंह ने कहा कि न्याय तक पहुंच प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका बताते हुए कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक सुलभ, त्वरित एवं निःशुल्क कानूनी सहायता पहुंचाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने विद्यार्थियों को आपराधिक मामलों की सुनवाई, अभियोजन प्रक्रिया और न्यायालय में प्रभावी कार्यशैली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विधि विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, न्यायालयीन शिष्टाचार और पेशेवर ईमानदारी को अपने कार्यजीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
महाविद्यालय की निदेशक डॉ. श्रीतमा द्विवेदी ने न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया के व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराने वाले ऐसे कार्यक्रम उनकी विधिक समझ को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और नैतिक विधिक शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने न्यायिक अधिकारियों से कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें विधिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक व्यावहारिक जानकारी दी।
इस अवसर पर महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन और स्वच्छ भारत अभियान विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। न्यायिक अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार चित्रों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।






