
संवाद 24 डेस्क। वायरलेस ईयरफोन की दुनिया में सैमसंग ने एक ऐसा उत्पाद पेश किया है, जो पारंपरिक ईयरबड्स से काफी अलग है। कंपनी ने गैलेक्सी श्रृंखला के तहत गैलेक्सी बड्स ऑन नाम से क्लिप-ऑन वायरलेस ईयरफोन पेश किए हैं। इन ईयरफोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें कान के भीतर डालने की जरूरत नहीं पड़ती। ये कान के बाहरी हिस्से पर क्लिप की तरह टिके रहते हैं और कान की नली को खुला छोड़ते हैं। सैमसंग का कहना है कि इस डिजाइन को लंबे समय तक पहनने में आराम और बाहर की आवाजों के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह उत्पाद ऐसे समय में सामने आया है जब वायरलेस ऑडियो उपकरणों में केवल बेहतर आवाज ही नहीं, बल्कि आराम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हाथों के बिना नियंत्रण जैसी सुविधाओं पर भी कंपनियां जोर दे रही हैं। गैलेक्सी बड्स ऑन इसी बदलाव का हिस्सा है। कंपनी ने इसमें सिर के इशारों से फोन कॉल स्वीकार करने, कॉल समाप्त करने, अलार्म हटाने और सूचनाओं से जुड़ी गतिविधियां नियंत्रित करने की सुविधा दी है।
ऐसा है गैलेक्सी बड्स ऑन का अनोखा डिजाइन
पारंपरिक ईयरफोन आम तौर पर कान की नली के भीतर जाकर फिट होते हैं। इससे बाहर की आवाज कुछ हद तक कम सुनाई देती है और लंबे समय तक पहनने पर कुछ लोगों को कान में दबाव या असहजता महसूस हो सकती है। गैलेक्सी बड्स ऑन में सैमसंग ने इसके विपरीत खुली बनावट अपनाई है। ईयरफोन कान के आसपास टिकता है और स्पीकर कान की नली को बंद नहीं करता। सैमसंग के अनुसार, कंपनी ने अलग-अलग प्रकार के कानों की बनावट से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन और विभिन्न परिस्थितियों में परीक्षण करके स्पीकर तथा बैटरी की स्थिति तय की है। संपर्क वाले हिस्से का क्षेत्र बढ़ाकर दबाव को अपेक्षाकृत समान रूप से बांटने और क्लिप के लचीलेपन को इस तरह समायोजित करने की कोशिश की गई है कि चलने या व्यायाम के दौरान भी यह कान पर स्थिर बना रहे। यानी इसका मकसद केवल नया दिखना नहीं है। सैमसंग इसे उन लोगों के लिए एक अलग विकल्प के रूप में पेश कर रहा है, जो संगीत सुनते समय भी अपने आसपास की आवाजें सुनना चाहते हैं।
सड़क पर चलते या दौड़ते समय क्यों उपयोगी हो सकता है?
खुले कान वाला डिजाइन गैलेक्सी बड्स ऑन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। जब ईयरफोन कान की नली को पूरी तरह बंद नहीं करता, तो आसपास की आवाजें सुनाई देती रहती हैं। मसलन, सड़क पर चलते समय वाहन की आवाज, साइकिल चलाते समय आसपास की गतिविधियां या दौड़ते समय दूसरे लोगों की आवाज सुनना आसान हो सकता है। सैमसंग ने भी इस उत्पाद को विशेष रूप से बाहरी गतिविधियों और व्यायाम के संदर्भ में प्रस्तुत किया है। कंपनी के अनुसार, उपयोगकर्ता गहरे संगीत अनुभव के लिए पारंपरिक इन-ईयर गैलेक्सी बड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि दौड़ने या बाहर घूमने जैसी परिस्थितियों में गैलेक्सी बड्स ऑन का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि खुले कान वाला डिजाइन आसपास की आवाज सुनने में मदद कर सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि सड़क पर चलते या वाहन चलाते समय संगीत सुनना पूरी तरह जोखिम-मुक्त हो जाता है। यातायात और स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक रहेगा।
खुला डिजाइन, लेकिन आवाज में समझौता नहीं
खुले कान वाले ईयरफोन के सामने एक बड़ी चुनौती होती है—कान की नली को बंद किए बिना पर्याप्त स्पष्ट और प्रभावशाली ध्वनि देना। इसके अलावा संगीत बाहर तक ज्यादा सुनाई देने की समस्या भी रहती है। सैमसंग ने गैलेक्सी बड्स ऑन में इन दोनों चुनौतियों को ध्यान में रखकर अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया है।
इसमें ट्विनबूस्ट स्पीकर दिए गए हैं, जिन्हें विशेष रूप से कम आवृत्ति वाली ध्वनि यानी गहरे बास को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही आसपास के वातावरण के अनुसार आवाज का स्तर बदलने वाली स्वचालित ध्वनि-समायोजन सुविधा भी दी गई है। कंपनी ने इसमें ध्वनि रिसाव कम करने की तकनीक भी पहली बार गैलेक्सी बड्स श्रृंखला में जोड़ी है। इसका उद्देश्य यह है कि उपयोगकर्ता जो सुन रहा है, उसकी आवाज आसपास मौजूद लोगों तक कम से कम पहुंचे। सैमसंग ने इसे पुस्तकालय या कैफे जैसे स्थानों में उपयोग के लिहाज से भी उपयोगी बताया है।
एक बार चार्ज करने पर 9.5 घंटे तक संगीत
गैलेक्सी बड्स ऑन में क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन एस7 पहली पीढ़ी का साउंड प्लेटफॉर्म और उच्च दक्षता वाला क्लास-डी प्रवर्धक लगाया गया है। सैमसंग के अनुसार, इसकी मदद से बिजली की खपत को नियंत्रित करते हुए एक बार चार्ज करने पर अधिकतम 9.5 घंटे तक लगातार संगीत सुना जा सकता है। हालांकि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की वास्तविक बैटरी अवधि उपयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। आवाज का स्तर, जुड़ी सुविधाएं और इस्तेमाल का तरीका वास्तविक बैटरी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए 9.5 घंटे को कंपनी द्वारा बताया गया अधिकतम दावा समझना चाहिए, न कि हर उपयोगकर्ता को मिलने वाला निश्चित समय।
अब हाथ लगाने की भी जरूरत नहीं, सिर हिलाकर होगा काम
गैलेक्सी बड्स ऑन की सबसे दिलचस्प सुविधा हेड जेस्चर यानी सिर के इशारों से नियंत्रण है। इसमें उपयोगकर्ता को कुछ परिस्थितियों में ईयरफोन या फोन पर हाथ लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। सैमसंग के अनुसार, सिर को ऊपर-नीचे हिलाकर आने वाली कॉल स्वीकार की जा सकती है और दाएं-बाएं हिलाकर कॉल को अस्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा सिर के इशारों का इस्तेमाल अलार्म हटाने और फोन की सूचनाओं से संबंधित कुछ कार्यों के लिए भी किया जा सकता है। सैमसंग ने गैलेक्सी बड्स4 श्रृंखला में भी हेड जेस्चर सुविधा उपलब्ध कराई है, जहां कंपनी के अनुसार सिर के ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं आंदोलनों को कॉल नियंत्रण के लिए पहचाना जाता है। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने उपकरणों में हाथ रहित नियंत्रण को धीरे-धीरे अधिक व्यापक बना रही है।
तीन माइक्रोफोन और आवाज पहचानने की तकनीक
किसी भी खुले कान वाले ईयरफोन के लिए कॉल की गुणवत्ता महत्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि बाहरी आवाज सीधे कान तक पहुंचती रहती है। गैलेक्सी बड्स ऑन में सैमसंग ने कॉल की गुणवत्ता सुधारने के लिए तीन माइक्रोफोन, आवाज उत्पन्न होने पर होने वाले कंपन को पहचानने वाला सेंसर और मशीन आधारित प्रसंस्करण का इस्तेमाल किया है।
कंपनी के अनुसार, आवाज पहचानने वाली यह व्यवस्था उपयोगकर्ता की आवाज को आसपास के शोर से अलग करने में मदद करती है। इसका फायदा तेज हवा में बाहर बात करने या घर में किसी उपकरण के शोर के बीच फोन पर बातचीत के दौरान मिल सकता है। सैमसंग ने इसे इंटेलिजेंट क्लियर कॉल तकनीक के साथ जोड़ा है। इसका उद्देश्य बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति तक उपयोगकर्ता की आवाज को अधिक स्पष्ट रूप में पहुंचाना है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी जुड़ा है नया ईयरफोन
गैलेक्सी बड्स ऑन केवल संगीत सुनने वाला उपकरण नहीं है। इसे सैमसंग के कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पारिस्थितिकी तंत्र से भी जोड़ा गया है। अनुकूल गैलेक्सी स्मार्टफोन या टैबलेट के साथ इसे जोड़ने पर उपयोगकर्ता बिना फोन हाथ में लिए कई कार्य कर सकता है। सैमसंग के अनुसार, उपयोगकर्ता आवाज के जरिए जेमिनी लाइव शुरू कर सकता है। इसके लिए गैलेक्सी बड्स ऑन पहनकर निर्धारित आवाज आदेश देना होगा। इसके अलावा त्वरित आवाज नोट बनाने की सुविधा भी दी गई है। यह सुविधा उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें चलते-फिरते कोई विचार, जरूरी बात या छोटा नोट दर्ज करना हो। ईयरफोन के पीछे दिए गए स्पर्श क्षेत्र को देर तक दबाकर आवाज रिकॉर्ड की जा सकती है। बाद में समर्थित उपकरणों पर बिक्सबी के जरिए इन रिकॉर्डिंग को खोजने की सुविधा भी उपलब्ध है।
क्या फोन निकालने की जरूरत खत्म हो जाएगी?
गैलेक्सी बड्स ऑन की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि उपयोगकर्ता को हर छोटे काम के लिए स्मार्टफोन हाथ में न लेना पड़े। कॉल का जवाब देना हो, अलार्म हटाना हो, आवाज नोट बनाना हो या कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक से बातचीत करनी हो—कई काम ईयरफोन के माध्यम से किए जा सकते हैं। लेकिन इन सुविधाओं की उपलब्धता जुड़े हुए गैलेक्सी उपकरण, सॉफ्टवेयर संस्करण और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। सैमसंग ने विशेष रूप से बताया है कि कुछ सुविधाओं के लिए गैलेक्सी कृत्रिम बुद्धिमत्ता समर्थित उपकरण आवश्यक हैं। इसलिए केवल ईयरफोन खरीद लेने से सभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुविधाएं हर स्मार्टफोन पर उपलब्ध होंगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
भारत में कब आएगा?
सैमसंग ने गैलेक्सी बड्स ऑन को सबसे पहले दक्षिण कोरिया में उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार इसकी बिक्री 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। शुरुआती तौर पर यह काले रंग में उपलब्ध होगा और इसकी कीमत 2,99,000 दक्षिण कोरियाई वॉन रखी गई है। कंपनी ने कहा है कि वैश्विक बाजारों में इसे बाद में चरणबद्ध तरीके से पेश किया जाएगा। इस समय भारत में इसकी आधिकारिक कीमत और बिक्री की तारीख की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए भारतीय बाजार में इसकी संभावित कीमत को लेकर सामने आने वाले अनुमान को आधिकारिक जानकारी नहीं माना जाना चाहिए।
क्या यह पारंपरिक ईयरबड्स की जगह लेगा?
गैलेक्सी बड्स ऑन को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि खुले कान वाला डिजाइन पारंपरिक ईयरबड्स की जगह ले लेगा। दोनों की उपयोगिता अलग है। पारंपरिक इन-ईयर ईयरफोन कान को अधिक बंद करके संगीत में बेहतर अलगाव और गहरा सुनने का अनुभव देने के लिए उपयोगी होते हैं। इसके विपरीत खुले कान वाले उपकरण आसपास की आवाजों से जुड़े रहने को प्राथमिकता देते हैं। सैमसंग स्वयं भी दोनों उत्पाद श्रेणियों को अलग-अलग परिस्थितियों के लिए प्रस्तुत कर रहा है। इसका संकेत कंपनी की उस रणनीति से मिलता है जिसमें गहरे श्रव्य अनुभव के लिए पारंपरिक गैलेक्सी बड्स और बाहरी गतिविधियों के लिए गैलेक्सी बड्स ऑन को अलग विकल्प के रूप में रखा गया है।
सैमसंग की नई दिशा क्या बताती है?
गैलेक्सी बड्स ऑन का महत्व केवल एक नए ईयरफोन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह पहनने योग्य उपकरणों के बदलते स्वरूप की ओर भी संकेत करता है। पहले वायरलेस ईयरफोन का मुख्य उद्देश्य तार हटाकर संगीत सुनाना था। अब कंपनियां इन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक, आवाज नोट, कॉल नियंत्रण, स्वास्थ्य और दैनिक कार्यों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सैमसंग का नया उपकरण इसी बदलाव को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। कान के भीतर जाने वाले ईयरफोन से अलग क्लिप-ऑन बनावट, आसपास की आवाज सुनने की सुविधा, सिर के इशारों से नियंत्रण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाओं का मेल इसे कंपनी के मौजूदा गैलेक्सी बड्स परिवार में एक अलग श्रेणी बनाता है।
ईयरफोन की दुनिया में बदल रहा है पहनने का तरीका
गैलेक्सी बड्स ऑन के साथ सैमसंग ने वायरलेस ईयरफोन को कान की नली से बाहर निकालकर कान के बाहरी हिस्से तक पहुंचाने की कोशिश की है। इसका खुला डिजाइन, ट्विनबूस्ट स्पीकर, ध्वनि रिसाव कम करने वाली तकनीक, स्वचालित आवाज नियंत्रण, 9.5 घंटे तक का दावा किया गया लगातार संगीत समय और तीन माइक्रोफोन इसे पारंपरिक ईयरबड्स से अलग बनाते हैं। सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली सुविधा सिर के इशारों से नियंत्रण है। सिर हिलाकर कॉल स्वीकार या अस्वीकार करना और कुछ अन्य कार्यों को नियंत्रित करना आने वाले समय में पहनने योग्य उपकरणों के साथ मनुष्य के संपर्क का एक नया तरीका बन सकता है। फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं को इसकी कीमत और भारत में उपलब्धता की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि सैमसंग ने गैलेक्सी बड्स ऑन के जरिए यह संदेश जरूर दिया है कि भविष्य के ईयरफोन केवल कान में लगाए जाने वाले छोटे स्पीकर नहीं होंगे, बल्कि वे उपयोगकर्ता के आसपास की दुनिया, स्मार्टफोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच एक नया संपर्क माध्यम भी बन सकते हैं।






