
कन्नौज/उमर्दा। ठठिया थाना क्षेत्र के ग्राम जनखत में गुरुवार को विशाल दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ग्रामीण अंचल की पारंपरिक कुश्ती को समर्पित इस आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। अखाड़े में पहलवानों ने अपने दांव-पेंच और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।
अखाड़े में उतरे विभिन्न राज्यों के पहलवान
दंगल में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य राज्यों से आए पहलवानों ने भी हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान जम्मू के फैजल गनी और बनारस के सुघर सिंह के बीच हुई कुश्ती विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुकाबले में बनारस के पहलवान सुघर सिंह विजेता रहे। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड से आए पहलवानों ने भी अखाड़े में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मंत्री असीम अरुण ने पहुंचकर बढ़ाया पहलवानों का हौसला
दंगल में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने अखाड़े में मौजूद पहलवानों से परिचय प्राप्त किया और उनके प्रदर्शन का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान आयोजन समिति को 11 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई।जनखत में दंगल स्थल पहले से ही स्थानीय खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। फरवरी 2026 में मंत्री असीम अरुण ने यहां विधायक निधि से कराए जा रहे दंगल स्थल के विकास कार्यों का निरीक्षण किया था। उस दौरान चबूतरे, प्रकाश व्यवस्था और दर्शकों के बैठने के लिए सीढ़ियों से जुड़े निर्माण कार्यों का भी उल्लेख किया गया था।
ग्रामीणों के सहयोग से हुआ आयोजन
दंगल का आयोजन जनखत के प्रधान प्रशासक रावेन्द्र सिंह तथा ग्रामीणों के सहयोग से कराया गया। पारंपरिक कुश्ती को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देर शाम तक अखाड़े में मुकाबलों को लेकर दर्शकों में उत्साह बना रहा।आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठठिया थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौजूद रहे। पुलिस की मौजूदगी में दंगल प्रतियोगिता शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
परंपरा, खेल और ग्रामीण उत्साह का संगम बना जनखत का अखाड़ा
जनखत में आयोजित दंगल ने ग्रामीण क्षेत्र में कुश्ती की पारंपरिक संस्कृति और खेल भावना को एक बार फिर सामने रखा। अखाड़े में विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों के मुकाबलों ने दर्शकों का मनोरंजन किया, वहीं आयोजन में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता ने इसे स्थानीय स्तर पर विशेष आयोजन का रूप दिया।






