
संवाद 24 हरदोई। जिले में लगातार बढ़ रहे नदियों के जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा, रामगंगा, गर्रा, सई और गोमती नदियों के उफान के चलते कई गांवों में पानी पहुंच गया है। कहीं घरों के आसपास जलभराव है तो कहीं गांवों को जोड़ने वाले रास्ते पानी में डूब गए हैं। तेज बहाव वाले मार्गों पर आवागमन रोकना पड़ा है, जबकि कई स्थानों पर ग्रामीणों को नाव के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है। बाढ़ का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा की जरूरतों, पशुओं के चारे और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। हजारों लोग बाढ़ और जलभराव के बीच मुश्किल परिस्थितियों में दिन गुजार रहे हैं।
बिलग्राम में कई गांव पानी से घिरे
बिलग्राम क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। राइजिंग पुरवा, चिरंजू पुरवा, गुलाब पुरवा, बगिया पुरवा, मक्कू पुरवा और राजघाट सहित कई गांवों में पानी पहुंच गया है।
संपर्क मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों का आसपास के कस्बों और बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। जिन रास्तों पर पानी का बहाव तेज है, वहां लोग जोखिम उठाने से बच रहे हैं। जरूरत का सामान लाने के लिए भी ग्रामीणों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
घर के साथ रोजी-रोटी की चिंता
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का इंतजाम चुनौती बन गया है। पानी से घिरे क्षेत्रों में बाजार तक पहुंचना कठिन होने के कारण खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान जुटाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के लिए पशुओं के चारे की व्यवस्था भी बड़ी समस्या बन गई है। वहीं घरों में खाना पकाने के लिए सूखी लकड़ी और ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। बाढ़ के कारण कई परिवारों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
बाढ़ का असर स्कूली बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है। मक्कू पुरवा निवासी कमल के अनुसार, पानी भरने के बाद बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है और कई बार स्कूल बंद होने के कारण उनकी पढ़ाई रुक जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कीचड़ और खराब रास्तों के कारण बच्चों की स्कूल तक पहुंच आसान नहीं होती। इससे हर साल बारिश और बाढ़ के मौसम में उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
ग्रामीण बोले- हर साल लौट आती है यही परेशानी
चिरंजू पुरवा निवासी रामप्रकाश ने बताया कि क्षेत्र में हर साल बाढ़ की समस्या आती है। उनके मुताबिक लगातार बाढ़ की स्थिति के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी मुश्किल होती है और कई बार भोजन तक के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ उनके लिए केवल कुछ दिनों की परेशानी नहीं है। पानी बढ़ने के साथ आवागमन, रोजगार, पशुओं के चारे और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं एक साथ खड़ी हो जाती हैं।
राहत पहुंचाने में जुटा प्रशासन
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों की मदद करने का दावा किया गया है। जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय किया गया है। प्रशासन ने लोगों से किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
फिलहाल नदियों का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों की चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। पानी कम होने तक प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के सामने सुरक्षित आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती बनी रहेगी।






