नौकरी की तैयारी कर रहे हैं? रिज्यूमे में सामग्री और प्रारूप दोनों का रखें ध्यान, बढ़ सकते हैं चयन के मौके

संवाद 24 डेस्क। नौकरी की तलाश में जुटे अभ्यर्थियों के लिए रिज्यूमे महज एक कागज या कंप्यूटर पर तैयार किया गया दस्तावेज नहीं है। यह नियोक्ता के सामने उम्मीदवार का पहला परिचय होता है। भर्ती करने वाला अधिकारी उम्मीदवार से पहली मुलाकात से पहले उसके रिज्यूमे के माध्यम से ही उसकी शिक्षा, अनुभव, कौशल, उपलब्धियों और पेशेवर रुचियों का अंदाजा लगाता है। ऐसे में रिज्यूमे में दी गई जानकारी के साथ-साथ उसे प्रस्तुत करने का तरीका भी महत्वपूर्ण हो जाता है। रोजगार संबंधी हालिया मार्गदर्शन में स्पष्ट और सुव्यवस्थित रिज्यूमे को प्राथमिकता देने तथा पद के अनुसार उसकी सामग्री में बदलाव करने की सलाह दी गई है।

अब केवल योग्यता लिखना पर्याप्त नहीं
एक समय था जब उम्मीदवार रिज्यूमे में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पूर्व अनुभव और व्यक्तिगत विवरण लिखकर उसे कई कंपनियों में भेज देते थे। लेकिन बदलती भर्ती प्रक्रिया में यह तरीका हमेशा प्रभावी नहीं माना जाता। बड़ी कंपनियों में आवेदन की प्रारंभिक छंटाई के लिए आवेदक चयन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्रणाली रिज्यूमे में मौजूद प्रमुख शब्दों, कौशल, अनुभव और अन्य आवश्यक योग्यताओं को पहचानकर आवेदन को आगे की प्रक्रिया के लिए छांट सकती है। इसलिए उम्मीदवार को यह समझना जरूरी है कि रिज्यूमे केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि कई मामलों में स्वचालित प्रणाली भी पढ़ सकती है।

जिस नौकरी के लिए आवेदन करें, उसी के अनुसार तैयार करें रिज्यूमे
रिज्यूमे तैयार करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर नौकरी के लिए बिल्कुल एक जैसा रिज्यूमे भेजने से बचना चाहिए। रोजगार विशेषज्ञों के अनुसार जिस पद के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसके विवरण को ध्यान से पढ़ना चाहिए और उसमें मांगी गई योग्यता, कौशल तथा कार्यक्षमता को समझना चाहिए। इसके बाद अपने अनुभव और कौशल में जो बातें उस पद से सीधे जुड़ी हैं, उन्हें रिज्यूमे में प्रमुख स्थान देना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि किसी पद के लिए आंकड़ों के विश्लेषण, दल के साथ काम करने और परियोजना संचालन का अनुभव मांगा गया है, तो उम्मीदवार के पास ये क्षमताएं हैं तो उन्हें स्पष्ट रूप से सामने लाना चाहिए।

रिज्यूमे की शुरुआत ही तय कर सकती है कि आगे पढ़ा जाएगा या नहीं
रिज्यूमे के सबसे ऊपर उम्मीदवार का नाम, संपर्क विवरण और संक्षिप्त पेशेवर परिचय होना उपयोगी रहता है। अनुभवी उम्मीदवार अपने प्रमुख अनुभव और उपलब्धियों का संक्षिप्त परिचय दे सकते हैं, जबकि नए उम्मीदवार अपनी शिक्षा, प्रमुख कौशल, प्रशिक्षण, परियोजनाओं और करियर उद्देश्य को सामने रख सकते हैं। रोजगार मार्गदर्शन के अनुसार शुरुआती परिचय दो-तीन पंक्तियों में स्पष्ट और संबंधित पद के अनुरूप रखा जा सकता है। इसमें ऐसे दावे करने से बचना चाहिए जिन्हें उम्मीदवार साक्षात्कार के दौरान प्रमाणित न कर सके।

अनुभव लिखते समय केवल जिम्मेदारियां नहीं, उपलब्धियां भी बताएं
कई उम्मीदवार अपने पिछले काम का विवरण देते समय केवल यह लिखते हैं कि उन्होंने क्या-क्या जिम्मेदारियां निभाईं। लेकिन नियोक्ता के लिए यह जानना अधिक उपयोगी हो सकता है कि उम्मीदवार ने उन जिम्मेदारियों के माध्यम से क्या परिणाम हासिल किए। इसलिए जहां संभव हो, काम के प्रभाव को संख्या या ठोस परिणाम के माध्यम से बताना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर केवल यह लिखने के बजाय कि “बिक्री बढ़ाने का काम किया”, उम्मीदवार यह बता सकता है कि उसके प्रयासों से बिक्री में कितनी वृद्धि हुई, कितने नए ग्राहक जुड़े या किसी प्रक्रिया में कितना समय बचा। रोजगार विशेषज्ञों के अनुसार उपलब्धियों को मापने योग्य परिणामों के साथ प्रस्तुत करने से उम्मीदवार के योगदान को समझना आसान होता है।

प्रमुख शब्दों का सही इस्तेमाल बन सकता है महत्वपूर्ण हथियार
नौकरी के विज्ञापन में बार-बार इस्तेमाल किए गए शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी पद के लिए किसी विशेष कौशल, तकनीक, प्रमाणपत्र या कार्य अनुभव की आवश्यकता बताई गई है और उम्मीदवार के पास वह योग्यता मौजूद है, तो उसे रिज्यूमे में स्पष्ट शब्दों में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि केवल स्वचालित प्रणाली को प्रभावित करने के लिए ऐसे शब्दों की अनावश्यक भरमार नहीं करनी चाहिए। उम्मीदवार को वही कौशल और योग्यताएं लिखनी चाहिए जो वास्तव में उसके पास हैं। गलत या बढ़ा-चढ़ाकर लिखी गई जानकारी साक्षात्कार के दौरान समस्या पैदा कर सकती है। नौकरी के विवरण से संबंधित प्रमुख शब्दों को स्वाभाविक रूप से परिचय, कौशल और अनुभव वाले हिस्से में शामिल किया जा सकता है।

प्रारूप जितना सरल होगा, पढ़ना उतना आसान होगा
रिज्यूमे का डिजाइन आकर्षक बनाने के चक्कर में कई उम्मीदवार अत्यधिक रंग, चित्र, प्रतीक, तालिकाएं, अलग-अलग खानों और सजावटी अक्षरों का इस्तेमाल करते हैं। यह देखने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन स्वचालित छंटाई प्रणाली के लिए जटिल प्रारूप कभी-कभी परेशानी पैदा कर सकता है। रोजगार संबंधी मार्गदर्शन में एक स्तंभ वाला सरल प्रारूप, स्पष्ट शीर्षक और सामान्य अक्षर शैली इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर रिज्यूमे बिल्कुल साधारण दिखाई दे। रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वाले उम्मीदवार अपने काम के अनुरूप थोड़ा अलग प्रारूप अपना सकते हैं, लेकिन जानकारी की पठनीयता और स्पष्टता से समझौता नहीं होना चाहिए। रिज्यूमे का उद्देश्य डिजाइन दिखाना नहीं, बल्कि उम्मीदवार की योग्यता को प्रभावी तरीके से सामने रखना है।

नए उम्मीदवार क्या लिखें, जब अनुभव नहीं है?
नौकरी की शुरुआत करने वाले युवाओं की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उनके पास कार्य अनुभव नहीं है। ऐसे उम्मीदवारों को रिज्यूमे खाली नहीं छोड़ना चाहिए। वे अपनी शैक्षणिक परियोजनाओं, प्रशिक्षण, औद्योगिक प्रशिक्षण, स्वयंसेवी कार्य, प्रतियोगिताओं, प्रमाणपत्रों, महाविद्यालयीन गतिविधियों और संबंधित कौशल को शामिल कर सकते हैं।
नए उम्मीदवारों के लिए रोजगार मार्गदर्शन में शिक्षा, कौशल, परियोजनाओं, प्रशिक्षण और उपलब्धियों को प्रमुखता देने की सलाह दी जाती है। यदि किसी विद्यार्थी ने किसी विषय से संबंधित परियोजना तैयार की है तो केवल उसका नाम लिखने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि उसमें उसकी भूमिका क्या थी, कौन-से कौशल इस्तेमाल किए गए और उससे क्या परिणाम प्राप्त हुआ।

रिज्यूमे कितना लंबा होना चाहिए?
रिज्यूमे की लंबाई को लेकर उम्मीदवारों में अक्सर भ्रम रहता है। कई लोग मानते हैं कि एक पृष्ठ से अधिक का रिज्यूमे गलत है, जबकि कुछ उम्मीदवार हर छोटी-बड़ी जानकारी जोड़कर कई पृष्ठों का रिज्यूमे बना देते हैं। वास्तव में लंबाई से अधिक महत्वपूर्ण प्रासंगिकता और स्पष्टता है।
रोजगार मार्गदर्शन के अनुसार अधिकांश पदों के लिए एक से दो पृष्ठ का सुव्यवस्थित रिज्यूमे पर्याप्त हो सकता है। कम अनुभव वाले उम्मीदवार एक पृष्ठ में अपनी महत्वपूर्ण जानकारी समेट सकते हैं, जबकि अधिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवश्यकता के अनुसार दूसरा पृष्ठ जोड़ सकते हैं। केवल पृष्ठों की संख्या बढ़ाने के लिए गैर-जरूरी जानकारी जोड़ना उचित नहीं माना जाता।

अक्षर शैली और खाली स्थान का भी रखें ध्यान
रिज्यूमे में बहुत छोटे अक्षरों का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा जानकारी भर देना सही रणनीति नहीं है। स्पष्ट और आसानी से पढ़े जाने वाले अक्षरों का प्रयोग करना चाहिए। रोजगार संबंधी मार्गदर्शन में सामान्यतः 10 से 12 अंक के अक्षर आकार की सलाह दी जाती है। पृष्ठ पर पर्याप्त खाली स्थान होने से जानकारी को पढ़ना आसान रहता है।
शीर्षकों को स्पष्ट रखा जा सकता है और अनुभव तथा उपलब्धियों को छोटे बिंदुओं में लिखा जा सकता है। लंबे-लंबे अनुच्छेदों से बचना चाहिए, क्योंकि भर्ती अधिकारी को कम समय में उम्मीदवार की प्रमुख योग्यताएं समझनी होती हैं।

व्यक्तिगत जानकारी में भी बरतें सावधानी
रिज्यूमे में नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल पता और आवश्यक पेशेवर जानकारी देना सामान्य है। लेकिन ऐसी व्यक्तिगत जानकारी देने से बचना चाहिए जिसका नौकरी से कोई संबंध नहीं है। उम्मीदवारों को अपना पता, पहचान संबंधी अनावश्यक विवरण या अन्य संवेदनशील जानकारी हर जगह साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
इसी तरह रिज्यूमे में गलत संपर्क नंबर या पुराना ईमेल पता छोड़ देना भी गंभीर गलती हो सकती है। आवेदन भेजने से पहले यह जांचना चाहिए कि नियोक्ता उम्मीदवार से संपर्क कर सकेगा या नहीं।

तारीखों और जानकारी में एकरूपता जरूरी
रिज्यूमे में शिक्षा और रोजगार का विवरण देते समय तारीखों का प्रारूप एक जैसा रखना चाहिए। यदि एक जगह महीने और वर्ष का इस्तेमाल किया गया है तो दूसरी जगह भी वही तरीका अपनाना बेहतर है। नौकरी की अवधि, पद का नाम और संस्था का नाम स्पष्ट होना चाहिए।
गलत तारीखें या अलग-अलग जगह अलग जानकारी लिखने से उम्मीदवार की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं। इसलिए अंतिम रूप देने से पहले रिज्यूमे की प्रत्येक पंक्ति की जांच करना जरूरी है।

वर्तनी की छोटी गलती भी दे सकती है गलत संकेत
रिज्यूमे भेजने से पहले वर्तनी और भाषा की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। गलत नाम, संस्था का नाम, पद का नाम, तारीख या कौशल की गलत वर्तनी उम्मीदवार की पेशेवर छवि को प्रभावित कर सकती है। रोजगार विशेषज्ञ भी अंतिम रूप से जमा करने से पहले रिज्यूमे को ध्यान से पढ़ने और किसी दूसरे व्यक्ति से उसकी समीक्षा कराने की सलाह देते हैं।
विशेष रूप से नए उम्मीदवारों को यह जांचना चाहिए कि उनके शैक्षणिक प्रतिशत, पाठ्यक्रम, प्रमाणपत्र और परियोजनाओं की जानकारी सही है। किसी भी उपलब्धि को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने के बजाय तथ्यात्मक जानकारी देना अधिक उचित है।

रिज्यूमे की फाइल भी सही रखें
ऑनलाइन आवेदन करते समय रिज्यूमे किस प्रारूप में जमा करना है, यह नौकरी के विज्ञापन में दिया हो तो उसी निर्देश का पालन करना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में पाठ-आधारित पीडीएफ या दस्तावेज प्रारूप उपयोगी हो सकता है, लेकिन यदि किसी संस्था ने विशेष प्रारूप मांगा है तो उसी में आवेदन करना चाहिए। कुछ स्वचालित प्रणालियां जटिल डिजाइन या चित्रों से भरे दस्तावेजों को ठीक तरह से पढ़ नहीं पातीं।
फाइल का नाम भी स्पष्ट रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए उम्मीदवार अपने नाम और पद का उल्लेख करके फाइल सुरक्षित कर सकता है। इससे अनेक आवेदनों के बीच दस्तावेज पहचानना आसान रहता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद लें, लेकिन पूरी तरह उस पर निर्भर न रहें
आजकल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों की सहायता से रिज्यूमे की भाषा सुधारना, नौकरी के विवरण से संबंधित प्रमुख शब्द पहचानना और प्रारूप को व्यवस्थित करना आसान हो गया है। लेकिन इन उपकरणों से तैयार सामग्री को बिना जांचे भेजना उचित नहीं है। रोजगार विशेषज्ञों के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सुझावों को उम्मीदवार को स्वयं जांचना चाहिए, ताकि गलत दावे, अनावश्यक शब्दों की भरमार और कृत्रिम भाषा से बचा जा सके।
रिज्यूमे में वही उपलब्धियां और कौशल शामिल होने चाहिए जिन्हें उम्मीदवार वास्तविक उदाहरणों के साथ साक्षात्कार में समझा सके। यही बात उसे दूसरे उम्मीदवारों से अलग पहचान देने में मदद कर सकती है।

अंतिम जांच के लिए अपनाएं यह सरल तरीका
नौकरी के लिए आवेदन भेजने से पहले उम्मीदवार को कम से कम पांच बातों की जांच करनी चाहिए। पहली, क्या रिज्यूमे में जिस पद के लिए आवेदन किया जा रहा है उससे संबंधित कौशल स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं? दूसरी, क्या अनुभव और उपलब्धियां केवल जिम्मेदारियों के बजाय परिणामों के साथ लिखी गई हैं? तीसरी, क्या प्रारूप सरल और पढ़ने योग्य है? चौथी, क्या वर्तनी, तारीख और संपर्क विवरण सही हैं? पांचवीं, क्या रिज्यूमे में ऐसी कोई जानकारी तो नहीं है जो संबंधित नौकरी के लिए अनावश्यक है?
यदि इन सवालों के जवाब संतोषजनक हैं तो रिज्यूमे को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

रिज्यूमे को आवेदन नहीं, अपनी पेशेवर कहानी समझें
नौकरी पाने की प्रक्रिया में रिज्यूमे चयन की गारंटी नहीं देता, लेकिन यह उम्मीदवार को प्रारंभिक छंटाई से आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वर्तमान भर्ती व्यवस्था में एक ओर स्वचालित आवेदक छंटाई प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भर्ती अधिकारी कम समय में उम्मीदवार की प्रासंगिकता समझना चाहते हैं। इसलिए अच्छे रिज्यूमे में तीन बातों का संतुलन जरूरी है—सही और प्रमाणित जानकारी, पद के अनुरूप प्रासंगिक सामग्री और सरल, स्पष्ट प्रारूप।
नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को यह समझना चाहिए कि रिज्यूमे में हर उपलब्धि लिख देना ही बेहतर रिज्यूमे की पहचान नहीं है। सही उपलब्धि को सही स्थान पर रखना अधिक महत्वपूर्ण है। जिस पद के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसके अनुरूप अपने अनुभव और कौशल को सामने लाना, उपलब्धियों को यथासंभव ठोस परिणामों के साथ बताना और दस्तावेज को सरल एवं पठनीय रखना आज की भर्ती प्रक्रिया में अधिक उपयोगी रणनीति हो सकती है। अंततः रिज्यूमे उम्मीदवार की पूरी पेशेवर यात्रा नहीं, बल्कि उस यात्रा का ऐसा संक्षिप्त परिचय होना चाहिए जो नियोक्ता को यह समझने में मदद करे कि उम्मीदवार संबंधित पद के लिए किस प्रकार उपयोगी हो सकता है।

Geeta Singh
Geeta Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *