
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 06 अक्टूबर 2026, मंगलवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – एकादशी अगले दिन (07 अक्टूबर) प्रातः 00:36 AM तक, तत्पश्चात् द्वादशी
वार – मंगलवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – आश्लेषा रात्रि 10:18 PM तक, तत्पश्चात् मघा
योग – सिद्ध प्रातः 07:20 AM तक, तत्पश्चात् साध्य अगले दिन (07 अक्टूबर) प्रातः 04:59 AM तक, तत्पश्चात् शुभ
करण – बव दोपहर 01:21 PM तक, तत्पश्चात् बालव अगले दिन (07 अक्टूबर) प्रातः 00:36 AM तक, तत्पश्चात् कौलव
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:06 AM
सूर्यास्त – 05:53 PM
चन्द्रोदय – अगले दिन (07 अक्टूबर) 02:37 AM
चन्द्रास्त – 03:13 PM
चन्द्र राशि – कर्क रात्रि 10:18 PM तक, तत्पश्चात् सिंह
अभिजित मुहूर्त – 11:36 AM से 12:23 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:57 PM से 02:44 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 02:56 PM से 04:24 PM तक
यमगण्ड – 09:03 AM से 10:31 AM तक
गुलिक काल – 11:59 AM से 01:28 PM तक
दुर्मुहूर्त – 08:27 AM से 09:14 AM तक एवं 10:48 PM से 11:36 PM तक
कंटक – 06:53 AM से 07:40 AM तक
शुभ चौघड़िया
रोग – 06:06 AM से 07:34 AM तक
उद्वेग – 07:34 AM से 09:03 AM तक
चर – 09:03 AM से 10:31 AM तक
लाभ – 10:31 AM से 11:59 AM तक
अमृत – 11:59 AM से 01:28 PM तक
शुभ – 02:56 PM से 04:24 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – उत्तर
यात्रा उपाय – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो गुड़ या धनिया खाकर अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
इंदिरा एकादशी व्रत एवं एकादशी श्राद्ध (पितृपक्ष)
आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘इंदिरा एकादशी’ कहा जाता है। पितृपक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करने और इसका पुण्य पितरों को समर्पित करने से यमलोक में कष्ट भोग रहे पूर्वजों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिन परिजनों का देहावसान एकादशी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध भी आज ही संपन्न किया जाता है।
आश्लेषा नक्षत्र एवं गंडमूल विचार
रात्रि 10:18 तक आश्लेषा नक्षत्र रहेगा, तत्पश्चात् मघा नक्षत्र प्रारंभ होगा। दोनों ही नक्षत्र गंडमूल श्रेणी में आते हैं। आश्लेषा के स्वामी बुध देव और अधिपति सर्प हैं। यह नक्षत्र शोध, राजनीतिक रणनीतियों और गूढ़ विषयों के लिए अनुकूल है। रात्रि 10:18 तक जन्मे शिशुओं की मूल शांति करानी चाहिए।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज रात्रि 10:18 तक चन्द्रमा अपनी स्वराशि कर्क में संचरण करेंगे, जिसके बाद सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश करेंगे। दिनभर साध्य योग का प्रभाव रहने से साधना, संकल्प और कार्य सिद्धि के लिए उत्तम योग बनेगा। एकादशी और मंगलवार के पावन संयोग में विष्णु जी के साथ-साथ श्री हनुमान जी की आराधना संकटों से मुक्ति दिलाएगी।

आज का राशिफल – 06 अक्टूबर 2026 मंगलवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दिन के समय घरेलू कार्यों में व्यस्तता रहेगी। रात्रि 10:18 के बाद चन्द्रमा के पंचम भाव में आने से बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी और संतान से शुभ समाचार मिलेगा।
उपाय – हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
पराक्रम और साहस में वृद्धि बनी रहेगी। रात्रि के बाद चन्द्रमा चतुर्थ भाव में प्रवेश करेंगे, जिससे पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान रहेगा। माताजी का आशीर्वाद लें।
उपाय – भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और वाणी से लाभ होगा। देर रात चन्द्रमा के तृतीय भाव में आने से भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और आत्मविश्वास में भारी वृद्धि होगी।
उपाय – गाय को भीगी हुई चने की दाल या गुड़ खिलाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
रात्रि तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक शांति और संतुष्टि बनी रहेगी। रात्रि के बाद धन भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से अटका हुआ धन मिलने के योग बनेंगे।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
दिन में धार्मिक और परोपकारी कार्यों में धन व्यय होगा। रात्रि 10:18 के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर करेंगे, जिससे नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल में रोली मिलाकर अर्घ्य दें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए स्रोत प्रदान करेंगे। मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। देर रात के बाद अनावश्यक खर्चों और यात्रा को लेकर थोड़ा सतर्क रहें।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि होगी। अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। रात्रि के बाद चन्द्रमा के एकादश भाव में आने से व्यावसायिक लाभ के मजबूत योग बनेंगे।
उपाय – जरूरतमंदों को फल या अन्न का दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
भाग्य का साथ मिलेगा और धार्मिक कार्यों में मन लगेगा। रात्रि के बाद दशम भाव में चन्द्रमा के आने से करियर में नए अवसर और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें या हनुमान चालीसा पढ़ें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
दिन के समय स्वास्थ्य और खानपान को लेकर सावधानी बरतें। रात्रि 10:18 के बाद भाग्य भाव में चन्द्रमा के गोचर से अटके कार्य गति पकड़ेंगे और भाग्य का सहयोग मिलेगा।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
दाम्पत्य जीवन में मधुरता और साझेदारी में लाभ रहेगा। रात्रि के बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से बचें।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और रोगों पर विजय दिलाएगा। रात्रि के बाद सप्तम भाव में चन्द्रमा के आने से जीवनसाथी के साथ संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
उपाय – मंगलवार को बंदरों को गुड़-चना खिलाएं।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
बौद्धिक कार्यों और अध्ययन में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से प्रसन्नता होगी। रात्रि के बाद षष्ठ भाव में चन्द्रमा होने से नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का उत्तम फल मिलेगा।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में कपूर जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें।
॥ शुभम भवतु ॥

