
संवाद 24 नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात का सन्नाटा अचानक चीख-पुकार, धुएं के गुबार और दहकती लपटों में तब्दील हो गया। दिल्ली से महोबा की ओर तेज रफ्तार से जा रही एक निजी डबल डेकर स्लीपर बस बुधवार देर रात अचानक आग का गोला बन गई। यह दिल दहला देने वाला हादसा जेवर क्षेत्र में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इंटरचेंज के नजदीक माइलस्टोन 35 के पास पेश आया। लपटों की तीव्रता इतनी भयानक थी कि बस के अंदर गहरी नींद में सो रहे नौ यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे जिंदा जल गए। मृतकों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
आधी रात का सफर और अचानक भड़की चिंगारी
मिली जानकारी के अनुसार, ‘राज कल्पना ट्रेवल्स’ की यह डबल डेकर स्लीपर बस सवारियों को लेकर दिल्ली से महोबा के लिए रवाना हुई थी। आधी रात के वक्त अधिकांश मुसाफिर अपनी-अपनी बर्थ पर गहरी नींद में थे। प्रत्यक्षदर्शियों और बच निकले मुसाफिरों के मुताबिक, जैसे ही बस जेवर एयरपोर्ट इंटरचेंज के पास पहुंची, चालक को इंजन वाले हिस्से से असामान्य धुआं और आग की लपटें उठती नजर आईं।
खतरे को भांपते हुए चालक ने तुरंत गाड़ी को ओवरटेकिंग लेन से हटाकर एक्सप्रेसवे के किनारे शोल्डर लेन पर रोक दिया। चालक और परिचालक ने आग बुझाने की कोशिश करते हुए जोर-जोर से चिल्लाकर अंदर सो रहे यात्रियों को जगाने की कोशिश की। देखते ही देखते लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
धुएं का बवंडर, चीख-पुकार और खिड़कियों से कूदते लोग
जैसे ही आग ने विकराल रूप धारण किया, बस के भीतर अफरातफरी मच गई। दमघोंटू काले धुएं के कारण केबिन के भीतर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। यात्री जान बचाने के लिए दरवाजे और खिड़कियों की तरफ भागे। कई लोगों ने बिना सोचे-समझे चलती-रुकती बस की खिड़कियों और दरवाजों से छलांग लगा दी। लगभग 20 से अधिक यात्रियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। बच निकले एक यात्री ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह गहरी नींद में था जब किसी ने जोर-जोर से दरवाजा पीटा। आंख खुली तो चारों तरफ धुआं और चीखें थीं। लोग जूते-चप्पल और सामान छोड़कर बस अपनी जान बचाने के लिए बाहर कूद रहे थे। बदकिस्मती से नौ मुसाफिर आग और धुएं के बीच अंदर ही घिर गए और बाहर नहीं निकल पाए।
पांच घंटे तक चला भीषण रेस्क्यू, गैस कटर से काटी गई बस की बॉडी
हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही पुलिस बल, दमकल विभाग की कई गाड़ियां और यमुना एक्सप्रेसवे की पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अग्निशमन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया, लेकिन बस का ढांचा और अंदर रखा सामान घंटों तक सुलगता रहा।
आग इतनी भीषण थी कि अंदर फंसे यात्रियों के शरीर बुरी तरह जलकर कंकाल में तब्दील हो गए थे और कई अंग अलग-अलग बिखर गए थे। राहत और बचाव दल को करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। बस की लोहे की चादरों और बॉडी को गैस कटर से काटकर शवों और अवशेषों को बाहर निकाला गया, जिन्हें बाद में पोस्टमार्टम और पहचान के लिए कैलाश अस्पताल भेजा गया।
एक्सप्रेसवे पर रोका गया ट्रैफिक, दो गाड़ियां टकराईं
हादसे की गंभीरता और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने जेवर टोल प्लाजा और एयरपोर्ट इंटरचेंज पर करीब आधे घंटे तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। अचानक ट्रैफिक रुकने की वजह से पीछे आ रही दो कारें भी आपस में टकरा गईं, हालांकि उनमें किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। रेस्क्यू कार्य संपन्न होने और सड़क से मलबा हटाए जाने के बाद यातायात को फिर से बहाल किया जा सका।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लपटों के बीच बस से पटाखे और धमाके जैसी आवाजें भी आ रही थीं, जिससे आग के कारणों को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी ज्वलनशील सामग्री की वजह से, इसकी आधिकारिक पुष्टि फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
डीएनए जांच से होगी शिनाख्त, सुरक्षित बचे लोगों को भेजा गया गंतव्य
घटना की जानकारी मिलते ही उपजिलाधिकारी (एसडीएम) जेवर और पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। हादसे में सुरक्षित बचे और मामूली रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सभी यात्रियों को अन्य वाहनों और टेंपो ट्रैवलर के जरिए उनके गंतव्य की ओर रवाना किया।
चूंकि शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी सामान्य पहचान संभव नहीं है, इसलिए पुलिस बस बुकिंग चार्ट और मुसाफिरों की सूची के आधार पर उनके परिजनों से संपर्क साध रही है। अधिकारियों के मुताबिक, परिजनों के डीएनए सैंपल लेकर शवों के अवशेषों से मिलान कराया जाएगा, जिसके बाद ही आधिकारिक तौर पर मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।






