बुखार के बढ़ते मामलों के बीच गांवों में कथित झोलाछाप इलाज का खतरा, कम उम्र के युवाओं के हाथ में मरीजों की सेहत!

उमर्दा/तिर्वा, कन्नौज। बारिश के बाद क्षेत्र में मौसमी बीमारियों और बुखार के मामलों के बीच ग्रामीण इलाकों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता या पंजीकरण के इलाज किए जाने की शिकायतों ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ कम उम्र के युवक-युवतियां कथित रूप से क्लीनिक संचालित कर मरीजों को ड्रिप लगाने और जांच करने जैसी चिकित्सकीय गतिविधियां कर रहे हैं।

बुखार के मौसम में बढ़ी चिंता

कन्नौज जिले में हाल के दिनों में बुखार और संक्रामक रोगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बढ़ी है। अगस्त के अंत में तिर्वा और उमर्दा क्षेत्र में डेंगू के मामले सामने आने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। वहीं सितंबर की शुरुआत में ककरघटा गांव में बड़ी संख्या में लोगों के बुखार से पीड़ित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहुंचकर मरीजों की जांच और सैंपलिंग की थी।

कई गांवों में कथित अवैध क्लीनिकों के संचालन का आरोप

स्थानीय जानकारी के अनुसार ठठिया, सुर्सी, खैरनगर, औसेर, खानपुर, भदौसी, भुन्ना, भवानीपुर, पट्टी, दौलतपुर, जैनपुर, जनखत, उमरन और बस्ता समेत आसपास के गांवों में कई ऐसे निजी क्लीनिक संचालित होने की शिकायतें हैं, जहां इलाज करने वालों की चिकित्सकीय योग्यता और संस्थान के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि इन सभी स्थानों पर बिना पंजीकरण चिकित्सा गतिविधियां संचालित होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए संबंधित स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

ड्रिप और जांच को लेकर वायरल वीडियो का दावा

स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि कम उम्र के युवक-युवतियों द्वारा मरीजों को ड्रिप लगाने तथा खून के नमूने लेने के वीडियो पहले सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं। यदि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के पास निर्धारित चिकित्सकीय योग्यता या अधिकृत प्रशिक्षण नहीं है, तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है। संबंधित वीडियो और उनकी वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हो सकी है।

कथित ‘स्पेशलिस्ट’ बोर्डों की भी हो जांच

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ निजी क्लीनिकों के बोर्ड पर डेंगू, मलेरिया या अन्य बीमारियों के विशेषज्ञ होने संबंधी दावे लिखे जाते हैं। ऐसे दावों की सत्यता, संचालक की शैक्षिक योग्यता और क्लीनिक के आवश्यक पंजीकरण की जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जाने की मांग उठ रही है।

ककरघटा में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पहले ही सामने आ चुकी है

ककरघटा में बुखार फैलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर मरीजों की जांच की और रक्त के नमूने लिए थे। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में ग्रामीण निजी अस्पतालों और कथित झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराने को मजबूर थे।

अन्य जिलों में कार्रवाई, कन्नौज में भी अभियान की जरूरत

प्रदेश के अन्य जिलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपंजीकृत क्लीनिकों और कथित झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, औरैया में कार्रवाई के बावजूद कथित रूप से कुछ लोग मरीजों का उपचार करते पाए जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जबकि झांसी में दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने पर एक कथित अवैध क्लीनिक को सील करने की कार्रवाई की गई।

स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई का दिया भरोसा

दिए गए स्थानीय विवरण के अनुसार उपचिकित्सा अधिकारी कन्नौज महेंद्र सिंह ने कहा है कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर जल्द कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि विभागीय टीम क्षेत्र में जांच के दौरान कितने ऐसे क्लीनिकों को चिन्हित करती है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाती है।

मरीजों से अपील—गंभीर बीमारी में योग्य चिकित्सक से ही कराएं उपचार

बुखार, सांस संबंधी समस्या, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या डेंगू जैसे लक्षण होने पर मरीजों को बिना जांच के स्वयं दवा लेने अथवा अप्रमाणित उपचार पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। कन्नौज में हालिया डेंगू मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच और चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया है।

Shivpratap Singh
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