
कन्नौज। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति के बीच स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को संक्रामक एवं जलजनित बीमारियों से बचाने के लिए निगरानी और स्वास्थ्य सेवाएं तेज कर दी हैं। इसी क्रम में कन्नौज के कासिमपुर हलबा गांव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की जांच और उपचार किया गया।
जलस्तर बढ़ा तो स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के दौरान कासिमपुर समेत तटवर्ती गांवों में जलभराव की स्थिति सामने आई है। हालिया रिपोर्टों में कासिमपुर और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने तथा ग्रामीणों के सामने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ने का उल्लेख है।इसी पृष्ठभूमि में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की और आवश्यकतानुसार दवाएं उपलब्ध कराईं। शिविर का उद्देश्य बाढ़ और जलभराव के बीच संभावित संक्रामक बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार करना रहा।
38 ग्रामीणों की हुई जांच, सात में बुखार के लक्षण
स्वास्थ्य शिविर में कुल 38 मरीजों की जांच और उपचार किया गया। इनमें सात मरीज बुखार से पीड़ित पाए गए। स्वास्थ्य टीम ने इन मरीजों की मलेरिया और डेंगू की जांच कराई, जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।इसके अलावा सात मरीज त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित मिले, जबकि 24 अन्य बीमारियों से संबंधित मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां बांटी गई
जलभराव के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां वितरित कीं। ग्रामीणों को सलाह दी गई कि पीने के पानी को उबालकर अथवा निर्धारित तरीके से क्लोरीन से शुद्ध करने के बाद ही उसका इस्तेमाल करें।कन्नौज में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां वितरित करने तथा शुद्ध पेयजल और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की गतिविधियां हाल के दिनों में भी सामने आई हैं।
जमा पानी को लेकर स्वास्थ्य टीम ने किया सतर्क
स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को बताया कि बारिश और बाढ़ के बाद जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बना सकता है। ऐसे में घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई।ग्रामीणों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने और मच्छरदानी का प्रयोग करने के लिए भी जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी सावधानियों और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
गांव में बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत जांच की सलाह
स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों से अपील की कि तेज बुखार, दस्त, त्वचा संबंधी समस्या या अन्य बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतें और स्वास्थ्य केंद्र या शिविर में जांच कराएं। ग्राम प्रधान को भी गांव के बीमार लोगों को स्वास्थ्य शिविर तक पहुंचाने में सहयोग करने के लिए जागरूक किया गया।
कन्नौज में बाढ़ के साथ बढ़ी मच्छरजनित बीमारियों की चुनौती
कन्नौज में इस मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग पहले से निगरानी कर रहा है। अगस्त के अंत में जिले में डेंगू के चार मामलों की पुष्टि और मलेरिया के मामलों की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जागरूकता गतिविधियां बढ़ाई गईं।कासिमपुर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर इसी व्यापक निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। फिलहाल शिविर में जांचे गए सात बुखार के मरीजों की मलेरिया और डेंगू जांच निगेटिव आने से स्वास्थ्य टीम को राहत मिली है, हालांकि जलभराव के बीच ग्रामीणों को लगातार सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।






