
कन्नौज। जिले के चर्चित नवाब सिंह यादव प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। मामला उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें किशोरी से जुड़े पॉक्सो एवं दुष्कर्म प्रकरण में चिकित्सकीय परीक्षण करने वाली महिला डॉक्टर को कथित तौर पर धमकाने और गवाही प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कन्नौज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए मामले में कानून के अनुसार नए सिरे से आदेश पारित करने को कहा।
सीजेएम के आदेश को हाईकोर्ट ने भी दी थी चुनौती
न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने इस प्रकरण में जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था। सीजेएम कन्नौज ने 20 सितंबर 2025 को पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने एक जुलाई 2026 को राज्य की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता साफ किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—संज्ञान के चरण पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन उचित नहीं
18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ के समक्ष हुई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने माना कि सीजेएम ने संज्ञान के स्तर पर उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया, जो उस चरण की सीमाओं से आगे था। अदालत ने मामले को दोबारा सीजेएम के समक्ष भेजते हुए पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कानून के अनुसार नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए।
महिला चिकित्सक ने लगाया था धमकी देने का आरोप
यह प्रकरण तिर्वा क्षेत्र की किशोरी से जुड़े चर्चित मामले से संबंधित है। मुकदमे की जांच के दौरान महिला चिकित्सक डॉ. स्वास्तिका शालिनी ने किशोरी का चिकित्सकीय परीक्षण किया था। बाद में अदालत में गवाही के दौरान उन पर कथित रूप से बयान बदलने का दबाव बनाने और धमकी देने के आरोप सामने आए। इस संबंध में पुलिस ने अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच की और आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
मूल मामले में जांच के दौरान जुटाए गए थे कई साक्ष्य
इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, किशोरी से संबंधित मूल मामले की जांच में पीड़िता के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और डीएनए रिपोर्ट सहित विभिन्न सामग्रियों का उल्लेख किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद संबंधित आरोपों में आरोपपत्र दाखिल किया और मुकदमे की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में शुरू हुई।
गैंगस्टर मामले में पहले भी हो चुकी है न्यायिक कार्रवाई
नवाब सिंह यादव के खिलाफ कन्नौज में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जुलाई 2025 के आदेश में गैंगस्टर मामले की पृष्ठभूमि, मूल पॉक्सो प्रकरण और अन्य मुकदमों का उल्लेख किया गया था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक गैंगस्टर मामले में पुलिस ने नवाब सिंह यादव, वीरपाल उर्फ नीलू यादव और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की थी।
संपत्तियों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई
गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में कन्नौज प्रशासन द्वारा संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई है। जुलाई 2026 में मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नवाब सिंह यादव और उनके भाई नीलू यादव से जुड़े गिरोह की 11 संपत्तियां, जिनका कुल मूल्य करीब 5.25 करोड़ रुपये बताया गया, कुर्क की गई थीं। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई थी।
अब सीजेएम के नए आदेश पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब मामला फिर कन्नौज की सीजेएम अदालत के समक्ष जाएगा। अदालत को पुलिस की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों पर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करना होगा। इस आदेश के बाद इस प्रकरण में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निगाहें टिक गई हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित आरोपों में अंतिम दोषसिद्धि हो गई है; अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और कानून के आधार पर होगा।






