
संवाद 24 डेस्क। प्राथमिक विद्यालयों में बीएड डिग्री के आधार पर नियुक्त सहायक शिक्षकों के लिए लंबे समय से चर्चा में रहा छह महीने का ब्रिज कोर्स अब औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान यानी NIOS को इस विशेष पाठ्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। देशभर में इस पाठ्यक्रम के लिए 66,154 शिक्षकों ने आवेदन किया है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 33,640 शिक्षक शामिल हैं। यह संख्या कुल आवेदनों की आधी से अधिक है। पाठ्यक्रम की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है और इसका उद्देश्य संबंधित शिक्षकों को प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के लिए आवश्यक पेशेवर दक्षताओं से जोड़ना है।
आखिर क्यों जरूरी पड़ा बीएड शिक्षकों के लिए यह ब्रिज कोर्स?
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि प्राथमिक स्तर पर शिक्षक नियुक्ति की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से जुड़ी है। 11 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए बीएड को अकेले पर्याप्त योग्यता मानने से संबंधित विवाद पर फैसला दिया था। इसके बाद 8 अप्रैल 2024 के आदेश में अदालत ने उन बीएड धारक शिक्षकों के रोजगार को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में संरक्षण दिया, जो 11 अगस्त 2023 से पहले नियुक्त हो चुके थे और जिनकी नियुक्ति के समय संबंधित विज्ञापन में बीएड को मान्य योग्यता माना गया था। हालांकि, अदालत ने ऐसे शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स पूरा करना आवश्यक किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यह सुविधा उन शिक्षकों के लिए है जिनकी नियुक्ति निर्धारित शर्तों के अनुरूप हुई थी। केवल किसी चयन प्रक्रिया में शामिल होना या चयनित होना अपने आप इस संरक्षण का आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर ब्रिज कोर्स पूरा करना होगा और ऐसा नहीं करने पर नियुक्ति प्रभावित हो सकती है।
66,154 आवेदन, उत्तर प्रदेश सबसे आगे
NIOS के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस विशेष ब्रिज कोर्स के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। अमर उजाला की 17 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार कुल 66,154 शिक्षकों ने आवेदन किया है। इनमें सबसे ज्यादा 33,640 आवेदन उत्तर प्रदेश से हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश से 10,650, बिहार से 7,569 और पश्चिम बंगाल से 6,627 आवेदन दर्ज किए गए हैं। असम से 1,376 और छत्तीसगढ़ से 1,208 शिक्षकों ने आवेदन किया है।
NIOS के उपलब्ध राज्यवार प्रवेश आंकड़े भी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में आवेदन हुए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट में क्षेत्रीय केंद्रों और राज्यवार आवेदन की स्थिति अलग-अलग चरणों में दिखाई गई है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आवेदन के बाद सत्यापन की प्रक्रिया स्कूल स्तर और राज्य नोडल अधिकारी के स्तर पर की जा रही है।
किन शिक्षकों को करना होगा यह छह महीने का कोर्स?
यह ब्रिज कोर्स सभी बीएड धारकों के लिए नहीं है। इसका दायरा विशेष रूप से उन प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति बीएड योग्यता के आधार पर निर्धारित अवधि में हुई थी।
NIOS के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार सामान्य पात्रता अवधि 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच नियुक्त किए गए संबंधित प्राथमिक शिक्षकों से जुड़ी है। यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति इस अवधि से बाहर हुई है लेकिन किसी न्यायालय से उन्हें विशेष राहत या छूट मिली है, तो NIOS ने उसके लिए अलग ‘Court Order Registration’ व्यवस्था भी रखी है। ऐसे मामलों में न्यायालय से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होते हैं।
NCTE की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह पाठ्यक्रम उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 की NCTE अधिसूचना के अनुरूप बीएड योग्यता के आधार पर हुई थी और जिनकी सेवाओं को सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के आदेश के तहत संरक्षण प्राप्त है।
एक साल के भीतर पूरा करना होगा पाठ्यक्रम
ब्रिज कोर्स की अवधि छह महीने निर्धारित की गई है, लेकिन इसे पूरा करने के लिए शिक्षकों को पाठ्यक्रम शुरू होने की तारीख से एक वर्ष की समयसीमा दी गई है। NCTE के आधिकारिक नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों को इस एक अवसर में निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। समयसीमा के भीतर पाठ्यक्रम पूरा नहीं करने की स्थिति में नियुक्ति अमान्य होने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में शामिल है।
इस शर्त के कारण यह पाठ्यक्रम संबंधित शिक्षकों के लिए केवल सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है। यह उनकी मौजूदा सेवा को जारी रखने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अनुपालन आवश्यकता है।
सिर्फ डिग्री नहीं, प्राथमिक शिक्षा की समझ पर रहेगा जोर
NIOS द्वारा जारी पाठ्यक्रम की रूपरेखा से पता चलता है कि इसका उद्देश्य केवल किसी अतिरिक्त प्रमाणपत्र को उपलब्ध कराना नहीं है। कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालय और प्राथमिक आयु के बच्चों को समझने, सीखने की प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों से संबंधित विषयों को शामिल किया गया है।
पाठ्यक्रम के उद्देश्यों में बच्चों के विकासात्मक स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति तैयार करना, अलग-अलग विषयों में उपयुक्त शिक्षण रणनीतियों को अपनाना और कक्षा में मौजूद विविधताओं को समझना भी शामिल है। भाषा, लिंग, दिव्यांगता तथा सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ी विविधताओं को भी पाठ्यक्रम में महत्व दिया गया है।
इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा मूल्यांकन से भी संबंधित है। NIOS के अनुसार शिक्षकों को बच्चों के लिए उम्र और विकास के अनुरूप मूल्यांकन उपकरणों तथा समग्र मूल्यांकन की अवधारणा से परिचित कराया जाएगा।
स्कूल में व्यावहारिक अनुभव भी पाठ्यक्रम का हिस्सा
ब्रिज कोर्स केवल सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है। NIOS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसमें प्राथमिक विद्यालय में कम से कम 20 शिक्षण दिवस का स्कूल अनुभव और इसके अतिरिक्त कम से कम 10 दिन की संपर्क कक्षाएं निर्धारित की गई हैं। स्कूल अनुभव के दौरान न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त भी दी गई है।
यह व्यवस्था इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि प्राथमिक स्तर की शिक्षा में केवल विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाता। बच्चों की उम्र, सीखने की गति, कक्षा प्रबंधन और विभिन्न क्षमताओं वाले विद्यार्थियों के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी शिक्षक की पेशेवर क्षमता का हिस्सा है।
NIOS करेगा संचालन, NCTE ने तैयार किया पाठ्यक्रम
सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल 2024 के आदेश में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE को केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की निगरानी में ब्रिज कोर्स तैयार करने का निर्देश दिया था। बाद में NCTE ने छह महीने के सर्टिफिकेट ब्रिज कोर्स को अधिसूचित किया और NIOS को इसे संचालित करने की जिम्मेदारी मिली।
NIOS के आधिकारिक पोर्टल पर इसे Six-Months Certificate Course (Bridge) in Primary Teacher Education के नाम से प्रदर्शित किया गया है। पाठ्यक्रम को काम कर रहे प्राथमिक शिक्षकों के पेशेवर विकास पर केंद्रित किया गया है।
पढ़ाई का तरीका कैसा होगा?
NIOS के अनुसार ब्रिज कोर्स को ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग यानी ODL माध्यम में संचालित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इसके साथ स्कूल आधारित अनुभव और संपर्क कक्षाओं को भी जोड़ा गया है। यानी कार्यक्रम को केवल ऑनलाइन सामग्री तक सीमित नहीं रखा गया है।
प्रवेश प्रक्रिया में शिक्षक द्वारा आवेदन करने के बाद स्कूल प्रधानाचार्य या संबंधित अधिकारी द्वारा विवरण का सत्यापन और फिर राज्य नोडल अधिकारी के स्तर पर अंतिम पुष्टि की प्रक्रिया रखी गई है।
क्या यह ब्रिज कोर्स आगे भी प्राथमिक शिक्षक बनने की योग्यता देगा?
यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है जिसे संबंधित शिक्षकों को समझना जरूरी है। NIOS के आधिकारिक पाठ्यक्रम पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि यह ब्रिज कोर्स इन शिक्षकों की मौजूदा नियुक्ति को संरक्षण देने के उद्देश्य से है और इसे भविष्य में प्राथमिक शिक्षक के रूप में नई नियुक्ति पाने के लिए मान्य योग्यता के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
इसका अर्थ है कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य पहले से कार्यरत और न्यायालय के आदेश के दायरे में आने वाले शिक्षकों के लिए एक विशेष शैक्षणिक सेतु तैयार करना है, न कि बीएड धारकों के लिए प्राथमिक शिक्षक भर्ती की नई सामान्य पात्रता बनाना।
शिक्षकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित शिक्षकों के लिए तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—पहली, पात्रता की तारीख और नियुक्ति की स्थिति; दूसरी, आवेदन एवं दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया; और तीसरी, निर्धारित समयसीमा के भीतर ब्रिज कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करना।
NIOS ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति सामान्य पात्रता अवधि से बाहर है और उसे न्यायालय से राहत मिली है, तो उसे Court Order Registration के तहत आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इनमें शपथपत्र, रिट याचिका और न्यायालय के आदेश की प्रति शामिल है।
प्रशिक्षण से ज्यादा, सेवा से जुड़ी जिम्मेदारी
बीएड शिक्षकों के लिए शुरू किया गया छह महीने का ब्रिज कोर्स शिक्षा व्यवस्था में एक विशेष परिस्थिति का परिणाम है। इसका उद्देश्य उन शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा की आवश्यक पेशेवर दक्षताओं से जोड़ना है, जिनकी नियुक्ति बीएड योग्यता के आधार पर हुई थी और जिनकी सेवाओं को सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के आदेश के तहत निर्धारित शर्तों के साथ संरक्षण मिला है।
66,154 आवेदनों में उत्तर प्रदेश के 33,640 शिक्षक शामिल होना इस प्रक्रिया के व्यापक प्रभाव को दिखाता है। अब संबंधित शिक्षकों के लिए अगला चरण पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
सबसे अहम बात यह है कि यह ब्रिज कोर्स केवल अतिरिक्त प्रशिक्षण का अवसर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और NCTE-नियोजित व्यवस्था के तहत इसके सफल समापन का संबंध संबंधित शिक्षकों की मौजूदा नियुक्ति से है। इसलिए पात्र शिक्षक अपनी आवेदन स्थिति, सत्यापन, पाठ्यक्रम संबंधी निर्देश और समयसीमा की जानकारी केवल NIOS तथा संबंधित आधिकारिक प्राधिकरणों से ही सुनिश्चित करें।






