
संवाद 24 डेस्क। स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है और इस संतुलित आहार में प्रोटीन की भूमिका विशेष मानी जाती है। आमतौर पर प्रोटीन का नाम सुनते ही मांसपेशियों और शारीरिक ताकत का ध्यान आता है, लेकिन इसकी उपयोगिता इससे कहीं अधिक व्यापक है। शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, ऊतकों की मरम्मत, मांसपेशियों के रखरखाव, एंजाइम और कई हार्मोन के निर्माण जैसी अनेक प्रक्रियाओं में प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लिए भोजन में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन का होना आवश्यक माना जाता है।
आखिर प्रोटीन है क्या?
प्रोटीन एक प्रमुख पोषक तत्व है, जो अमीनो अम्लों से मिलकर बनता है। शरीर को विभिन्न कार्यों के लिए लगभग 20 प्रकार के अमीनो अम्लों की आवश्यकता होती है। इनमें कुछ अमीनो अम्ल शरीर स्वयं बना सकता है, जबकि कुछ आवश्यक अमीनो अम्ल भोजन के माध्यम से प्राप्त करने पड़ते हैं। इसलिए केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन में ऐसे विभिन्न खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी जरूरी है, जो शरीर को आवश्यक अमीनो अम्ल उपलब्ध करा सकें।
शरीर का निर्माण और मरम्मत दोनों करता है प्रोटीन
शरीर लगातार निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया से गुजरता रहता है। पुरानी कोशिकाएं अपना जीवन चक्र पूरा करती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं बनती हैं। इसी तरह रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान ऊतकों पर पड़ने वाले सामान्य दबाव के बाद उनकी मरम्मत भी होती रहती है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मांसपेशियों के साथ-साथ त्वचा, बाल, नाखून और शरीर के अनेक ऊतकों की संरचना में भी प्रोटीन से बने घटक शामिल होते हैं।
बच्चों और किशोरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है प्रोटीन?
बचपन और किशोरावस्था शरीर के विकास की महत्वपूर्ण अवस्थाएं हैं। इस दौरान शरीर में लंबाई, मांसपेशियों, हड्डियों और विभिन्न ऊतकों से जुड़े विकास की प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। ऐसे समय में पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन सहित सभी जरूरी पोषक तत्वों वाला भोजन महत्वपूर्ण होता है। केवल प्रोटीन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; कैल्शियम, आयरन, विटामिन, खनिज, स्वस्थ वसा और ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ भी बढ़ते शरीर के लिए जरूरी हैं।
प्रोटीन केवल मांसपेशियों के लिए नहीं है
प्रोटीन की भूमिका को केवल मांसपेशियों तक सीमित करना सही नहीं होगा। शरीर में अनेक एंजाइम प्रोटीन से बने होते हैं और ये विभिन्न जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को संचालित करने में मदद करते हैं। कुछ हार्मोन तथा शरीर में पदार्थों के परिवहन से जुड़े प्रोटीन भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। रक्त, कोशिकाओं और ऊतकों की सामान्य संरचना तथा कार्यप्रणाली में भी प्रोटीन की भूमिका होती है। इस दृष्टि से देखें तो प्रोटीन शरीर की पूरी कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ पोषक तत्व है।
प्रोटीन की कमी क्यों चिंता का विषय बन सकती है?
यदि किसी व्यक्ति के भोजन में लंबे समय तक पर्याप्त प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते, तो शरीर के सामान्य विकास और ऊतकों के रखरखाव पर असर पड़ सकता है। बच्चों में पर्याप्त पोषण न मिलने की स्थिति में वृद्धि और विकास प्रभावित हो सकता है। हालांकि कमजोरी, थकान या विकास में कमी जैसे किसी भी लक्षण को केवल प्रोटीन की कमी से जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि इनके पीछे कई अन्य पोषण संबंधी या स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं।
प्रोटीन की मात्रा के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
प्रोटीन के मामले में केवल मात्रा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्रोटीन की अमीनो अम्ल संरचना अलग हो सकती है। इसलिए भोजन में प्रोटीन के विभिन्न स्रोतों को शामिल करना उपयोगी माना जाता है। दालों और अनाज का उचित संयोजन, मेवे, बीज, दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ तथा अन्य पौष्टिक विकल्प भोजन की प्रोटीन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
शाकाहारी भोजन में भी हैं प्रोटीन के कई स्रोत
यह धारणा सही नहीं है कि प्रोटीन प्राप्त करने के लिए केवल मांसाहारी भोजन जरूरी है। भारतीय रसोई में प्रोटीन के अनेक शाकाहारी स्रोत पहले से मौजूद हैं। दाल, चना, राजमा, लोबिया, मूंग, मसूर, सोयाबीन, मटर, मूंगफली, मेवे और विभिन्न बीज अच्छे विकल्प हो सकते हैं। दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ भी भोजन में प्रोटीन उपलब्ध कराने में योगदान देते हैं। अलग-अलग खाद्य समूहों को संतुलित रूप से मिलाकर भोजन को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है।
मांसाहारी भोजन से मिलने वाला प्रोटीन
अंडा, मछली, चिकन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थ भी प्रोटीन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनमें शरीर के लिए आवश्यक कई अमीनो अम्ल पर्याप्त मात्रा में मिल सकते हैं। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को संपूर्ण आहार का विकल्प नहीं माना जा सकता। संतुलित भोजन में सब्जियां, फल, अनाज और अन्य आवश्यक पोषक तत्व भी शामिल होने चाहिए।
क्या ज्यादा प्रोटीन मतलब ज्यादा ताकत?
आजकल प्रोटीन को लेकर एक धारणा काफी लोकप्रिय है कि जितना अधिक प्रोटीन लिया जाए, उतना ही शरीर मजबूत होगा। वास्तव में शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता होती है, लेकिन जरूरत से बहुत अधिक मात्रा लेना अपने आप अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ की गारंटी नहीं देता। शरीर की पोषण संबंधी जरूरत उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति सहित कई बातों पर निर्भर करती है। इसलिए प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के बजाय संतुलित भोजन पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रोटीन पाउडर की जरूरत हर किसी को नहीं
प्रोटीन सप्लीमेंट और पाउडर आज आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति को इनकी जरूरत है। सामान्य परिस्थितियों में संतुलित और विविध भोजन से पर्याप्त प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों और किशोरों के मामले में किसी भी प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल स्वयं शुरू करने के बजाय माता-पिता और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित है। भोजन की प्राकृतिक विविधता को प्राथमिकता देना स्वस्थ खानपान की बुनियादी सोच है।
रोज के भोजन में प्रोटीन कैसे शामिल करें?
प्रोटीन को किसी एक भोजन तक सीमित रखने के बजाय दिनभर के भोजन में अलग-अलग स्रोतों के माध्यम से शामिल किया जा सकता है। नाश्ते में दूध या दही के साथ पौष्टिक खाद्य पदार्थ, दोपहर में दाल, चना या राजमा, भोजन में पनीर या सोया जैसे विकल्प और शाम के समय मेवे या अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। भोजन की पसंद परिवार की परंपरा, उपलब्धता और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार अलग हो सकती है।
भारतीय थाली में पहले से मौजूद है प्रोटीन का खजाना
भारतीय भोजन की एक विशेषता इसकी विविधता है। दाल-चावल, खिचड़ी, दाल-रोटी, छोले, राजमा-चावल, अंकुरित अनाज, दही, पनीर और दूध जैसे पारंपरिक भोजन कई पोषक तत्व प्रदान करते हैं। दाल और अनाज का संयोजन विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि अलग-अलग खाद्य पदार्थों में मौजूद अमीनो अम्ल एक-दूसरे की पूर्ति कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि पौष्टिक भोजन के लिए हमेशा महंगे या विशेष उत्पादों की आवश्यकता नहीं होती।
व्यायाम करने वालों के लिए प्रोटीन का महत्व
शारीरिक गतिविधि के दौरान मांसपेशियों पर काम का दबाव पड़ता है और शरीर को उनकी मरम्मत एवं रखरखाव के लिए पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। इसलिए सक्रिय जीवनशैली वाले लोगों के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन का महत्व बढ़ जाता है। लेकिन केवल प्रोटीन खाने से मांसपेशियां मजबूत नहीं होतीं। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त ऊर्जा, आराम और संतुलित भोजन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
प्रोटीन के साथ बाकी पोषक तत्व भी जरूरी
स्वास्थ्य को केवल एक पोषक तत्व के आधार पर नहीं समझा जा सकता। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, वसा कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देती है और विटामिन तथा खनिज शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। फलों और सब्जियों से मिलने वाला फाइबर तथा विभिन्न सूक्ष्म पोषक तत्व भी भोजन को संतुलित बनाते हैं। इसलिए भोजन में प्रोटीन बढ़ाते समय बाकी खाद्य समूहों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
जरूरत हर व्यक्ति की अलग हो सकती है
प्रोटीन की आवश्यकता उम्र, शरीर की अवस्था, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। बढ़ते बच्चों और किशोरों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा अधिक शारीरिक गतिविधि करने वाले लोगों की पोषण संबंधी जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसी कारण किसी दूसरे व्यक्ति की डाइट देखकर अपनी प्रोटीन की मात्रा तय करना उचित नहीं है।
प्रोटीन को लेकर भ्रम से बचना जरूरी
प्रोटीन से जुड़ी कई लोकप्रिय धारणाएं अधूरी जानकारी पर आधारित होती हैं। मसलन, यह जरूरी नहीं कि महंगा खाद्य पदार्थ ही बेहतर प्रोटीन स्रोत हो। इसी तरह केवल मांसाहारी भोजन से ही पर्याप्त प्रोटीन मिलता है, यह भी सही नहीं है। दूसरी ओर, केवल प्रोटीन बढ़ाकर बाकी पोषक तत्वों की जरूरत पूरी नहीं की जा सकती। सही दृष्टिकोण यह है कि भोजन में विविधता रखी जाए और अलग-अलग खाद्य समूहों को संतुलित मात्रा में शामिल किया जाए।
स्वस्थ जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा
प्रोटीन स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है। पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वच्छता, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। जब इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चला जाता है, तभी शरीर को विकास, ऊर्जा और रोजमर्रा के कार्यों के लिए आवश्यक पोषण मिल पाता है।
प्रोटीन जरूरी है, लेकिन संतुलन सबसे जरूरी
प्रोटीन शरीर के निर्माण, विकास, ऊतकों की मरम्मत और अनेक जैविक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। बचपन और किशोरावस्था में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह शरीर के विकास की सक्रिय अवस्था होती है। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, मेवे, बीज, अंडा, मछली और अन्य खाद्य पदार्थों के माध्यम से प्रोटीन को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रोटीन को लेकर किसी एक चलन या फैशन के पीछे चलने के बजाय अपनी उम्र और जरूरत के अनुसार विविध एवं संतुलित भोजन लिया जाए। प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से पोषण प्राप्त करना, भोजन में पर्याप्त विविधता रखना और बिना विशेषज्ञ सलाह के अनावश्यक सप्लीमेंट का इस्तेमाल न करना समझदारी भरा कदम है। आखिरकार मजबूत और स्वस्थ शरीर किसी एक पोषक तत्व से नहीं, बल्कि संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली के सामंजस्य से तैयार होता है।






