श्रीखंड: जब सादगी से तैयार होती है स्वाद की खास पहचान, परंपरा और मलाईदार मिठास।

संवाद 24 डेस्क। भारतीय मिठाइयों की दुनिया में कुछ व्यंजन ऐसे हैं, जिनकी खासियत उनकी जटिल बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि साधारण सामग्री से पैदा होने वाला अद्भुत स्वाद है। श्रीखंड भी ऐसी ही पारंपरिक मिठाई है। गाढ़े दही, चीनी और सुगंधित मसालों से तैयार होने वाला यह व्यंजन अपनी मलाईदार बनावट, हल्की खटास, मिठास और खुशबू के कारण लंबे समय से भारतीय भोजन परंपरा का हिस्सा रहा है। खासकर महाराष्ट्र और गुजरात के भोजन में श्रीखंड का विशेष स्थान माना जाता है। इसे त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और विशेष अवसरों पर भोजन के साथ परोसा जाता है।

श्रीखंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। अच्छे दही को पर्याप्त समय देकर उसका अतिरिक्त पानी निकालना और फिर उसे चीनी तथा सुगंधित सामग्री के साथ अच्छी तरह मिलाना ही इसकी मूल प्रक्रिया है। हालांकि, स्वादिष्ट श्रीखंड बनाने के लिए सामग्री की गुणवत्ता और उसकी तैयारी का तरीका काफी महत्वपूर्ण होता है।

आखिर श्रीखंड की असली पहचान किससे बनती है?
श्रीखंड का आधार है छना हुआ गाढ़ा दही। सामान्य दही में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए उससे सीधे श्रीखंड बनाने पर मनचाही गाढ़ी और मलाईदार बनावट नहीं मिलती। दही को कपड़े में बांधकर कुछ घंटों तक लटकाने से उसका अतिरिक्त पानी निकल जाता है और पीछे बचता है गाढ़ा, मुलायम दही, जिसे कई जगह चक्का दही कहा जाता है। यही श्रीखंड को उसकी विशिष्ट बनावट देने वाला मुख्य आधार है।
इसके बाद इसमें चीनी मिलाई जाती है। पारंपरिक स्वाद के लिए इलायची और केसर का उपयोग किया जाता है। बादाम और पिस्ता जैसे मेवे श्रीखंड के स्वाद के साथ-साथ उसकी सजावट को भी बेहतर बनाते हैं। कुछ लोग इसमें जायफल या गुलाब की हल्की सुगंध भी पसंद करते हैं। हालांकि, मूल श्रीखंड का स्वाद उसकी सादगी में ही निहित है।

श्रीखंड बनाने के लिए संपूर्ण सामग्री
लगभग 4 से 5 लोगों के लिए श्रीखंड बनाने हेतु निम्न सामग्री ली जा सकती है—

  1. गाढ़ा ताजा दही – 1 किलोग्राम
  2. बारीक पिसी चीनी – 200 से 250 ग्राम
  3. केसर – लगभग 10 से 12 रेशे
  4. गुनगुना दूध – 1 से 2 बड़े चम्मच
  5. हरी इलायची का पाउडर – आधा छोटा चम्मच
  6. बादाम – 2 बड़े चम्मच, बारीक कटे हुए
  7. पिस्ता – 2 बड़े चम्मच, बारीक कटे हुए
  8. जायफल पाउडर – एक छोटी चुटकी, वैकल्पिक
  9. गुलाबजल – 1 छोटा चम्मच, वैकल्पिक
    सामग्री की मात्रा स्वाद के अनुसार थोड़ी कम या अधिक की जा सकती है। यदि कम मीठा श्रीखंड पसंद हो तो चीनी की मात्रा घटाई जा सकती है।

सबसे जरूरी पड़ाव: दही को बनाएं गाढ़ा
श्रीखंड बनाने की शुरुआत दही से होती है और यही चरण इसकी अंतिम गुणवत्ता पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। सबसे पहले एक साफ और महीन सूती कपड़ा लें। इसे किसी गहरे बर्तन या छलनी के ऊपर रखें और उसमें दही डालें। कपड़े के किनारों को इकट्ठा करके दही को बांध दें। अब इसे कुछ घंटों के लिए ठंडी जगह पर लटका दें या छलनी में रखकर अतिरिक्त पानी निकलने दें।
यदि मौसम गर्म है तो दही को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने के बजाय रेफ्रिजरेटर में रखना अधिक उचित है। पानी निकलने की प्रक्रिया के दौरान दही धीरे-धीरे गाढ़ा होता जाता है। लगभग 4 से 6 घंटे में पर्याप्त पानी निकल सकता है, हालांकि समय दही की गाढ़ाई और तापमान पर निर्भर करता है। अधिक मलाईदार श्रीखंड के लिए इसे पर्याप्त समय देना जरूरी है।

चक्का दही की मुलायम बनावट का राज
जब दही से पर्याप्त पानी निकल जाए तो कपड़ा खोलकर गाढ़े दही को एक साफ कटोरे में निकालें। इसे चक्का दही कहा जाता है। अब चक्का दही को अच्छी तरह फेंटना आवश्यक है। इसके लिए हाथ की फेंटनी या चम्मच का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दही को धीरे-धीरे फेंटने से उसमें मौजूद छोटे-छोटे गांठदार हिस्से टूट जाते हैं और मिश्रण अधिक चिकना हो जाता है। श्रीखंड की सुंदरता केवल उसके स्वाद में नहीं, बल्कि उसकी चिकनी और मलाईदार बनावट में भी होती है। इसलिए इस चरण को जल्दबाजी में पूरा नहीं करना चाहिए।

चीनी डालते ही बदलने लगेगा स्वाद
अब फेंटा हुआ चक्का दही तैयार है। इसमें बारीक पिसी हुई चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं। चीनी डालने के बाद मिश्रण कुछ देर रखने पर दही में घुलने लगती है और श्रीखंड की बनावट थोड़ी नरम हो सकती है। इसलिए चीनी को एक साथ बहुत अधिक मात्रा में डालने के बजाय धीरे-धीरे मिलाना बेहतर रहता है।
यदि पिसी हुई चीनी का उपयोग किया जाए तो वह दही में अपेक्षाकृत आसानी से घुल जाती है। मिश्रण को तब तक फेंटें जब तक चीनी पूरी तरह मिल न जाए और श्रीखंड एकसार दिखाई देने लगे।

केसर और इलायची से आएगी खास खुशबू
श्रीखंड की पारंपरिक खुशबू में केसर और इलायची की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केसर को थोड़े से गुनगुने दूध में भिगोकर कुछ समय के लिए रख दें। इससे केसर का रंग और सुगंध दूध में अच्छी तरह आ जाती है। अब इसे श्रीखंड के मिश्रण में डालें और धीरे-धीरे मिला दें।
इसके बाद इलायची पाउडर डालें। इलायची की मात्रा बहुत अधिक रखने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसकी तेज सुगंध श्रीखंड के बाकी स्वाद को दबा सकती है। चाहें तो बहुत थोड़ी मात्रा में जायफल पाउडर भी मिलाया जा सकता है।

मेवों से बढ़ेगा स्वाद और सजावट
बादाम और पिस्ता श्रीखंड को हल्का कुरकुरापन देते हैं। इन्हें बारीक काटकर मिश्रण में मिलाया जा सकता है। कुछ मेवे ऊपर से सजाने के लिए अलग रख दें। इससे तैयार श्रीखंड देखने में भी आकर्षक लगता है।
यदि गुलाबजल पसंद हो तो इसकी थोड़ी मात्रा डाली जा सकती है। हालांकि, इसे बहुत अधिक डालने से गुलाब की सुगंध बाकी सामग्री पर हावी हो सकती है। इसलिए इसकी मात्रा सीमित रखना बेहतर होता है।

अब आएगा ठंडा करने का सबसे खास चरण
सभी सामग्री मिलाने के बाद श्रीखंड को अच्छी तरह ढककर रेफ्रिजरेटर में रख दें। इसे कम से कम 1 से 2 घंटे ठंडा करना बेहतर रहता है। ठंडा होने के बाद इसकी बनावट और स्वाद दोनों अधिक संतुलित महसूस होते हैं।
परोसने से पहले श्रीखंड को एक बार हल्के हाथ से मिला सकते हैं। इसके बाद इसे कटोरियों में निकालें और ऊपर से कटे हुए पिस्ते, बादाम तथा कुछ केसर के रेशों से सजाएं।

स्वाद में बदलाव चाहिए तो आजमाएं अलग-अलग रूप
पारंपरिक श्रीखंड के अलावा इसके कई स्वादिष्ट रूप भी बनाए जाते हैं। आम्रखंड में पके आम का गूदा मिलाया जाता है, जिससे श्रीखंड में आम की प्राकृतिक मिठास और खुशबू शामिल हो जाती है। इसी तरह कुछ लोग गुलाब, इलायची या अन्य प्राकृतिक सुगंध वाली सामग्री का इस्तेमाल करके अलग स्वाद तैयार करते हैं।
हालांकि, किसी भी नए स्वाद के साथ प्रयोग करते समय मूल श्रीखंड की गाढ़ी और चिकनी बनावट बनाए रखना जरूरी है। बहुत अधिक तरल सामग्री मिलाने से श्रीखंड पतला हो सकता है।

श्रीखंड को किसके साथ परोसा जाता है?
श्रीखंड को ठंडा परोसना आमतौर पर पसंद किया जाता है। महाराष्ट्र और गुजरात की भोजन परंपरा में इसे अक्सर पूरी के साथ परोसा जाता है। गर्मागर्म पूरी और ठंडे, मलाईदार श्रीखंड का मेल इसके स्वाद को खास बना देता है। इसे भोजन के बाद मिठाई के रूप में भी परोसा जा सकता है।
त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर श्रीखंड को सुंदर कटोरियों में सजाकर परोसने की परंपरा भी देखी जाती है। ऊपर से केसर और पिस्ते की सजावट इसे उत्सव जैसा रूप देती है।

श्रीखंड बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्वादिष्ट श्रीखंड के लिए सबसे पहले दही ताजा और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए। बहुत अधिक खट्टे दही से श्रीखंड का स्वाद प्रभावित हो सकता है। दही से अतिरिक्त पानी अच्छी तरह निकालना भी जरूरी है। यदि दही पर्याप्त गाढ़ा नहीं हुआ तो श्रीखंड की बनावट ढीली रह सकती है।
चीनी डालने के बाद मिश्रण को बहुत देर तक तेज गति से फेंटने की जरूरत नहीं है। सामग्री अच्छी तरह मिल जाए, इतना पर्याप्त है। केसर को सीधे सूखे रेशों के रूप में डालने के बजाय थोड़े गुनगुने दूध में भिगोना अधिक उपयोगी रहता है। तैयार श्रीखंड को हमेशा साफ, ढके हुए बर्तन में रेफ्रिजरेटर में रखना चाहिए।

परंपरा से आधुनिक रसोई तक श्रीखंड का सफर
श्रीखंड भारतीय पारंपरिक मिठाइयों की उस श्रेणी का हिस्सा है, जिसमें सीमित सामग्री के माध्यम से स्वाद और बनावट का संतुलन तैयार किया जाता है। दही जैसी सामान्य सामग्री को छानकर गाढ़ा करना, उसमें मिठास और सुगंध जोड़ना तथा ठंडा करके परोसना इसकी मूल प्रक्रिया है। यही सरलता इसे घरेलू रसोई के लिए भी सुविधाजनक बनाती है।
आज श्रीखंड केवल पारंपरिक भोजन तक सीमित नहीं है। घरों के साथ-साथ विभिन्न भोजन आयोजनों में भी इसे अलग-अलग स्वाद और सजावट के साथ प्रस्तुत किया जाता है। फिर भी इसका मूल स्वरूप वही है—गाढ़ा दही, संतुलित मिठास, इलायची की खुशबू, केसर की रंगत और मेवों की हल्की कुरकुराहट।

एक कटोरी में सिमटी भारतीय मिठास
श्रीखंड की खूबसूरती इस बात में है कि इसे बनाने के लिए किसी कठिन पाक-कौशल की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन थोड़ी सावधानी इसके स्वाद को काफी बेहतर बना सकती है। अच्छे दही को सही तरह से छानना, उसे चिकना फेंटना, चीनी की मात्रा संतुलित रखना और केसर-इलायची जैसी सुगंधित सामग्री का संयमित इस्तेमाल करना ही इसके स्वाद की कुंजी है।
जब ठंडा श्रीखंड कटोरी में परोसा जाता है और ऊपर से पिस्ते-बादाम तथा केसर से सजाया जाता है, तो यह केवल एक मिठाई नहीं रह जाता, बल्कि भारतीय खान-पान की उस परंपरा का स्वाद बन जाता है जिसमें साधारण सामग्री को धैर्य और सही तकनीक के साथ विशेष बनाया जाता है। यही कारण है कि श्रीखंड आज भी पारंपरिक मिठाइयों की सूची में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

Radha Singh
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