
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भारत की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का केंद्र बन चुकी है। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सहभागिता के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। विमानतल पर केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद की अगुवाई में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही विशेष रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने वाली है। सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा तंत्र के सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक संतुलन से जुड़े कई अहम समझौतों पर विमर्श की रूपरेखा तय की गई है।
द्विपक्षीय विमर्श में रक्षा और आर्थिक रणनीतियों पर फोकस
शिखर सम्मेलन के समानांतर होने वाली भारत और रूस की शीर्ष बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी नजरें हैं। पिछले कुछ वर्षों में उभरे नए वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों ने स्थिरता दिखाई है। वार्ताओं की मेज पर रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं की निरंतरता, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान प्रणाली का विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक समझौतों पर सहमति बनाने की संभावना है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप के तहत यह द्विपक्षीय संवाद बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साझा हितों को मजबूती प्रदान करने का सशक्त माध्यम बनेगा।
नई दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा बंदोबस्त, तीन दिनों तक सख्त पहरा
शीर्ष वैश्विक नेताओं के जमावड़े को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा का बेहद कड़ा और बहुस्तरीय घेरा तैयार किया गया है। 11 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली जिले की सीमाओं पर कड़ी जांच और आवागमन नियंत्रण लागू किया गया है। क्षेत्र में केवल वैध परिचय पत्र धारकों, स्थायी निवासियों और अधिकृत पास वाले कर्मचारियों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में 17 हजार से अधिक सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया है, जिसमें 15 हजार से अधिक दिल्ली पुलिस के जवान और लगभग दो हजार अर्धसैनिक बलों के विशेष कमांडो शामिल हैं। मुख्य सम्मेलन स्थल भारत मंडपम के आसपास डीसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग सेक्टरों का जिम्मा सौंपा गया है।
आसमान से जमीन तक निगरानी और आपात योजनाएं सक्रिय
सम्मेलन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और विदेशी सुरक्षा दलों के समन्वय से संयुक्त कमान स्थापित की गई है। सुरक्षा कारणों से राजधानी के संवेदनशील क्षेत्रों को अस्थायी तौर पर नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है, जहां किसी भी प्रकार के ड्रोन या अनधिकृत उड़ने वाली वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है। आधुनिक कैमरों, फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और केंद्रीय कमांड सेंटर के माध्यम से मार्गों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दलों (क्यूआरटी) और विशेष मेडिकल टीमों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात रखा गया है।
यातायात डायवर्जन और सीमाओं पर सघन तलाशी अभियान
वीवीआईपी आवाजाही के दौरान आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा में संतुलन साधने के लिए यातायात पुलिस ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सीमावर्ती बिंदुओं – गाजीपुर, चिल्ला, बदरपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर – पर विशेष बैरिकेडिंग कर वाहनों की गहन जांच की जा रही है। हालांकि मेट्रो परिचालन को सामान्य रखने का प्रयास किया गया है, लेकिन सुरक्षा कारणों से चुनिंदा संवेदनशील स्टेशनों पर निकास को समय-समय पर नियंत्रित किया जा सकता है। प्रशासन ने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है।






