
कन्नौज। सब्जी उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में कन्नौज के उमर्दा स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल किसानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां इस समय करीब 3.50 लाख सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है। नियंत्रित वातावरण में तैयार होने वाली इन पौधों की मांग कन्नौज के अलावा आसपास के जिलों के किसानों में भी बढ़ रही है। हालिया स्थानीय रिपोर्टों में भी केंद्र पर साढ़े तीन लाख पौध तैयार होने की पुष्टि की गई है।
खेत में पौध खराब होने का खतरा कम, समय पर फसल तैयार होने की उम्मीद
सेंटर पर पौध तैयार करने के लिए वैज्ञानिक एवं संरक्षित खेती की तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नियंत्रित वातावरण में तैयार होने के कारण पौधों की वृद्धि अपेक्षाकृत एकसमान रहती है और शुरुआती अवस्था में रोग एवं कीटों का जोखिम कम करने में मदद मिलती है। इससे खेत में रोपाई के बाद पौध खराब होने की संभावना घटती है और किसान समय पर फसल लेने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
टमाटर की 80 हजार पौध से लेकर बैंगन की 35 हजार पौध तक तैयार
मौजूदा खेप में विभिन्न सब्जियों की उन्नत एवं संकर किस्मों को शामिल किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां टमाटर की 80 हजार, शिमला मिर्च की 80 हजार, फूलगोभी की 60 हजार, बंदगोभी की 50 हजार, पतली मिर्च की 45 हजार और बैंगन की 35 हजार पौध तैयार की जा रही हैं। पौध तैयार करने के लिए प्लग-ट्रे और कोकोपीट मीडिया जैसी वैज्ञानिक विधियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कन्नौज ही नहीं, छह जिलों के किसान पहुंच रहे उमर्दा
इस हाईटेक पौधशाला का लाभ केवल कन्नौज के किसानों तक सीमित नहीं है। कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, हरदोई और औरैया के किसान भी यहां से पौध प्राप्त कर रहे हैं। इससे साफ है कि गुणवत्तापूर्ण और तैयार पौध की मांग आसपास के कृषि क्षेत्रों में भी बढ़ रही है।
अपना बीज दीजिए, एक रुपये में तैयार होगी पौध
केंद्र किसानों को अपनी जरूरत के मुताबिक दो विकल्प उपलब्ध करा रहा है। किसान यदि अपना बीज देकर पौध तैयार कराते हैं तो एक रुपये प्रति पौधा शुल्क लिया जाता है। वहीं, केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए बीज से तैयार पौध लेने पर दो रुपये प्रति पौधा की दर निर्धारित है। इससे किसानों को खुद नर्सरी तैयार करने में लगने वाले समय और शुरुआती मेहनत से राहत मिल सकती है।
इजरायली तकनीक से विकसित हुआ उमर्दा का सेंटर
उमर्दा का यह सेंटर इंडो-इजरायल कृषि परियोजना से जुड़ी तकनीक पर विकसित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्र में संरक्षित खेती, पॉलीहाउस और आधुनिक पौध उत्पादन तकनीकों के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने तथा नई कृषि तकनीकों का प्रदर्शन करने पर जोर दिया गया है। ऐसे सेंटरों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीक से परिचित कराना और बेहतर रोपण सामग्री उपलब्ध कराना है।
मिट्टी के सीधे संपर्क से बचाकर तैयार की जाती है पौध
केंद्र में पौध उत्पादन की प्रक्रिया को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि शुरुआती अवस्था में पौधों को संक्रमण और रोगों से बचाया जा सके। प्लग-ट्रे और कोकोपीट मीडिया में पौध तैयार करने की वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है। इससे प्रत्येक पौधे को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित करने और उसकी समान वृद्धि बनाए रखने में मदद मिलती है।
किसानों के लिए क्या बदल सकता है?
सामान्य तौर पर सब्जियों की खेती में बीज से पौध तैयार करने में किसान को अतिरिक्त समय, स्थान और देखभाल की जरूरत होती है। उमर्दा का सेंटर इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ निगरानी और नियंत्रित वातावरण में पूरा करने का विकल्प दे रहा है। ऐसे में किसान सीधे तैयार पौध खेत में लगाकर खेती की शुरुआती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं। केंद्र से जुड़ी पूर्व की रिपोर्टों में भी इसे किसानों को आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने वाले केंद्र के रूप में बताया गया है।






