AI से बीमारी का इलाज पूछ रहे अमेरिकी, 34% लोग कर चुके हैं हेल्थ चैटबॉट का इस्तेमाल; जानिए कितना सुरक्षित है यह तरीका

संवाद 24 डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल सवालों के जवाब देने या लिखने-पढ़ने तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल अपनी सेहत से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने के लिए कर रहे हैं। Pew Research Center के नए सर्वे के अनुसार 34% अमेरिकी वयस्कों ने कम-से-कम एक स्वास्थ्य या चिकित्सा संबंधी कारण के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया है। इनमें कुछ लोग लक्षणों का कारण समझने, कुछ उपचार के बारे में जानकारी लेने, कुछ डॉक्टर की बताई बीमारी या लैब रिपोर्ट को समझने और कुछ यह तय करने के लिए AI का सहारा ले रहे हैं कि डॉक्टर के पास जाना चाहिए या नहीं।
यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब ChatGPT जैसे जनरेटिव AI टूल लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल पहले से आम है, लेकिन AI चैटबॉट के साथ उपयोगकर्ता सीधे बातचीत कर सकता है, अपने लक्षणों का विवरण दे सकता है और तुरंत जवाब पा सकता है। यही सुविधा इसे पारंपरिक सर्च इंजन से अलग बनाती है और स्वास्थ्य क्षेत्र में इसके इस्तेमाल को लेकर नई संभावनाओं के साथ-साथ गंभीर सवाल भी खड़े करती है।

Pew Research का सर्वे क्या कहता है?
Pew Research Center ने यह अध्ययन 22 से 28 जून 2026 के बीच किया। इसमें अमेरिका के 3,488 वयस्कों को शामिल किया गया। यह सर्वे American Trends Panel के माध्यम से किया गया था और इसका उद्देश्य यह समझना था कि अमेरिकी स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में AI चैटबॉट का इस्तेमाल क्यों करते हैं और उन्हें इससे मिलने वाली जानकारी कितनी उपयोगी लगती है।
रिपोर्ट के अनुसार 34% अमेरिकी वयस्कों ने सर्वे में पूछे गए आठ स्वास्थ्य और चिकित्सा कारणों में से कम-से-कम एक के लिए कभी न कभी AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया। Pew ने ऐसे लोगों को “chatbot health users” की श्रेणी में रखा है। इसलिए इस आंकड़े को यह कहकर समझना सही नहीं होगा कि 34% अमेरिकी अपने डॉक्टर की जगह AI को इस्तेमाल कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा लोग किस काम के लिए AI से पूछ रहे हैं?
सर्वे में सामने आया कि 28% अमेरिकी वयस्क स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जल्दी हासिल करने के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 25% लोगों ने कहा कि वे यह समझने के लिए चैटबॉट का सहारा लेते हैं कि उनके लक्षणों के पीछे संभावित कारण क्या हो सकता है।
इसके अलावा 22% लोग उपचार से संबंधित जानकारी लेने के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं। इतने ही यानी 22% लोग डॉक्टर द्वारा बताए गए निदान को बेहतर तरीके से समझने के लिए चैटबॉट का सहारा लेते हैं। 20% लोग लैब रिपोर्ट समझने के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 18% लोग ऐसे स्वास्थ्य विषयों की जानकारी लेने के लिए AI का उपयोग करते हैं, जिनके बारे में वे किसी दूसरे व्यक्ति से बात करने में असहज महसूस करते हैं। वहीं 15% लोग यह तय करने में मदद लेने के लिए चैटबॉट का इस्तेमाल करते हैं कि उन्हें डॉक्टर के पास जाना चाहिए या नहीं।

मुफ्त और तुरंत मिलने वाली जानकारी भी बड़ी वजह
स्वास्थ्य संबंधी AI के बढ़ते इस्तेमाल के पीछे केवल तकनीक के प्रति आकर्षण नहीं है। 22% अमेरिकी वयस्कों ने कहा कि कम या बिना लागत में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करना AI चैटबॉट इस्तेमाल करने की वजह है। यानी AI को स्वास्थ्य जानकारी का एक ऐसा माध्यम माना जा रहा है जो तेज और अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध है।
यह पहलू स्वास्थ्य व्यवस्था के संदर्भ में खास महत्व रखता है। डॉक्टर से मिलने के लिए समय लेना, फीस देना या सामान्य सवाल के लिए क्लिनिक जाना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में AI चैटबॉट लोगों को तत्काल प्रारंभिक जानकारी दे सकता है। लेकिन सुविधा और चिकित्सा विश्वसनीयता को एक ही चीज मान लेना खतरनाक हो सकता है।

क्या लोगों को AI की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपयोगी लगती है?
Pew Research के आंकड़े इस सवाल का दिलचस्प जवाब देते हैं। AI का स्वास्थ्य संबंधी इस्तेमाल करने वालों में 47% ने कहा कि उन्हें चैटबॉट से मिलने वाली जानकारी बेहद या बहुत उपयोगी लगती है, जबकि 48% ने इसे कुछ हद तक उपयोगी बताया। केवल 5% ने इसे बहुत कम या बिल्कुल उपयोगी नहीं माना।
इससे साफ है कि AI स्वास्थ्य जानकारी के मामले में उपयोगकर्ताओं को वास्तविक सुविधा दे रहा है। लेकिन किसी जानकारी का उपयोगी लगना और उसका चिकित्सकीय रूप से सही होना दो अलग बातें हैं। यही वह अंतर है जिसे AI इस्तेमाल करने वाले लोगों को समझना सबसे जरूरी है।

युवा और पढ़े-लिखे लोग AI हेल्थ टूल का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे
Pew के सर्वे में उम्र और शिक्षा के आधार पर भी बड़ा अंतर सामने आया। 18 से 29 वर्ष के 44% और 30 से 49 वर्ष के 40% अमेरिकी वयस्क स्वास्थ्य संबंधी कारणों से AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसके मुकाबले 50 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में यह आंकड़ा 32% और 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र वालों में केवल 17% रहा।
शिक्षा के स्तर पर भी अंतर देखा गया। चार वर्षीय कॉलेज डिग्री या उससे अधिक शिक्षा वाले 44% लोगों ने स्वास्थ्य कारणों से चैटबॉट का इस्तेमाल किया, जबकि हाई स्कूल या उससे कम शिक्षा वाले लोगों में यह आंकड़ा 23% था। ऊंची आय वाले समूह में भी उपयोग का स्तर अपेक्षाकृत अधिक रहा।

AI से स्वास्थ्य पूछने में सबसे बड़ा सवाल—कितना भरोसा करें?
यहीं से इस तकनीक का दूसरा पक्ष सामने आता है। AI चैटबॉट बहुत आत्मविश्वास के साथ जवाब दे सकता है, लेकिन आत्मविश्वासपूर्ण भाषा का अर्थ यह नहीं कि जवाब हमेशा सही है। चिकित्सा क्षेत्र में गलत जानकारी का परिणाम सामान्य गलत सूचना से कहीं गंभीर हो सकता है।
2026 में प्रकाशित एक चिकित्सकीय अध्ययन में चार सार्वजनिक AI चैटबॉट के मरीजों द्वारा पूछे गए चिकित्सा सवालों के जवाबों का परीक्षण किया गया। अध्ययन में मॉडल के अनुसार 21.6% से 43.2% तक जवाब समस्याग्रस्त पाए गए और कुछ उत्तरों में ऐसे जोखिम भी मिले जो मरीज को नुकसान पहुंचा सकते थे।
एक अन्य अध्ययन में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े पांच लोकप्रिय चैटबॉट के जवाबों का ऑडिट किया गया। इसमें लगभग 49.6% प्रतिक्रियाओं को किसी न किसी स्तर पर समस्याग्रस्त पाया गया। शोधकर्ताओं ने गलत जानकारी, कमजोर संदर्भ और कुछ मामलों में गढ़े गए संदर्भों जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया।

निजी मेडिकल जानकारी साझा करने को लेकर भी बंटे हुए हैं लोग
AI चैटबॉट से स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछते समय उपयोगकर्ता अक्सर अपनी बीमारी, दवाओं, उम्र, लक्षण, रिपोर्ट और अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं। ऐसे में डेटा की गोपनीयता भी बड़ा मुद्दा बन जाती है।
Pew के अनुसार स्वास्थ्य के लिए चैटबॉट इस्तेमाल कर चुके लोगों में 29% लोग निजी स्वास्थ्य जानकारी साझा करने में बहुत या बेहद सहज थे। वहीं 42% कुछ हद तक सहज थे और 26% ने कहा कि वे ऐसी जानकारी साझा करने में बहुत सहज नहीं हैं या बिल्कुल सहज नहीं हैं।
यानी AI से स्वास्थ्य जानकारी लेने की इच्छा और अपनी निजी मेडिकल जानकारी साझा करने को लेकर भरोसा—दोनों एक साथ नहीं चल रहे। यह स्थिति तकनीकी कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि हेल्थ AI में पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा कितनी जरूरी होगी।

अमेरिका में AI हेल्थ टेक्नोलॉजी के लिए बढ़ रही नियामकीय चर्चा
AI के स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेरिका का Food and Drug Administration यानी FDA भी जनरेटिव AI आधारित मेडिकल डिवाइस के जोखिम और नियमन पर काम कर रहा है। अगस्त 2026 में FDA ने GenAI-enabled medical devices के नियमन को लेकर एक Discussion Paper जारी किया, जिसमें जोखिम आकलन, बाजार में आने से पहले मूल्यांकन और बाजार में आने के बाद निगरानी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है।
FDA का यह कदम बताता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का इस्तेमाल केवल तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है। जैसे-जैसे AI चिकित्सा निर्णयों के करीब पहुंच रहा है, वैसे-वैसे उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और जवाबदेही भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

डॉक्टर की जगह AI या डॉक्टर के साथ AI?
मौजूदा तस्वीर को देखते हुए AI चैटबॉट को स्वास्थ्य जानकारी का सहायक माध्यम मानना ज्यादा उचित है, डॉक्टर का विकल्प नहीं। सामान्य जानकारी, मेडिकल शब्दों का अर्थ समझने, किसी रिपोर्ट में लिखे तकनीकी शब्दों को समझने या डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवालों की सूची तैयार करने में AI उपयोगी हो सकता है।
लेकिन गंभीर लक्षण, आपात स्थिति, नई बीमारी का निदान, दवा की मात्रा बदलने, दवा बंद करने या उपचार शुरू करने जैसे फैसले केवल चैटबॉट के जवाब के आधार पर लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। शोध में AI के गलत या असुरक्षित चिकित्सा जवाबों की संभावना सामने आ चुकी है।

स्वास्थ्य में AI का भविष्य बड़ा है, लेकिन भरोसा सावधानी के साथ
Pew Research का सर्वे बताता है कि अमेरिका में AI और स्वास्थ्य के बीच संबंध तेजी से मजबूत हो रहा है। 34% अमेरिकी वयस्क स्वास्थ्य या चिकित्सा से जुड़े कम-से-कम एक कारण के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर चुके हैं। सबसे बड़ी वजह तेजी से जानकारी मिलना है, जबकि लक्षणों को समझना, उपचार की जानकारी लेना, डॉक्टर के निदान और लैब रिपोर्ट को समझना भी प्रमुख कारण हैं।
यह बदलाव स्वास्थ्य जानकारी के भविष्य की ओर इशारा करता है, लेकिन इसके साथ एक स्पष्ट चेतावनी भी है। AI की भाषा कितनी भी सहज और भरोसेमंद क्यों न लगे, वह हर स्थिति में डॉक्टर की जांच, मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और चिकित्सकीय निर्णय का स्थान नहीं ले सकती। खासतौर पर गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में AI की सलाह पर निर्भर रहने के बजाय योग्य चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
आने वाले वर्षों में असली सवाल यह नहीं होगा कि “क्या AI स्वास्थ्य क्षेत्र में आएगा?” बल्कि यह होगा कि “AI को स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है?” Pew के आंकड़े बताते हैं कि उपयोगकर्ता पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अब तकनीकी कंपनियों, डॉक्टरों और नियामकों की जिम्मेदारी है कि यह बढ़ता भरोसा मरीजों की सुरक्षा की कीमत पर न बने।

Geeta Singh
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