
कन्नौज/उमर्दा। कन्नौज जिले के उमर्दा विकासखंड की ग्राम पंचायत पट्टी में बिजली संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगा ट्रांसफार्मर पिछले करीब 10 से 12 दिनों से खराब है, जिसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित है। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में विद्युत विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ट्रांसफार्मर खराब, घरों में ठप हुए जरूरी काम
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के अभाव में घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। गर्मी के मौसम में पंखे और अन्य विद्युत उपकरण बंद होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों से शिकायत और गुहार के बावजूद समस्या का तत्काल समाधान नहीं हो सका।स्थानीय निवासी शीलू यादव के मुताबिक, ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद ग्रामीणों को लगातार आश्वासन मिल रहा है, लेकिन कई दिनों तक आपूर्ति बहाल नहीं होने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों ने जल्द समाधान नहीं होने पर तिर्वा स्थित बिजली विभाग के कार्यालय और जिला प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत करने की बात कही है।
बिजली संकट से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
लंबी बिजली कटौती का असर गांव के प्राथमिक विद्यालय पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार भीषण गर्मी में छोटे बच्चों को कक्षाओं में बैठने में परेशानी हो रही है। बिजली न होने से विद्यालय में पेयजल, मध्याह्न भोजन तैयार करने और अन्य जरूरी कार्यों में भी दिक्कतें आने की बात सामने आई है।ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की नियमित आपूर्ति केवल घरेलू सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय के सामान्य संचालन के लिए भी जरूरी है। ऐसे में ट्रांसफार्मर की खराबी का जल्द निस्तारण आवश्यक है।
आटा चक्की बंद, अनाज की जरूरत ने बढ़ाई परेशानी
बिजली संकट का असर गांव की स्थानीय आजीविका पर भी दिखाई दे रहा है। ग्रामीण सलीम, जो आटा चक्की का संचालन करते हैं, के अनुसार बिजली नहीं होने के कारण उनकी चक्की पिछले कई दिनों से बंद है। इससे ग्रामीणों को गेहूं पिसवाने के लिए दूसरे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।लंबे समय तक चक्की बंद रहने से ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरत के अनाज की समस्या भी पैदा होने की बात कही गई है। यह स्थिति बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर केवल रोशनी और पंखे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और दैनिक जरूरतों पर भी पड़ता है।
रात का अंधेरा बढ़ा रहा सांप-बिच्छुओं का खतरा
बारिश के मौसम में बिजली गुल रहने से सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण हिमांशु के मुताबिक, अंधेरे के कारण रात के समय सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा बढ़ गया है। इन्वर्टर की बैटरी भी लंबे समय तक बिजली न आने के कारण जवाब दे चुकी है, जिससे रात में घरों और आसपास के रास्तों पर पर्याप्त रोशनी नहीं रह रही।ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान पहले से ही जहरीले जीवों का खतरा रहता है और लगातार बिजली बंद रहने से यह चिंता और बढ़ गई है।
विभाग ने दिया समाधान का भरोसा, अब निगाहें ट्रांसफार्मर पर
मामले में अवर अभियंता चंदन कुमार से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि नया ट्रांसफार्मर लगाने की प्रक्रिया की जा रही है और दोपहर एक से दो बजे के बीच ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।अब सवाल यह है कि विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर पाता है या नहीं। यदि आपूर्ति बहाल होती है तो कई दिनों से गर्मी, अंधेरे और रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
उमर्दा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पहले भी रही चुनौती
उमर्दा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। जून 2026 में केबल में फॉल्ट के कारण उमर्दा कस्बे समेत करीब 30 गांवों की बिजली लगभग 20 घंटे बाधित रही थी। उस समय बिजली निगम कर्मचारियों ने फॉल्ट ठीक कर आपूर्ति बहाल की थी।यह स्थिति इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे के रखरखाव और खराब उपकरणों को समय पर बदलना कितना महत्वपूर्ण है।






