
संवाद 24 नई दिल्ली। नेपाल के पर्वतीय इलाकों में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। बादलों के फटने और मूसलाधार बारिश के बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ तथा भीषण भूस्खलन के कारण रसुवा जिले में स्थित कम से कम छह प्रमुख हाइड्रोपावर (जलविद्युत) परियोजनाओं में 500 से अधिक कर्मचारी और मजदूर फंस गए हैं। यह संकट इतना गंभीर हो चुका है कि पानी, कीचड़ और भारी मलबे के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना और सुरक्षा बलों ने देश का अब तक का सबसे बड़ा और जोखिम भरा संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया है।
11 हजार जवानों की तैनाती, ड्रोन से निगरानी
रसुवा जिले के दुर्गम भौगोलिक हालात में राहत कार्य को अंजाम देने के लिए नेपाली सेना के लगभग 7,000 जवान और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (NAPF) के करीब 4,000 जवान पूरी मुस्तैदी से मैदान में उतरे हुए हैं। कुल 11,000 जवानों की यह संयुक्त टीम प्रतिकूल मौसम, लगातार गिरते पत्थरों और चारों तरफ फैली दलदली मिट्टी के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है।
नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता एवं डीआईजी नेत्र बहादुर कार्की के अनुसार, बचाव दलों की प्राथमिकता सूची में छह प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं –
- ऊपरी त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट
- ऊपरी त्रिशूली-1
- रसुवा जलविद्युत परियोजना
- त्रिशूली 3A
- चिलिमे खोला
- लांगटांग जलविद्युत परियोजना
इन तमाम हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के विभिन्न हिस्सों, सुरंगों और परिसरों में 500 से अधिक लोगों के फंसे होने की पुष्टि हुई है। स्थिति का सटीक आकलन करने और फंसे लोगों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन्स की भी मदद ली जा रही है।
सुरंगों में ड्रिलिंग और चट्टानों की दीवार
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह बचाव अभियान अब तक के इतिहास का सबसे जटिल ऑपरेशन साबित हो रहा है। भारी भूस्खलन के कारण हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के प्रवेश और निकास द्वारों पर विशालकाय चट्टानें और टनों कीचड़ जमा हो गया है। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट ने बताया कि त्रिशूली 3A हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में रास्ता बनाने के लिए भारी ड्रिलिंग मशीनों का सहारा लिया जा रहा है ताकि फंसे हुए कर्मियों को वेंटिलेशन और निकास मार्ग मिल सके।
आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस भीषण जलप्रलय की शुरुआत से ही राहत कार्य में जुटे सुरक्षा बलों के 13 जवान भी लापता हैं। हालांकि, भारी मशक्कत के बाद धुंचे तक के मुख्य मार्ग को चार पहिया वाहनों की आवाजाही के लिए आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है, जिससे राहत सामग्री और भारी मशीनरी को मौके पर पहुंचाना संभव हो पा रहा है।
60 घंटे मलबे में दबी रही 6 साल की मासूम, चमत्कारिक बचाव
इस भयावह प्राकृतिक आपदा के बीच एक रोंगटे खड़े कर देने वाला चमत्कार भी देखने को मिला। रसुवा के तिमुरे क्षेत्र में मलबे के भारी ढेर के नीचे लगभग 60 घंटों तक दबी रही 6 साल की मासूम बच्ची ‘मनीषा’ को सुरक्षाबलों ने सकुशल बाहर निकाल लिया। मलबे के नीचे से रोने की हल्की आवाज सुनकर जवानों ने तत्काल सावधानीपूर्वक खुदाई की और बच्ची को जीवित बचा लिया। हालांकि, आपदा में उसके माता-पिता अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
बुनियादी ढांचे पर गहरा संकट
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। न केवल सड़कें और पुल बह गए हैं, बल्कि बिजली उत्पादन और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों पर भी बाढ़ का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन और सेना की टीमें समय के साथ होड़ लगाते हुए 24 घंटे मलबा हटाने और सुरंगों को खाली कराने में जुटी हैं, ताकि 500 से अधिक लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।






